{"_id":"61b2546d95337e6a7929552b","slug":"vaccine-for-new-strain-of-flu-will-be-launched-in-jhansi-from-new-year-jhansi-news-jhs2105895112","type":"story","status":"publish","title_hn":"नए साल से झांसी में लगेगी फ्लू के नए स्ट्रेन की वैक्सीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नए साल से झांसी में लगेगी फ्लू के नए स्ट्रेन की वैक्सीन
विज्ञापन
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में नए साल से बच्चों से लेकर बड़ों तक को फ्लू यानी इंफ्लुएंजा के नए स्ट्रेन (रूप) की वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी। अगर शिशु पहले ही ह्रदय, गुर्दा, खून की बीमारी या कुपोषण का शिकार है, तो उसे ये टीका जरूर लगवाएं। इससे फ्लू के घातक परिणामों से बचा जा सकेगा।
फ्लू का टीका छह महीने के शिशु से बड़े बच्चों को लगाया जाता है। पहली बार टीका लगवाने पर एक महीने के अंतर से दोबारा टीका लगाया जाता है। इसके बाद हर साल में एक बार लगता है। फ्लू वायरस बहुत ज्यादा बदलता है, इसलिए डब्ल्यूएचओ के निर्देशानुसार इस टीके का उत्पादन हर साल दो बार किया जाता है। अब तक एनएच स्ट्रेन का टीका मेडिकल कॉलेज में लग रहा है मगर नए साल से एसएच स्ट्रेन की वैक्सीन लगने लगेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक पांच साल से कम के शिशुओं को फ्लू से निमोनिया होने की आशंका ज्यादा रहती है। अगर शिशु पहले ही ह्रदय, गुर्दा, खून की बीमारी या कुपोषण का शिकार है तो बेहद घातक साबित हो सकता है। इसलिए समय पर टीका लगवा लेना चाहिए।
श्वासन तंत्र का एक संक्रामक रोग है
इंफ्लुएंजा श्वासन तंत्र का एक संक्रामक रोग होता है। इसकी शुरूआत खांसी, जुकाम और हल्के बुखार के साथ होती हे। वायरस हमारे शरीर में नाक, आंख, मुंह से प्रवेश करता है। इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति के खांसने, छींकने पर अन्य व्यक्ति संपर्क में आता है तो वायरस फैल सकता है।
विज्ञापन
ये हैं लक्षण
- फ्लू की चपेट में आने पर थकान महसूस होती है। शरीर अस्वस्थ रहने लगता है।
- कमजोरी आ जाती है। कुछ भी काम करने पर चक्कर आता है।
- तेजी बुखार हो जाता है और ठंड लगने लगती है।
- गले में कफ जमने से खाने-पीने और सांस लेने में तकलीफ होती है।
- मरीज के सिर में दर्द भी होता है। वायरस के फैलने पर त्वचा नीली पड़ जाती है।
कमजोर इम्यूनिटी वाले बड़े भी लगवा सकते
डॉक्टरों ने बताया कि सिर्फ बच्चे ही नहीं बड़े भी फ्लू की वैक्सीन लगवा सकते हैं। खासकर जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो। बताया कि ह्रदय, श्वांस, किडनी, लिवर, कैंसर आदि बीमारियों का शिकार रोगियों की इम्युनिटी कमजोर होती है। ऐसे में इन्हें तो फ्लू का टीका लगवाना ही चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी ये वैक्सीन लगवानी चाहिए।
नए साल से मेडिकल कॉलेज में फ्लू यानी इंफ्लुएंजा के नए स्ट्रेन की वैक्सीन लगने लगेगी। स्ट्रेन में बदलाव होने की वजह से समय-समय पर नई वैक्सीन आती है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।
विज्ञापन
फ्लू का टीका छह महीने के शिशु से बड़े बच्चों को लगाया जाता है। पहली बार टीका लगवाने पर एक महीने के अंतर से दोबारा टीका लगाया जाता है। इसके बाद हर साल में एक बार लगता है। फ्लू वायरस बहुत ज्यादा बदलता है, इसलिए डब्ल्यूएचओ के निर्देशानुसार इस टीके का उत्पादन हर साल दो बार किया जाता है। अब तक एनएच स्ट्रेन का टीका मेडिकल कॉलेज में लग रहा है मगर नए साल से एसएच स्ट्रेन की वैक्सीन लगने लगेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक पांच साल से कम के शिशुओं को फ्लू से निमोनिया होने की आशंका ज्यादा रहती है। अगर शिशु पहले ही ह्रदय, गुर्दा, खून की बीमारी या कुपोषण का शिकार है तो बेहद घातक साबित हो सकता है। इसलिए समय पर टीका लगवा लेना चाहिए।
विज्ञापन
श्वासन तंत्र का एक संक्रामक रोग है
इंफ्लुएंजा श्वासन तंत्र का एक संक्रामक रोग होता है। इसकी शुरूआत खांसी, जुकाम और हल्के बुखार के साथ होती हे। वायरस हमारे शरीर में नाक, आंख, मुंह से प्रवेश करता है। इस वायरस से पीड़ित व्यक्ति के खांसने, छींकने पर अन्य व्यक्ति संपर्क में आता है तो वायरस फैल सकता है।
विज्ञापन
ये हैं लक्षण
- फ्लू की चपेट में आने पर थकान महसूस होती है। शरीर अस्वस्थ रहने लगता है।
- कमजोरी आ जाती है। कुछ भी काम करने पर चक्कर आता है।
- तेजी बुखार हो जाता है और ठंड लगने लगती है।
- गले में कफ जमने से खाने-पीने और सांस लेने में तकलीफ होती है।
- मरीज के सिर में दर्द भी होता है। वायरस के फैलने पर त्वचा नीली पड़ जाती है।
कमजोर इम्यूनिटी वाले बड़े भी लगवा सकते
डॉक्टरों ने बताया कि सिर्फ बच्चे ही नहीं बड़े भी फ्लू की वैक्सीन लगवा सकते हैं। खासकर जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो। बताया कि ह्रदय, श्वांस, किडनी, लिवर, कैंसर आदि बीमारियों का शिकार रोगियों की इम्युनिटी कमजोर होती है। ऐसे में इन्हें तो फ्लू का टीका लगवाना ही चाहिए। वहीं, स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी ये वैक्सीन लगवानी चाहिए।
नए साल से मेडिकल कॉलेज में फ्लू यानी इंफ्लुएंजा के नए स्ट्रेन की वैक्सीन लगने लगेगी। स्ट्रेन में बदलाव होने की वजह से समय-समय पर नई वैक्सीन आती है। - डॉ. ओमशंकर चौरसिया, बाल रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज।