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घंटों करते हैं इंतजार, फिर खड़े-खड़े करनी पड़ती है यात्रा
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झांसी । महानगर के बस स्टैंड से बरुआसागर, निवाड़ी, सकरार, बंगरा, मऊरानीपुर, हरपालपुर, पनवाड़ी, महोबा, बांदा और राठ जाने के लिए यात्रियों को निजी बसों या डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। इस मार्ग पर चलने वाली बसों का यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। निजी बसों के आने-जाने की कोई समय सारिणी नहीं है। इससे यात्रियों को खड़े-खड़े यात्रा करनी पड़ रही है, निजी बस संचालकों की मनमानी से यात्री परेशान हैं।
चुनाव के चलते रोडवेज में बसों की कमी झेल रहे डिपो की बसें इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों का चक्कर कम लगा रही हैं। साथ ही अधिकतर लंबी दूरी पर चलने वाली बसें कई दिनों से बंद भी चल रही हैं। जिससे कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों से मुख्यालय आने वाले यात्रियों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में यातायात सेवा देने के लिए परिवहन विभाग ने 70 निजी बसों को रूट के हिसाब से परमिट जारी किए हैं। लेकिन बस संचालक नियम तोड़ रहे। इन बसों का स्टैंड पर खड़े होने का कोई समय निर्धारित है, इससे बसे सवारी भरने के लिए स्टैंड पर अधिक समय तक खड़ी रहती हैं। इससे यात्रियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बरुआसागर निवासी प्रवेश ने बताया कि बस संचालक स्टैंड से सवारी भरकर चल देते हैं, लेकिन रास्ते में फिर रोक देते हैं।
जिला अस्पताल दवाई लेने के लिए निजी बस से खड़े-खड़े आए थे। अब फिर निवाड़ी जाना है, बस का इंतजार कर रहे हैं।
आकाश ने बताया कि वह मऊरानीपुर जा रहे हैं, अक्सर झांसी आना होता है, निजी बस संचालकों ने किराया भी बढ़ा दिया है।
विजय ने बताया कि गुरसराय तक जाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है, कभी-कभी पूरी यात्रा के खड़े होकर करनी पड़ जाती है।
ऐसी मुझे जानकारी नहीं है, अगर यात्रियों को ऐसी समस्या हो रही है, तो निजी बस संचालकों से बात करके समस्या का समाधान किया जाएगा। - सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ
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चुनाव के चलते रोडवेज में बसों की कमी झेल रहे डिपो की बसें इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों का चक्कर कम लगा रही हैं। साथ ही अधिकतर लंबी दूरी पर चलने वाली बसें कई दिनों से बंद भी चल रही हैं। जिससे कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों से मुख्यालय आने वाले यात्रियों को निजी बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, ग्रामीण इलाकों में यातायात सेवा देने के लिए परिवहन विभाग ने 70 निजी बसों को रूट के हिसाब से परमिट जारी किए हैं। लेकिन बस संचालक नियम तोड़ रहे। इन बसों का स्टैंड पर खड़े होने का कोई समय निर्धारित है, इससे बसे सवारी भरने के लिए स्टैंड पर अधिक समय तक खड़ी रहती हैं। इससे यात्रियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बरुआसागर निवासी प्रवेश ने बताया कि बस संचालक स्टैंड से सवारी भरकर चल देते हैं, लेकिन रास्ते में फिर रोक देते हैं।
जिला अस्पताल दवाई लेने के लिए निजी बस से खड़े-खड़े आए थे। अब फिर निवाड़ी जाना है, बस का इंतजार कर रहे हैं।
आकाश ने बताया कि वह मऊरानीपुर जा रहे हैं, अक्सर झांसी आना होता है, निजी बस संचालकों ने किराया भी बढ़ा दिया है।
विजय ने बताया कि गुरसराय तक जाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है, कभी-कभी पूरी यात्रा के खड़े होकर करनी पड़ जाती है।
ऐसी मुझे जानकारी नहीं है, अगर यात्रियों को ऐसी समस्या हो रही है, तो निजी बस संचालकों से बात करके समस्या का समाधान किया जाएगा। - सत्येंद्र कुमार, एआरटीओ
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