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झांसी का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत करने के लिए करोड़ों मद में पड़े, अफसर खर्च न करें

Wed, 02 Mar 2022 01:20 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Mar 2022 01:20 AM IST
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To strengthen the health infrastructure of Jhansi, crores are lying in the head, officers should not spend
झांसी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये अलग-अलग मद में पड़े हुए हैं और अफसर इन्हें खर्च नहीं कर पा रहे हैं। इसमें से अधिकांश पैसा पिछले साल आवंटित बजट का भी है, जिसे इस बार खर्च करने का दावा स्वास्थ्य विभाग ने किया था। मगर हुआ कुछ भी नहीं।
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एनएचएम के तहत झांसी को इस बार भी बजट आवंटित किया गया। चूंकि, वर्ष 2020-21 के लिए स्वीकृत राशि में से अधिकांश पैसा झांसी खर्च नहीं कर पाया था और वर्ष 2021-22 में व्यय करने की विशेष अनुमति लेकर नए बजट में धनराशि जुड़वा ली गई थी। ऐसे में इस साल झांसी को 11.49 करोड़ मिले। मौजूदा हालातों में झांसी में 2.21 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं, जो कुल बजट का 19.28 प्रतिशत ही है। जबकि, 9.27 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग के पास अभी भी हैं और इस वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना चल रहा है। बताया गया कि इस पैसे से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी झांसी के स्वास्थ्य ढांचे को सुधार सकते थे लेकिन उन्होंने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। सिर्फ क्वालिटी एश्योरेंस में काम ठीक हुआ है। इसके लगभग सभी मदों में व्यय किया गया। इस कारण कई अस्पतालों को पुरस्कार भी मिले हुए हैं। जबकि, कुल कुल बजट खर्च करने में झांसी प्रदेश के टॉप 20 जिलों में भी नहीं है।
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एनीमिया दूर करने को मिले थे 4.27 लाख खर्च हुए 150 रुपये
झांसी। बाल स्वास्थ्य मद में बच्चों का एनीमिया दूर करने के लिए 4.27 लाख बजट मिला हुआ था, जिसमें से सिर्फ 150 रुपये खर्च किए गए हैं। कुपोषित बच्चों को एनआरसी सेंटर भेजने पर आशाओं को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके लिए 28800 रुपये मिले थे, जिसमें से 700 रुपये खर्च हुआ है। एनआरसी में भर्ती मां-बच्चे के खानपान के इंतजाम आदि के लिए 7.80 लाख बजट मिला था, इसमें से सिर्फ 11 फीसदी व्यय हुआ। न्यू बॉर्न सिक केयर यूनिट के लिए भी 20 लाख रुपये मिले थे, जिसमें से सिर्फ 5.88 लाख खर्च यानी 29 प्रतिशत पैसा खर्च किया गया। इस बजट को मशीनों की मरम्मत, नई मशीन खरीदना आदि पर खर्च किया जा सकता था। वही, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की स्थापना के लिए 6.77 करोड़ मिले थे। जहां पर लोगों को तमाम जांचों की सुविधा मिलती। एक पैसे का भी व्यय नहीं हुआ। होम बेस्ड न्यू बॉर्न केयर किट खरीदी जानी थी, इसके लिए 1.80 लाख मिले थे। शून्य व्यय हुआ है। इसमें बच्चों का वजन करने वाली मशीन, दवाओं की किट होती है, जो बीमार बच्चे के परिजनों को दी जाती है। कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर को टीम बेस्ड इंसेंटिव तक नहीं दिया गया है। जबकि, खाते में 15.58 लाख पड़े हैं।
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नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन (एनयूएचएम) पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। अर्बन स्वास्थ्य केंद्रों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए 6.50 लाख फंड आया, जिसका भी व्यय शून्य रहा। आरबीएसके की टीमें स्कूल जाकर बच्चों की जांच करती हैं। टीमों के लिए दवाओं की किट खरीदी जानी थी, वो भी नहीं खरीदी गई। जबकि, पांच हजार रुपये प्रति टीम बजट आया था।

एनएचएम के स्वीकृत कार्यक्रमों की वित्तीय प्रगति की मंडलायुक्त द्वारा लगातार समीक्षा कर व्यय के निर्देश दिए गए हैं। कुछ निर्माण कार्य व अन्य गतिविधियां ऐसी हैं, जिनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया में समय लगता है। कोविड के चलते भी कुछ विलंब हुआ है। शीघ्र ही व्यय कर लिया जाएगा। - आनंद चौबे, मंडलीय परियोजना प्रबंधक, एनएचएम।
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