फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   UP Fake Doctor Exposed Abhinav Treated Thousands of Patients After Studying Medical Books Post Jail

UP: तीन साल और हजारों मरीज...अभिनव ने जेल से रिहा होने के बाद पढ़ी थी मेडिकल की किताबें; फर्जी डॉक्टर की कहानी

Sat, 13 Dec 2025 01:14 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर
अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 13 Dec 2025 01:14 PM IST
सार

ललितपुर में जीजा की डिग्री का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट पद पर पिछले तीन वर्षों से कार्य करने वाले आरोपी अभिनव सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां उसको सात दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

विज्ञापन
UP Fake Doctor Exposed Abhinav Treated Thousands of Patients After Studying Medical Books Post Jail
UP Fake Doctor - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ललितपुर मेडिकल कॉलेज के एनसीडी सेल में तैनात फर्जी चिकित्सक अभिनव सिंह ने तीन वर्ष तक खुद को विशेषज्ञ डॉक्टर बताकर हजारों मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वह प्रतिदिन 40-45 मरीजों का ओपीडी में उपचार करता रहा। इसी अवधि में प्रतिमाह 30-40 गंभीर हृदय रोगियों को गहन ह्रदय चिकित्सा इकाई (सीसीयू) में भर्ती भी किया गया।
विज्ञापन


एनएचएम के अंतर्गत कार्डियोलॉजी एवं जनरल मेडिसिन के पद पर नियुक्ति के बाद मरीजों को विशेषज्ञ इलाज की उम्मीद जगी थी। तीन वर्षों तक मरीज उसे विशेषज्ञ मानकर इलाज कराते रहे। कई गंभीर मरीजों को सीसीयू में भर्ती कर उपचार दिया गया। 
विज्ञापन


हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारी और अन्य चिकित्सक भी उसके फर्जी होने की पोल पकड़ नहीं सके। ऑनकॉल ड्यूटी के दौरान वह कई बार अनुपस्थित मिला, फिर भी किसी ने मामले की तह तक जाने की कोशिश नहीं की। इकलौता विशेषज्ञ समझे जाने के कारण वह कार्रवाई से भी बचता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

तीन साल में 1,100 मरीज किए भर्ती
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, ओपीडी में वह प्रतिदिन औसतन 40–45 मरीजों को देखता था, यानी लगभग एक माह में करीब 1,000 मरीजों का इलाज। प्रतिमाह लगभग 30 मरीज सीसीयू में भर्ती किए जाते थे, जिनमें से 12 मरीज रेफर किए जाते थे।

तीन वर्षों में कुल 36 हजार मरीजों को ओपीडी में उपचार दिया गया, जबकि 1,000–1,100 मरीज सीसीयू में भर्ती हुए। इनमें लगभग 450–480 मरीजों को रेफर करना पड़ा।

 

वीआईपी ड्यूटियों में भी शामिल
जनपद में आने वाले अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चिकित्सा टीम में शामिल होकर उसने वीआईपी ड्यूटी भी निभाई। गनीमत यह रही कि किसी वीआईपी को हृदय संबंधी आपात स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा, अन्यथा समय पर उचित उपचार न मिलने की स्थिति में गंभीर परिणाम सामने आ सकते थे।
 

यह दस्तावेज हुए बरामद
आरोपी अभिनव के पास से डीएमसी सर्टिफिकेट, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद से संबंधित प्रपत्र, राजीव गुप्ता के नाम पर जारी आधार कार्ड ई-आधार , मतदाता पहचान पत्र छाया प्रति की छायाप्रति और प्रैक्टिस से संबंधित प्रपत्र की छायाप्रति बरामद किए।
 

बोला- वह ही है असली डॉ राजीव गुप्ता, बड़े भाई थे अभिनव सिंह, हो चुकी मौत
आरोपी अभिनव सिंह ने मीडियाकर्मियों को बताया कि जमीन के विवाद में उसे फंसाया जा रहा है। वह असली डॉ राजीव गुप्ता है। उसके बहनोई का नाम भी डॉ राजीव गुप्ता है और जो अभिनव सिंह उसके बड़े भाई थे, जिनकी वर्ष 2022 में मौत हो चुकी है। हालांकि पुलिस इस मामले के हर एक पहलू से गहनता से जांच कर रही है।

