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Jhansi News: लक्ष्मीताल एसटीपी संचालन को लेकर दो महकमों में छिड़ी रार
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। लक्ष्मीताल स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन को लेकर नगर निगम एवं जल निगम आमने-सामने आ गए हैं। जल निगम निर्माण अवधि पूरा होने की वजह से आगे संचालन को राजी नहीं हो रहा वहीं निगम प्रशासन ने तकनीकी कर्मियों की कमी के बहाने इसके संचालन से हाथ खड़े कर दिए। आने वाले समय में एसटीपी संचालन के ठप पड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
महानगर से आने वाले नालों को लक्ष्मीताल में मिलने से रोकने के लिए जल निगम ने एसटीपी बनाया है। जल निगम वर्ष 2022 से इसका संचालन कर रहा है। इसकी मदद से करीब 50 लाख लीटर पानी साफ करके लक्ष्मीताल में छोड़ा जाता है। यह प्लांट अगले 15 साल के लिए तैयार किया गया है। प्लांट संचालन के लिए नगर निगम सालाना करीब दो करोड़ रुपये जल निगम को देता है जबकि बिजली बिल के लिए अलग से दो करोड़ चुकाता है लेकिन जल निगम का कहना है कि प्लांट संचालन पर खर्च अधिक हो रहा है। ऐसे में वह आगे इसका संचालन नहीं कर सकेगा।
अधिशासी अभियंता मुकेश पाल सिंह ने नगर आयुक्त को अनुरोध पत्र भेजकर नगर निगम कर्मियों से प्लांट संचालित कराने की बात कही। उनका कहना है कि निर्माण के एक साल बाद तक ही संचालन की जिम्मेदारी होती है। वह अवधि भी खत्म हो चुकी है। अब जल निगम आगे प्लांट नहीं चलाएगा। वहीं, निगम प्रशासन ने अभी इसे अपने हाथ में लेने से इन्कार कर दिया। अपर नगर आयुक्त राहुल यादव का कहना है कि निगम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। ऐसे में इसका समुचित संचालन नहीं हो सकता। दोनों ही विभाग इसके संचालन से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।
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झांसी। लक्ष्मीताल स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन को लेकर नगर निगम एवं जल निगम आमने-सामने आ गए हैं। जल निगम निर्माण अवधि पूरा होने की वजह से आगे संचालन को राजी नहीं हो रहा वहीं निगम प्रशासन ने तकनीकी कर्मियों की कमी के बहाने इसके संचालन से हाथ खड़े कर दिए। आने वाले समय में एसटीपी संचालन के ठप पड़ने की आशंका पैदा हो गई है।
महानगर से आने वाले नालों को लक्ष्मीताल में मिलने से रोकने के लिए जल निगम ने एसटीपी बनाया है। जल निगम वर्ष 2022 से इसका संचालन कर रहा है। इसकी मदद से करीब 50 लाख लीटर पानी साफ करके लक्ष्मीताल में छोड़ा जाता है। यह प्लांट अगले 15 साल के लिए तैयार किया गया है। प्लांट संचालन के लिए नगर निगम सालाना करीब दो करोड़ रुपये जल निगम को देता है जबकि बिजली बिल के लिए अलग से दो करोड़ चुकाता है लेकिन जल निगम का कहना है कि प्लांट संचालन पर खर्च अधिक हो रहा है। ऐसे में वह आगे इसका संचालन नहीं कर सकेगा।
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अधिशासी अभियंता मुकेश पाल सिंह ने नगर आयुक्त को अनुरोध पत्र भेजकर नगर निगम कर्मियों से प्लांट संचालित कराने की बात कही। उनका कहना है कि निर्माण के एक साल बाद तक ही संचालन की जिम्मेदारी होती है। वह अवधि भी खत्म हो चुकी है। अब जल निगम आगे प्लांट नहीं चलाएगा। वहीं, निगम प्रशासन ने अभी इसे अपने हाथ में लेने से इन्कार कर दिया। अपर नगर आयुक्त राहुल यादव का कहना है कि निगम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। ऐसे में इसका समुचित संचालन नहीं हो सकता। दोनों ही विभाग इसके संचालन से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं।
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