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130 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगीं ट्रेनें
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झांसी। रेलवे लगातार ट्रेनों की रफ्तार लगाने के लिए काम कर रहा है। ट्रेनों की लेटलतीफी और हादसों की गुंजाइश को दूर करने के लिए ट्रैक पर डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाया जाएगा। इसके जरिए ट्रेनें 13 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेंगीं। वहीं तीसरी लाइन को भी इलेक्ट्रॉनिक इंटरलाकिंग से लैस किया जा रहा है।
झांसी मंडल से मौजूदा दौर में करीब 60 ट्रेनें गुजर रही हैं। इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार अभी 100 किमी प्रतिघंटा तक सीमित रहती है। उधर, रेलवे ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी प्रतिघंटा करने तक के लिए प्रयास कर रहा है। इसे धीरे-धीरे लागू किया रहा है। अब तक ट्रैक पर डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाकर ट्रेनों की गति बढ़ाई जाएगी। अभी तक एक सिग्नल होने से ड्राइवर स्पीड को नियंत्रित करके चलाते हैं। इसके चलते ज्यादातर ट्रेनें अपनी पूरी गति से नहीं चल पाती हैं। दो होम सिग्नल होने से ड्राइवर पहले से ही सतर्क रहेंगे।
इन दो सिग्नलों में पहला सिग्नल आगे की ट्रैक की स्थिति को बताएगा। साथ ही दूसरा सिग्नल स्टेशन की स्थिति की जानकारी देगा। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक सिग्नल में केवल लाल और पीली लाइट होगी। जिसके जरिए लोको पायलट गाड़ी की रफ्तार को नियंत्रित करेंगे। इससे ट्रेनों के आउटर पर खड़े होने की समस्या नहीं होगी। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ट्रैक को उच्चीकृत करने का काम चल रहा है। डबल डिस्टेंट सिग्नल प्रणाली से गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी। इसे लेकर प्रक्रिया चल रही है।
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झांसी मंडल से मौजूदा दौर में करीब 60 ट्रेनें गुजर रही हैं। इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार अभी 100 किमी प्रतिघंटा तक सीमित रहती है। उधर, रेलवे ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी प्रतिघंटा करने तक के लिए प्रयास कर रहा है। इसे धीरे-धीरे लागू किया रहा है। अब तक ट्रैक पर डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाकर ट्रेनों की गति बढ़ाई जाएगी। अभी तक एक सिग्नल होने से ड्राइवर स्पीड को नियंत्रित करके चलाते हैं। इसके चलते ज्यादातर ट्रेनें अपनी पूरी गति से नहीं चल पाती हैं। दो होम सिग्नल होने से ड्राइवर पहले से ही सतर्क रहेंगे।
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इन दो सिग्नलों में पहला सिग्नल आगे की ट्रैक की स्थिति को बताएगा। साथ ही दूसरा सिग्नल स्टेशन की स्थिति की जानकारी देगा। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक सिग्नल में केवल लाल और पीली लाइट होगी। जिसके जरिए लोको पायलट गाड़ी की रफ्तार को नियंत्रित करेंगे। इससे ट्रेनों के आउटर पर खड़े होने की समस्या नहीं होगी। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ट्रैक को उच्चीकृत करने का काम चल रहा है। डबल डिस्टेंट सिग्नल प्रणाली से गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी। इसे लेकर प्रक्रिया चल रही है।
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