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UP: मां सोच रही थी कि पढ़ रहा है... बेटे की बाहर जल रही थी लाश; चीख न निकले, इसके लिए मुंह में ठूंसा था कपड़ा
Sun, 14 Jan 2024 03:23 PM IST
शाहरुख खान
विकास सनाड्य, अमर उजाला, झांसी
विकास सनाड्य, अमर उजाला, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 14 Jan 2024 03:23 PM IST
सार
यूपीएससी की परीक्षा में असफल हो रहे छात्र ने खुद को आग लगाकर चौथे माले से कूदकर जान दे दी। उसने स्कूटी से पेट्रोल निकालकर खुद पर डाल लिया था। लपटों में घिरे छात्र ने मकान की छत से छलांग लगा दी। छात्र के कमरे से पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला है।
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झांसी में छात्र ने की आत्महत्या
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झांसी के सीपरी बाजार थाना इलाके की चित्रकूट कॉलोनी में रहने वाले एक छात्र ने यूपीएससी की परीक्षा में लगातार असफल होने पर बीती रात अपने घर की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले उसने पेट्रोल डालकर खुद को आग लगाई और फिर मकान की चौथी मंजिल से कूद गया। छात्र की मौके पर ही मौत हो गई।
आत्मघाती कदम उठाने वाले छात्र के कमरे से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें उसने लिखा है कि उसकी मौत के सौ से भी ज्यादा कारण हो सकते हैं। वहीं, यूपीएससी की परीक्षा में लगातार असफल होने पर आत्महत्या करने वाले छात्र की मां घटना के वक्त सोच रही थी कि बेटा अपने कमरे में पढ़ रहा है, जबकि घर के बाहर गली में उसकी लाश जल रही थी।
मुंह से चीख न निकले, इसके लिए आत्महत्या करने से पहले छात्र ने अपने मुंह में कपड़ा ठूंस लिया था और खुद को आग के हवाले करने के लिए शाम को ही स्कूटर में पेट्रोल भरवाकर ले आया था। छात्र ने अपनी मौत का इस तरह से प्लान तैयार किया था, जिससे उसे किसी भी तरह से बचाया न जा सके।
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सीपरी बाजार की चित्रकूट कॉलोनी में रहने वाले आरपीएफ फिरोजाबाद में तैनात दरोगा मनोज कुमार रजक के पुत्र मयूर रजक (26) की लाश बीती रात 3.05 बजे उसके घर के पास जली अवस्था में मिली। सीपरी बाजार थाने में तैनात सिपाही पंकज की उस पर नजर पड़ी। सिपाही ड्यूटी खत्म कर अपने घर जा रहा था।
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आत्मघाती कदम उठाने वाले छात्र के कमरे से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें उसने लिखा है कि उसकी मौत के सौ से भी ज्यादा कारण हो सकते हैं। वहीं, यूपीएससी की परीक्षा में लगातार असफल होने पर आत्महत्या करने वाले छात्र की मां घटना के वक्त सोच रही थी कि बेटा अपने कमरे में पढ़ रहा है, जबकि घर के बाहर गली में उसकी लाश जल रही थी।
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मुंह से चीख न निकले, इसके लिए आत्महत्या करने से पहले छात्र ने अपने मुंह में कपड़ा ठूंस लिया था और खुद को आग के हवाले करने के लिए शाम को ही स्कूटर में पेट्रोल भरवाकर ले आया था। छात्र ने अपनी मौत का इस तरह से प्लान तैयार किया था, जिससे उसे किसी भी तरह से बचाया न जा सके।
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सीपरी बाजार की चित्रकूट कॉलोनी में रहने वाले आरपीएफ फिरोजाबाद में तैनात दरोगा मनोज कुमार रजक के पुत्र मयूर रजक (26) की लाश बीती रात 3.05 बजे उसके घर के पास जली अवस्था में मिली। सीपरी बाजार थाने में तैनात सिपाही पंकज की उस पर नजर पड़ी। सिपाही ड्यूटी खत्म कर अपने घर जा रहा था।
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सिपाही की सूचना पर तत्काल प्रभारी निरीक्षक वेदप्रकाश पांडेय की अगुवाई में टीम मौके पर पहुंच गई। इसके बाद सीओ सिटी राजेश कुमार राय भी घटनास्थल पर आ गए। पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही मयूर की मौत हो चुकी थी और उसकी लाश जल रही थी।
के बाहर जल रही थी।
के बाहर जल रही थी।
पुलिस ने खटखटाया मयूर के घर का दरवाजा
इस पर फायर ब्रिगेड को भी बुला लिया गया, लेकिन दमकल दस्ते के आने से पहले ही पुलिस ने आग बुझा दी थी। पुलिस ने कॉलोनी में रहने वाले लोगों के दरवाजे खटखटाकर शव की शिनाख्त की कोशिश की, लेकिन जली हुई अवस्था में होने की वजह से कोई पहचान नहीं सका। इस दरम्यान पुलिस ने मयूर के घर का दरवाजा भी खटखटाया।
बाहर आई मां अनीता ने पुलिस को बताया कि घर में वह और उसका बेटा है। बेटा ऊपर वाले कमरे में पढ़ रहा है। मां ने आवाज लगाई तो ऊपर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। इस पर पुलिस ने ऊपर जाकर देखा तो मयूर अपने कमरे में नहीं था। फोन करने पर उसका मोबाइल घर की तीसरी मंजिल पर मिला।
