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मूंगफली में कालरराट रोग से बचाव का प्रशिक्षण दिया
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झांसी। कृषि विज्ञान केंद्र झांसी और एनसीआईपीएम नईदिल्ली द्वारा जिले में मूंगफली में लगने वाले कालरराट रोग के प्रबंधन के लिए ग्राउंडनट मिशन चलाया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत डा आदेश कुमार ने 20 गांवों का भ्रमण किया और करीब पांच सौ किसानों को रोग से बचाव का प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने बताया कि कालरराट मूंगफली का मुख्य रोग है, जो जिले में 15 से 20 प्रतिशत तक हानि पहुंचाता है। यह हानि आगे ना बढ़े, इसलिए ग्राउंडनट मिशन चलाया जा रहा है। मिशन का मुख्य उद्देश्य किसानों को रोग के लक्षण एवं प्रबंधन के बारे में बताना तथा प्रयोग द्वारा फफूंदी नाशक से बीज उपचार तथा ट्राइकोडर्मा से भूमि शोधन कैसे करें, यह बताना है। यह रोग बीज और भूमि से उत्पन्न होता है। इसमें फफूंदीनाशक से बीज उपचार मुख्य रोल अदा करता है। खेत की मिट्टी को ट्राइकोडर्मा से शोधित करें और खेतों के अंदर गोबर की खाद डालें। इससे जमीन में सूक्ष्म लाभदायक जीवों की जनसंख्या बढ़ जाती है, जो हानिकारक जीवों को कम कर देते हैं।
मिशन के अंतर्गत ग्राम बिरगुआं, लकारा, गांधीनगर, बावलटांडा, बिलाटीकरके, पसोरा, विक्रमपुरा, घुराट, मगरवारा, चौकरी, बड़ावली, कगर, कचने्व, पाड़री, मवई आदि शामिल हैं। प्रधान वैज्ञानिक एनसीआईपीएम नई दिल्ली के डा. मुकेश सहगल ने किसानों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया।
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उन्होंने बताया कि कालरराट मूंगफली का मुख्य रोग है, जो जिले में 15 से 20 प्रतिशत तक हानि पहुंचाता है। यह हानि आगे ना बढ़े, इसलिए ग्राउंडनट मिशन चलाया जा रहा है। मिशन का मुख्य उद्देश्य किसानों को रोग के लक्षण एवं प्रबंधन के बारे में बताना तथा प्रयोग द्वारा फफूंदी नाशक से बीज उपचार तथा ट्राइकोडर्मा से भूमि शोधन कैसे करें, यह बताना है। यह रोग बीज और भूमि से उत्पन्न होता है। इसमें फफूंदीनाशक से बीज उपचार मुख्य रोल अदा करता है। खेत की मिट्टी को ट्राइकोडर्मा से शोधित करें और खेतों के अंदर गोबर की खाद डालें। इससे जमीन में सूक्ष्म लाभदायक जीवों की जनसंख्या बढ़ जाती है, जो हानिकारक जीवों को कम कर देते हैं।
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मिशन के अंतर्गत ग्राम बिरगुआं, लकारा, गांधीनगर, बावलटांडा, बिलाटीकरके, पसोरा, विक्रमपुरा, घुराट, मगरवारा, चौकरी, बड़ावली, कगर, कचने्व, पाड़री, मवई आदि शामिल हैं। प्रधान वैज्ञानिक एनसीआईपीएम नई दिल्ली के डा. मुकेश सहगल ने किसानों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया।
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