 

डॉ. सोनाली बोलीं- जमीन का नहीं है विवाद
आरोपी की बहन सोनाली सिंह ने कहा कि इस प्रकरण में जमीन का कोई मामला नहीं है। मेरे पति डॉ राजीव गुप्ता की डिग्री का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट बनकर उपचार करने की जानकारी मिली तो मानवीय पहलू के नाते उन्होंने इसकी शिकायत की है। अभिनव का यह आरोप गलत है कि जमीन के विवाद में उसको फंसाया जा रहा है।

डॉ. राजीव गुप्ता के नाम पर है पिस्टल
एसपी मोहम्म्द मुश्ताक ने बताया कि संज्ञान में आया है कि आरोपी अभिनव सिंह अपने बहनोई डॉ राजीव गुप्ता के नाम से पिस्टल खरीदी है। इसकी जांच कराई जा रही है कि किसके नाम पर पिस्टल का लाइसेंस जारी किया गया है।
 

जेल से रिहा होने के बाद पढ़ी थी मेडिकल की किताबें
अभिनव ने बताया कि जुलाई 2020 में जेल से छूटकर घर वापस आया था। इसी दौरान एनएचएम के तहत राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती की प्रक्रिया प्रचलित हुई। जिसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन के अंतर्गत संविदा पर नियुक्ति के लिए चयन प्रक्रिया में प्रतिभाग किया था। 

 

साक्षात्कार देने के लिए अभिनव ने मेडिकल की कई किताबों का अध्ययन किया था और छद्म रूप से इस प्रक्रिया में अपनी बहन के पति डॉ. राजीव गुप्ता के प्रपत्रों तथा अपनी फोटो व पहचान पत्रों का उपयोग किया था। इस प्रक्रिया में उसका चयन सीसीयू यूनिट जिला अस्पताल के लिए स्पेशलिस्ट के पद पर हो गया था। तब से लगातार अस्पताल में डॉक्टर राजीव गुप्ता एमडी मेडिसिन हृदय रोग विशेषज्ञ का फर्जी बोर्ड लगाकर मरीजों का इलाज कर रहा था।

भ्रष्टाचार में हुई थी 16 माह की सजा
आरोपी अभिनव सिंह ने पुलिस को बताया कि कस्टम विभाग में नौकरी करने के दौरान 1999 में उसके खिलाफ करप्शन एक्ट में मुकदमा दर्ज हुा था। इससे बाद वह छिपते-छिपाते रह रहा था। इसी बीच अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की डिग्री का इस्तेमाल कर मथुरा के एक मेडिकल कॉलेज में कार्य किया। 

 

2019 मे सीबीआई की टीम ने कस्टम विभाग के प्रकरण में मथुरा से पकड लिया था, जहां से उसे जेल भेजा गया था। न्यायालय ने इस मामले में 16 महीने की सजा सुनाई थी और जुर्माने के रूप में आठ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया था। जुलाई 2020 में वह जेल से छूटा था।
 

फर्जी चिकित्सक प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग
मेडिकल कॉलेज में फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट बनकर तीन साल तक नौकरी करने वाले आरोपी अभिनव सिंह के मामले में सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई है। अधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली को ज्ञापन भेजकर कहा बिना किसी डिग्री और अनुभव के आरोपी ने सीसीयू में गंभीर मरीजों का इलाज किया, जो मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

 

उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर उन्हें निलंबित करने की मांग की है। साथ ही फर्जी चिकित्सक द्वारा इलाज किए गए मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री की समीक्षा और पीड़ितों को क्षतिपूर्ति दिए जाने की बात भी कही।

आप ने की सभी डॉक्टरों की डिग्री जांचने की मांग
आम आदमी पार्टी (आप) ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर जिले के सभी चिकित्सकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने और बारकोड आधारित सत्यापन प्रणाली लागू करने की मांग की है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed