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Jhansi News: झांसी और ललितपुर की 455 वक्फ की संपत्तियों पर खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में वक्फ नियमावली 2024 को प्राख्यापित किए जाने का अनुमोदन किया है। इस नियमावली के मुताबिक सन 1952 तक राजस्व रिकार्ड में दर्ज संपत्तियां ही वक्फ की होगी। इसके बाद दर्ज की गई संपत्तियां वक्फ बोर्ड की नहीं मानी जाएंगी। इस बदलाव के बाद झांसी और ललितपुर की 455 संपत्तियों पर खतरा मंडराने लगा है।
झांसी और ललितपुर की 618 संपत्तियां उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं। शिया वक्फ बोर्ड में सिर्फ तीन संपतियां ही दर्ज हैं। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के रिकार्ड के मुताबिक, झांसी में 222, ललितपुर में 31, टहरौली में 55, मोंठ में 119, गरौठा में 91, मऊरानीपुर में 98 संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें ईदगाह, मस्जिद, कब्रिस्तान और मजार हैं। झांसी और ललितपुर की 455 संपत्तियां 1952 के बाद दर्ज की गई हैं। वक्फ बोर्ड में दर्ज संपत्तियों में सबसे अधिक संख्या कब्रिस्तानों की हैं। वक्फ की संपत्तियों की निगरानी के लिए वक्फ बोर्ड की ओर से मुतवल्ली अथवा कमेटियों का गठन किया है। इसके साथ ही वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की आमदनी की सात फीसदी धनराशि वक्फ बोर्ड के खाते में भेजी जाती है।
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वहीं, बची हुई धनराशि को संपत्ति के रखरखाव पर ही खर्च किया जाता है लेकिन वक्फ नियमावली में बदलाव होते ही झांसी और ललितपुर में 455 संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का दावा समाप्त हो जाएगा। इसके चलते, झांसी और ललितपुर में महज 153 संपत्तियां ही वक्फ बोर्ड की बचेंगी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के उप निदेशक मोहम्मद तारिक ने बताया कि सरकार की ओर से कोई भी लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। सरकारी आदेश मिलते ही अमल किया जाएगा।
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हमारे पूर्वजों ने वक्फ की संपत्तियां दान की हैं। इन पर ही कब्रिस्तान, मस्जिदें और ईदगाह बने हुए हैं। इन पर किसी और का हक नहीं हो सकता है। गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति वक्फ की नहीं हो सकती हैं। - मुफ्ती साबिर अंसारी
वक्फ की संपत्तियां मुस्लिमों के पूर्वजों द्वारा खुद की जमीनों को दान की गई संपत्तियां हैं। जिस मकसद और जिन्हें दान की गई हैं, उनका असल मालिक वहीं है। इन संपत्तियों पर किसी और का अधिकार नहीं हो सकता है। - मुफ्ती इमरान नदवी
कब्रिस्तान, इबादतगाह, ईदगाह सहित अन्य खैर के कामों के लिए मुस्लिम पूर्वजों द्वारा दान की गई संपत्तियां ही वक्फ की संपत्तियां हैं। इन संपत्तियों का मालिकाना हक सिर्फ वक्फ बोर्ड के पास ही होना चाहिए। - मौलाना सैफुद्दीन कासमी
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हमारे पूर्वजों ने अपनी संपत्तियों को धार्मिक और परोपकारी कार्यों के लिए दान की थी। उन पर सरकार कैसे हक जता सकती है। इन संपत्तियों की सुरक्षित रखने के लिए सरकार कानून बनाए तो बेहतर होगा। - मुफ्ती आरिफ नदवी