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रीति-रिवाजों की रंगोली, प्रेम की होली सबकी हमजोली
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झांसी। होली पर रंग-अबीर-गुलाल की मस्ती और अलग-अलग समाजों की परंपराएं होली के त्योहार को और भी खास बनाती हैं। होलिका दहन से लेकर परेवा के दिन तक हर समाज अपने रीति-रिवाजों के अनुसार होली मनाएगा लेकिन मतलब सभी का एक है, सभी कह रहे कि त्योहार प्रेम से और मिलजुल कर मनाएं। रंगों को जीवन की रंगोली बनाकर होली के रंग में रंग जाइए।
होली की परंपराओं को देखें तो महाराष्ट्रीयन समाज में होली जलाते हुए होली के गीत और ढोल बजाना शुभ माना गया है। वहीं, सिंधी समाज में होली की आंच पर आटे व गुड़ से बनी रोटी (रोट) पर धागा लपेटकर इसे कंडे पर सेंका जाता है। इसमें धागा नहीं जलता है। माहेश्वरी समाज की पल्लवी बताती हैं कि होली रंगों का त्योहार है, हर समाज अपनी परंपरा के अनुसार त्योहार मनाता है लेकिन मतलब सबका एक ही है कि खुशियों और रंगों से भरे इस त्योहार में खुद को रंगों में सराबोर कर दीजिए। झोकन बाग की वैशाली बताती हैं कि होली नफरत को मिटाने और प्रेम से अपनों को गले लगाने का त्योहार है।
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घर पर बेसन की बर्फी बनाना शुभ
माहेश्वरी समाज की उर्मिला माहेश्वरी बताती हैं कि होली के दिन घर के सभी लोग सामूहिक होली पूजा करते हैं। इसमें लकड़ी, रोली, चावल, गुड़ और गेहूं की बाली अग्नि में डालकर प्रभु से मंगल कामना करते हैं। अगले दिन घर में ही बेसन की बर्फी तैयार करते हैं और भगवान को बर्फी का ही भोग लगाते हैं, भगवान को रंग-गुलाल चढ़ाते हैं। बड़ों के पैर छूकर गुझिया, पपड़ी पापड़ और तमाम पकवान बनाते हैं और होली खेलते हैं।
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सुबह सबसे पहले मंदिर जाते हैं
जैन समाज की पुष्पलता जैन बताती हैं कि जैन समाज में होली जलाने की कोई परंपरा नहीं है लेकिन होली के दिन रंग-अबीर खेलते हैं। होली के दिन सुबह मंदिर जाते हैं, भगवान को चावल, लौंग, बादाम, किशमिश, इलायची और केसर का चंदन चढ़ाते हैं। घर में बहू-बेटियों के साथ पकवान बनाते हैं और बड़ों का आशीष लेकर रंग खेलते हैं। शाम को मेहमानों को पकवान खिलाते हैं।
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मंदिर में फूलों की होली खेली जाती है
अग्रवाल समाज की संध्या अग्रवाल बताती हैं कि होली के दिन घर के सभी लोग होली वेदी की पूजा करने जाते हैं। गुझिया-पपड़ी बनाकर चढ़ाते हैं। घर में बेसन के लड्डू बनाते हैं और प्रसाद बांटते हैं। होली के बाद समाज के सभी लोग मिलकर मंदिर में फूलों की होली खेलने जाते हैं। समाज गायन और भगवान के भजन गाते हैं। एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशियां मनाते हैं।
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महाराज गंगाधर राव की समाधि पर जाते हैं
मराठी समाज के गजानन खानवलकर बताते हैं कि मराठी समाज के लिए होली का त्योहार महत्वपूर्ण है। होली पर श्रीखंड (दही से बनने वाला मीठा व्यंजन) बनाने की परंपरा है। होली पर समाज के लोग महाराज गंगाधर राव की समाधि पर जाते हैं और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। घर में गुझिया और पकवान बनाकर मेहमानों को स्वागत करते हैं। गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हैं।
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होली की परंपराओं को देखें तो महाराष्ट्रीयन समाज में होली जलाते हुए होली के गीत और ढोल बजाना शुभ माना गया है। वहीं, सिंधी समाज में होली की आंच पर आटे व गुड़ से बनी रोटी (रोट) पर धागा लपेटकर इसे कंडे पर सेंका जाता है। इसमें धागा नहीं जलता है। माहेश्वरी समाज की पल्लवी बताती हैं कि होली रंगों का त्योहार है, हर समाज अपनी परंपरा के अनुसार त्योहार मनाता है लेकिन मतलब सबका एक ही है कि खुशियों और रंगों से भरे इस त्योहार में खुद को रंगों में सराबोर कर दीजिए। झोकन बाग की वैशाली बताती हैं कि होली नफरत को मिटाने और प्रेम से अपनों को गले लगाने का त्योहार है।
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घर पर बेसन की बर्फी बनाना शुभ
माहेश्वरी समाज की उर्मिला माहेश्वरी बताती हैं कि होली के दिन घर के सभी लोग सामूहिक होली पूजा करते हैं। इसमें लकड़ी, रोली, चावल, गुड़ और गेहूं की बाली अग्नि में डालकर प्रभु से मंगल कामना करते हैं। अगले दिन घर में ही बेसन की बर्फी तैयार करते हैं और भगवान को बर्फी का ही भोग लगाते हैं, भगवान को रंग-गुलाल चढ़ाते हैं। बड़ों के पैर छूकर गुझिया, पपड़ी पापड़ और तमाम पकवान बनाते हैं और होली खेलते हैं।
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सुबह सबसे पहले मंदिर जाते हैं
जैन समाज की पुष्पलता जैन बताती हैं कि जैन समाज में होली जलाने की कोई परंपरा नहीं है लेकिन होली के दिन रंग-अबीर खेलते हैं। होली के दिन सुबह मंदिर जाते हैं, भगवान को चावल, लौंग, बादाम, किशमिश, इलायची और केसर का चंदन चढ़ाते हैं। घर में बहू-बेटियों के साथ पकवान बनाते हैं और बड़ों का आशीष लेकर रंग खेलते हैं। शाम को मेहमानों को पकवान खिलाते हैं।
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मंदिर में फूलों की होली खेली जाती है
अग्रवाल समाज की संध्या अग्रवाल बताती हैं कि होली के दिन घर के सभी लोग होली वेदी की पूजा करने जाते हैं। गुझिया-पपड़ी बनाकर चढ़ाते हैं। घर में बेसन के लड्डू बनाते हैं और प्रसाद बांटते हैं। होली के बाद समाज के सभी लोग मिलकर मंदिर में फूलों की होली खेलने जाते हैं। समाज गायन और भगवान के भजन गाते हैं। एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशियां मनाते हैं।
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महाराज गंगाधर राव की समाधि पर जाते हैं
मराठी समाज के गजानन खानवलकर बताते हैं कि मराठी समाज के लिए होली का त्योहार महत्वपूर्ण है। होली पर श्रीखंड (दही से बनने वाला मीठा व्यंजन) बनाने की परंपरा है। होली पर समाज के लोग महाराज गंगाधर राव की समाधि पर जाते हैं और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। घर में गुझिया और पकवान बनाकर मेहमानों को स्वागत करते हैं। गुलाल लगाकर शुभकामनाएं देते हैं।