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Jhansi News: चहेते को काम दिलाने के लिए एक्सईएन के डोंगल का इस्तेमाल

Sun, 01 Jun 2025 01:24 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 01 Jun 2025 01:24 AM IST
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Use of XEN's dongle to get work for a favourite
- नगर निगम में टेंडर के खेल का मामला, कइयों पर लटक रही कार्रवाई की तलवार अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। नगर निगम में वार्ड 55 के टेंडर में खेल कर चहेते को काम दिलाने के मामले में रोजाना नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब पता चला है कि इस खेल में निर्माण विभाग की एक्सईएन के डोंगल का इस्तेमाल किया गया। इस मामले में कइयों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
वार्ड 55 सिविल लाइन में 7.63 लाख रुपये के सड़क, नाली के टेंडर को नियमों को ताक पर रखकर चहेते ठेकेदार को दिलाने में निर्माण विभाग बुरी तरह फंस गया है। एक दिन तारीख बढ़ाने के लिए नगर आयुक्त की अनुमति नहीं लगी गई। शुक्रवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद जब मामले का खुलासा हुआ तो नगर आयुक्त ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है। टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा स्टाफ अपने को बचाने एक-दूसरे के पाले में गेंद डालता नजर आ रहा है। मामले में नया मोड़ ये आया है कि एक्सईएन नीना सिंह के डोंगल का उपयोग करके शुद्धिपत्र डालकर टेंडर की तारीख एक दिन के लिए बढ़ा दी गई। डोंगल का इस्तेमाल डिजिटल साइन के लिए किया जाता है। डोंगल के बिना न तो टेंडर अपलोड होता है और न ही उसमें किसी तरह का संशोधन होता है। हालांकि, एक्सईएन का कहना है कि उनकी भी बिना अनुमति के डोंगल का इस्तेमाल किया गया। वहीं, दूसरी तरफ, जिस व्यक्ति आलोक गोस्वामी का लिखकर पूरे मामले की शिकायत नगर विकास मंत्री से की गई है, उसने नगर आयुक्त को प्रार्थनापत्र सौंपा। कहा कि उसके नाम और मोबाइल नंबर का दुरुपयोग करके ये शिकायत की गई है। पत्र में उनकी राइटिंग भी नहीं है। शिकायत से उसका कोई सरोकार नहीं है।
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उठ रहे सवाल, किसके दबाव में डाला गया शुद्धिपत्र
बड़ा सवाल ये उठा रहा है कि आखिर किसके दबाव में बिना नगर आयुक्त की अनुमति के वेबसाइट पर शुद्धिपत्र अपलोड किया गया। हालांकि, इस बात की चर्चा है कि एक अधिकारी ने एक कर्मचारी पर शुद्धिपत्र अपलोड करने का दबाव बनाया। अब चूंकि मामला फंस गया है, ऐसे में कर्मचारी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जबकि, अधिकारी ने किसी भी पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, ऐसे में वो पूरे मामले में बच जा रहे हैं। मगर कर्मचारी मुंह खोलेगा तो अधिकारी के लिए भी मुश्किल हो सकती है।
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