फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Vijay Diwas: When Indian soldiers celebrated Liberation Day in Dhaka

विजय दिवस: जब भारतीय सैनिकों ने ढाका में मनाया था मुक्ति दिवस, बुंदेलखंड के सैकड़ों जवानों ने लिया था लोहा

Tue, 16 Dec 2025 11:08 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी Published by: दीपक महाजन Updated Tue, 16 Dec 2025 11:08 AM IST
सार

आज जब देश विजय दिवस मना रहा है, तब बुंदेलखंड के लिए यह दिन गौरव, बलिदान और स्मृति का भी है। यह याद दिलाता है कि ढाका की जीत सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि बुंदेले जांबाजोंं के हौसले से भी संभव हुई, जिनकी गूंज इस धरती में बसती है।
 

विज्ञापन
Vijay Diwas: When Indian soldiers celebrated Liberation Day in Dhaka
विजय दिवस - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

सत्ता परिवर्तन की वजह से भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्ते असहज हो गए हैं लेकिन वर्ष 1971 में जब बांग्लादेश मुक्ति संग्राम निर्णायक मोड़ पर था, तब भारत ने नए राष्ट्र के जन्म में अहम भूमिका निभाई। बुंदेलखंड के सैकड़ों सैनिकों ने भी पूर्वी मोर्चे पर दुश्मन से लोहा लिया था। कई जवानों ने सीमा पार अभियान में हिस्सा लिया तो कई ने रसद, संचार और रणनीतिक मोर्चों पर निर्णायक भूमिका निभाई। उस दौर में ढाका की सड़कों पर भारतीय सैनिकों का फूलों से जोरदार स्वागत हुआ था। अमर उजाला ने 17 दिसंबर 1971 के अंक में ढाका में भारतीय जवानों का भाव-भीना मार्मिक स्वागत शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। 
विज्ञापन



कर्फ्यू के बावजूद सड़कों पर थी भारी भीड़
बता दें कि भारत में 16 दिसंबर को विजय दिवस 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत और बांग्लादेश के गठन की स्मृति में मनाया जाता है। तब ढाका में पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना और मित्र वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण किया था। अमर उजाला में प्रकाशित खबरों के मुताबिक 16 दिसंबर को नई दिल्ली से करीब 1600 किलोमीटर दूर ढाका में मुक्ति दिवस मनाया गया था। ढाका में उस दिन अपराह्न 1:30 बजे खुशियों के सैलाब के बीच भारतीय सेना को लेकर एक जीप घुसी तब अथाह फूल बरसाए गए। कर्फ्यू के बावजूद सड़कों पर भारी भीड़ थी। बंगालियों को जहां कहीं भारतीय सैनिक दिख जाते वे गगनभेदी नारों के साथ हर्ष से चीख पड़ते थे। तब मुक्ति की प्रेरणा देने वाले शेख मुजीब पश्चिमी पाकिस्तान की किसी जेल में बंद थे। आजादी के 54 साल बाद अब तस्वीर बिल्कुल उलट हो गई है। शेख मुजीब की बेटी बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और कई मामलों में सजायाफ्ता शेख हसीना भारत में एक साल से अधिक समय से निर्वासित जिंदगी जी रही हैं। आज जब देश विजय दिवस मना रहा है, तब बुंदेलखंड के लिए यह दिन गौरव, बलिदान और स्मृति का भी है। यह याद दिलाता है कि ढाका की जीत सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि बुंदेले जांबाजोंं के हौसले से भी संभव हुई, जिनकी गूंज इस धरती में बसती है।
विज्ञापन



 

Vijay Diwas: When Indian soldiers celebrated Liberation Day in Dhaka
अमर उजाला ने 17 दिसंबर 1971 के अंक में खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। - फोटो : अमर उजाला
पाक सैनिकों ने भी दी थी लेफि्टनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा को सलामी 
उस दिन बीच भारतीय सैनिक चारों तरफ से ढाका शहर में घुस रहे थे। सभी अधिकारी रेसकोर्स के ऐतिहासिक मैदान पर पहुंचे जहां बंग बंधु ने पाकिस्तानी फाैजी हुकूमत के खिलाफ असहयोग आंदोलन छेड़ने की घोषणा की थी। उसी मैदान पर जनरल नियाजी ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से आत्मसमर्पण के समझाैते पर हस्ताक्षर किए थे। लेफि्टनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा को भारतीय और पाकिस्तानी सैनिक से संयुक्त रूप से सलामी दी और बाद में जनता ने जनरल अरोड़ा को कंधों पर उठा लिया था। बंगालियों ने सिख सैनिकों को चूमना शुरू कर दिया था। 


ढाका का नाम मुजीबनगर रखने का एलान 
बांग्लादेश के तत्कालीन प्रधानमंत्री ताजुद्दीन अहमद ने तब स्वाधीनता के आंदोलन में भारतीय सेना के तीनाें अंगों की भूमिका की काफी तारीफ की थी। उसी दिन उन्होंने ढाका का नाम मुजीबनगर रखने का एलान किया था लेकिन इस वर्ष शेख मुजीबुर रहमान की मूर्तियों को पहुंचाया गया नुकसान उस सच्चाई को दिखाता है कि नायक भी सत्ता के संघर्ष में कैसे असुरक्षित हो जाता है।


इंदिरा गांधी ने अमेरिका को ठहराया था जिम्मेदार 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही टैरिफ समेत अन्य नीतियों को भारत समेत अन्य देशों पर थोपने पर आमदा है, लेकिन उस दाैर में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को पत्र लिखकर कहा था कि यदि सभी राष्ट्रों खास अमेरिका द्वारा अपनी शक्ति और प्रभाव का उपयोग बंग बंधु शेख मुजीब को छुड़ाने में किया गया होता तो भारत-पाकिस्तान युद्ध को टाला जा सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान को हड़पने की हमारी कोई इच्छा नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed