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झांसी: ट्रेन दौड़ाए बगैर ही दो दर्जन ड्राइवरों की गुजर गई आधी नौकरी
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झांसी। लोको पायलटों की ड्यूटी ट्रेन चलाने की होती है लेकिन दो दर्जन लोको पायलट ऐसे सामने आए जिन्होंने आधी नौकरी बीत जाने के बाद भी कभी ट्रैक पर ट्रेन नहीं चलाई। इनमें भी अधिकांश लोको पायलट ने सांठगांठ करके अपनी ड्यूटी शंटिंग में लगवा रखी है। यह खेल पिछले कई वर्षों से चल रहा था लेकिन, कुछ दिनों पहले रेल अफसरों की पड़ताल में यह मामला खुल गया। शंटिंग यार्ड में जरूरत से कई गुना अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगी हुई थी।
झांसी लॉबी में शंटिंग के लिए लोको पायलट के 96 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष यहां 95 रनिंग कर्मचारी पदस्थ हैं। पिछले दिनों झांसी आए उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक नवीन कुमार ने लॉबी का निरीक्षण किया था। इस दौरान 95 लोको पायलट में से 70 प्रतिशत की रिपोर्ट में रेस्ट दर्शाया जाना सामने आया था। बावजूद, शंटिंग का काम बगैर किसी व्यवधान के संचालित होते पाया गया। ऐसे में वरिष्ठ उप महाप्रबंधक ने माना कि झांसी मंडल में शंटिंग कार्य के लिए आवश्यकता से कहीं अधिक पद स्वीकृत कराए गए हैं। जिन लोको पायलट को ट्रैक पर नहीं जाना होता था, वह सांठगांठ करके अपनी ड्यूटी यहां लगवा लेते थे। अब इसकी समीक्षा शुरू कर दी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि कई लोको पायलट को शंटिंग ड्यूटी से हटाकर वापस लाइन पर भेजा जा सकता है। बता दें कि लाइन पर जाने से बचने के लिए कई लोको पायलट सांठगांठ कर अपनी ड्यूटी शंटिंग में लगवा लेते हैं। कई तो सालों से शंटिंग ड्यूटी में जमे हुए हैं। लेकिन, अब उन्हें लाइन पर गाड़ी दौड़ानी पड़ सकती है। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि वरिष्ठ उप महाप्रबंधक के निर्देशों के बाद शंटिंग में कार्यरत रनिंग स्टाफ की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
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झांसी लॉबी में शंटिंग के लिए लोको पायलट के 96 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष यहां 95 रनिंग कर्मचारी पदस्थ हैं। पिछले दिनों झांसी आए उत्तर मध्य रेलवे के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक नवीन कुमार ने लॉबी का निरीक्षण किया था। इस दौरान 95 लोको पायलट में से 70 प्रतिशत की रिपोर्ट में रेस्ट दर्शाया जाना सामने आया था। बावजूद, शंटिंग का काम बगैर किसी व्यवधान के संचालित होते पाया गया। ऐसे में वरिष्ठ उप महाप्रबंधक ने माना कि झांसी मंडल में शंटिंग कार्य के लिए आवश्यकता से कहीं अधिक पद स्वीकृत कराए गए हैं। जिन लोको पायलट को ट्रैक पर नहीं जाना होता था, वह सांठगांठ करके अपनी ड्यूटी यहां लगवा लेते थे। अब इसकी समीक्षा शुरू कर दी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि कई लोको पायलट को शंटिंग ड्यूटी से हटाकर वापस लाइन पर भेजा जा सकता है। बता दें कि लाइन पर जाने से बचने के लिए कई लोको पायलट सांठगांठ कर अपनी ड्यूटी शंटिंग में लगवा लेते हैं। कई तो सालों से शंटिंग ड्यूटी में जमे हुए हैं। लेकिन, अब उन्हें लाइन पर गाड़ी दौड़ानी पड़ सकती है। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि वरिष्ठ उप महाप्रबंधक के निर्देशों के बाद शंटिंग में कार्यरत रनिंग स्टाफ की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
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