इस पर पुलिस घर की चौथी मंजिल पर पहुंची। वहां एक जली हुई बाल्टी मिली, जिसमें से पेट्रोल की दुर्गंध आ रही थी। जबकि, घर के निचले हिस्से में खड़े स्कूटर की टंकी से पाइप निकला हुआ मिला, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वह स्कूटर में से पेट्रोल निकालकर बाल्टी में भरकर घर की चौथी मंजिल पर ले गया था।
घर के बाहर जल रही थी बेटे की लाश
इसके बाद उसने खुद को आग के हवाले किया और छत से छलांग लगा दी। मृतक के ताऊ सेवानिवृत्त अपर सांख्यिकी अधिकारी हरिकृष्ण रजक ने बताया कि मयूर शाम को ही स्कूटर में पेट्रोल भरवाकर लाया था। रोजाना की तरह खाना खाकर वह अपने कमरे में पढ़ने चला गया था। वह हमेशा देर रात तक पढ़ाई करता था। मां सोच रही थी कि बेटा पढ़ रहा है, जबकि बेटे की लाश घर के बाहर जल रही थी।
मनोचिकित्सक बोले-जिंदगी से बड़ी नहीं है परीक्षा और कोई परीक्षा अंतिम नहीं
चाहें प्रतियोगी परीक्षा हो या फिर बोर्ड परीक्षा। जब-जब इनका परीक्षा परिणाम आता है तो डिप्रेशन के मामलों में 15 फीसदी तक इजाफा हो जाता है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि अगर कोई परीक्षार्थी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाए तो उसके परिजनों को आगे की तैयारी के लिए हौसला अफजाई करना चाहिए। अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि कोई भी परीक्षा जिंदगी से बड़ी नहीं है और कोई परीक्षा अंतिम नहीं है। फिर भी असामान्य व्यवहार जारी रहे तो तुरंत दिखाएं।
चाहें प्रतियोगी परीक्षा हो या फिर बोर्ड परीक्षा। जब-जब इनका परीक्षा परिणाम आता है तो डिप्रेशन के मामलों में 15 फीसदी तक इजाफा हो जाता है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि अगर कोई परीक्षार्थी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाए तो उसके परिजनों को आगे की तैयारी के लिए हौसला अफजाई करना चाहिए। अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि कोई भी परीक्षा जिंदगी से बड़ी नहीं है और कोई परीक्षा अंतिम नहीं है। फिर भी असामान्य व्यवहार जारी रहे तो तुरंत दिखाएं।
डिप्रेशन की चपेट में आने के बाद कई युवा आत्महत्या का भी प्रयास करते हैं। जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन का कहना है कि परीक्षा में असफल होने के बाद डिप्रेशन की चपेट में आने में किसी छात्र को कम से कम छह से सात दिन लगते हैं। ऐसे में सबसे जरूरी होता है कि परिजन बच्चों पर नजर रखें। देखें कि अचानक से उसने खानपान कम तो नहीं कर दिया। स्वभाव तो नहीं बदल रहा। आत्महत्या का कदम कोई तब उठाता है, जब वह नाउम्मीद हो जाता है। उसके जीवन में आशा की किरण बाकी ही नहीं रह जाती। परिजन, दोस्तों को इस मुश्किल घड़ी में असफल हुए छात्र की जिंदगी में रोशनी की किरण जगाए रहना चाहिए। मनोचिकित्सक डॉ. अर्जित गौरव का कहना है कि परिजनों को अपने बच्चे की क्षमता पता होती है। अगर वह पढ़ने में मध्यम श्रेणी का है तो उस पर अपनी इच्छा न थोपें। असफल होने पर उलाहना न दें।
सहेली से कम रैंक आई तो डिप्रेशन की हुई शिकार
शहर की रहने वाले एक युवती एमबीबीएस की तैयारी कर रही थी। वह अपनी सहेली को भी नीट की तैयारी के लिए पढ़ाती थी। मगर सहेली की बेहतर रैंक आने से युवती डिप्रेशन में चली गई। उसका जिला अस्पताल में इलाज चला।
शहर की रहने वाले एक युवती एमबीबीएस की तैयारी कर रही थी। वह अपनी सहेली को भी नीट की तैयारी के लिए पढ़ाती थी। मगर सहेली की बेहतर रैंक आने से युवती डिप्रेशन में चली गई। उसका जिला अस्पताल में इलाज चला।
स्टेज पर रोने लगी टॉपर, बोली-मुझ पर टॉप करने का दबाव
हाल ही में एक स्कूल में कार्यक्रम के दौरान कक्षा नौ की टॉपर रोने लगी। बोली कि उस पर आगे भी क्लास में टॉप करने का दबाव है। उसे डर लगता है कि अगर टॉप नहीं कर पाई तो क्या होगा। मनोचिकित्सक ने छात्रा की काउंसलिंग की।
हाल ही में एक स्कूल में कार्यक्रम के दौरान कक्षा नौ की टॉपर रोने लगी। बोली कि उस पर आगे भी क्लास में टॉप करने का दबाव है। उसे डर लगता है कि अगर टॉप नहीं कर पाई तो क्या होगा। मनोचिकित्सक ने छात्रा की काउंसलिंग की।
इन बातों का रखें ध्यान
- कुछ दिनों में व्यवहार बदलना
- गुमसुम रहना, खुद को कमरे में कैद रखना
- सामान्य डाइट से खानपान कम कर देना
- अचानक से नींद में कमी आ जाना
- बच्चों को अकेला नहीं छोड़ें
- कुछ दिनों में व्यवहार बदलना
- गुमसुम रहना, खुद को कमरे में कैद रखना
- सामान्य डाइट से खानपान कम कर देना
- अचानक से नींद में कमी आ जाना
- बच्चों को अकेला नहीं छोड़ें