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छुट्टा जानवरों के लिए तीन चारागाह बनेंगे, जगह तय
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jul 2017 12:58 AM IST
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- फोटो : demo
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छुट्टा जानवरों की समस्या से निजात के लिए तीन ब्लाकों में 30 हेक्टेयर जमीन पर तीन चारागाह तैयार होंगे। इसके लिए जमीन तय हो गई है। जमीन समतल करने का काम भी शुरू हो गया है।
बुंदेलखंड में छुट्टा जानवर फसल को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए तय किया गया है कि ग्राम पंचायतों की जमीन पर चारागाह बनाए जाएंगे, ताकि छुट्टा जानवरों को चारागाह में भरपेट भोजन मिल सके और वह इधर - उधर फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। इसके लिए बबीना, बड़ागांव और बंगरा ब्लाक का पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयन कर ब्लाक के एक- एक गांव में चारागाह बनाने का निर्णय लिया गया।
इसमें बड़ागांव ब्लाक के बचावली खुर्द गांव में 4.50 हेक्टेयर जमीन, बबीना ब्लाक के पलींदा गांव की 08 हेक्टेयर जमीन और बंगरा ब्लाक के पठाकरका गांव की 17.500 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। अब चिह्नित जमीन के समतलीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद चारों तरफ सुरक्षा खाई खोदी जाएगी और इसमें पानी भरा जाएगा। घास रोपी जाएगी। पौधरोपण भी किया जाएगा। जानवर पहुंचने के बाद चारागाह बाहर से बंद कर दिए जाएंगे, ताकि वे बाहर न निकल सकें। अंदर उनके लिए चारे और पानी का इंतजाम रहेगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि समतलीकरण के बाद सुरक्षा खाई खोदी जाएगी, ताकि जानवर इधर से उधर न जा सकें और फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें।
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छुट्टा जानवरों की समस्या से निजात के लिए तीन ब्लाकों में 30 हेक्टेयर जमीन पर तीन चारागाह तैयार होंगे। इसके लिए जमीन तय हो गई है। जमीन समतल करने का काम भी शुरू हो गया है।
बुंदेलखंड में छुट्टा जानवर फसल को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए तय किया गया है कि ग्राम पंचायतों की जमीन पर चारागाह बनाए जाएंगे, ताकि छुट्टा जानवरों को चारागाह में भरपेट भोजन मिल सके और वह इधर - उधर फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें। इसके लिए बबीना, बड़ागांव और बंगरा ब्लाक का पायलट प्रोजेक्ट के तहत चयन कर ब्लाक के एक- एक गांव में चारागाह बनाने का निर्णय लिया गया।
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इसमें बड़ागांव ब्लाक के बचावली खुर्द गांव में 4.50 हेक्टेयर जमीन, बबीना ब्लाक के पलींदा गांव की 08 हेक्टेयर जमीन और बंगरा ब्लाक के पठाकरका गांव की 17.500 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। अब चिह्नित जमीन के समतलीकरण का कार्य किया जा रहा है। इसके बाद चारों तरफ सुरक्षा खाई खोदी जाएगी और इसमें पानी भरा जाएगा। घास रोपी जाएगी। पौधरोपण भी किया जाएगा। जानवर पहुंचने के बाद चारागाह बाहर से बंद कर दिए जाएंगे, ताकि वे बाहर न निकल सकें। अंदर उनके लिए चारे और पानी का इंतजाम रहेगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि समतलीकरण के बाद सुरक्षा खाई खोदी जाएगी, ताकि जानवर इधर से उधर न जा सकें और फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें।
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