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सख्ती: कागजों वाली कंपनियों की नकली दवा बेचने वालों पर होगा मुकदमा, शासन ने जारी किया आदेश
Wed, 17 Aug 2022 01:48 AM IST
झांसी ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Aug 2022 01:48 AM IST
सार
दवा में सिफेक्सिम की जितनी मात्रा लिखी हुई थी, वो नहीं मिली। झांसी में जिस दवा का सैंपल फेल हुआ, उस पर उत्तराखंड के रुड़की का पता लिखा हुआ था। जबकि, ललितपुर की दवा पर हिमाचल प्रदेश के सोलन का।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
झांसी में कागजों में कंपनियां चलाकर बाजार में नकली दवाएं खपाने के मामले में शासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इस प्रकरण में सीधे दवा विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दे दिए हैं। जल्द ही औषधि विभाग विक्रेताओं पर मुकदमा दर्ज कराएगा।
औषधि प्रशासन विभाग छापेमारी कर दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजता रहता है। कुछ महीनों पहले विभाग ने झांसी और ललितपुर से एंटीबायोटिक दवाओं के सैंपल लखनऊ प्रयोगशाला भेजे थे। दवा में सिफेक्सिम की जितनी मात्रा लिखी हुई थी, वो नहीं मिली। झांसी में जिस दवा का सैंपल फेल हुआ, उस पर उत्तराखंड के रुड़की का पता लिखा हुआ था। जबकि, ललितपुर की दवा पर हिमाचल प्रदेश के सोलन का।
तत्कालीन विवेचक उमेश भारती ने दोनों ही जिलों के औषधि निरीक्षक को पत्र लिखकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा। साथ ही जब वो मौके पर गए तो दोनों कंपनियों के पते पर खाली प्लॉट था। पूछताछ करने पर वहां के लोगों ने जानकारी दी कि यहां किसी कंपनी का कार्यालय कभी नहीं रहा। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस खबर का संज्ञान लेते शासन ने औषधि प्रशासन विभाग को दवा विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।
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जांच में फेल मिलने वाली जिन कंपनियों के कार्यालय पते पर नहीं मिले, उनकी बिक्री करने वाले दवा विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। अब जल्द ही दोनों दवा विक्रेताओं पर मुकदमा करा दिया जाएगा। - मुकेश पालीवाल, सहायक आयुक्त, खाद्य।
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औषधि प्रशासन विभाग छापेमारी कर दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजता रहता है। कुछ महीनों पहले विभाग ने झांसी और ललितपुर से एंटीबायोटिक दवाओं के सैंपल लखनऊ प्रयोगशाला भेजे थे। दवा में सिफेक्सिम की जितनी मात्रा लिखी हुई थी, वो नहीं मिली। झांसी में जिस दवा का सैंपल फेल हुआ, उस पर उत्तराखंड के रुड़की का पता लिखा हुआ था। जबकि, ललितपुर की दवा पर हिमाचल प्रदेश के सोलन का।
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तत्कालीन विवेचक उमेश भारती ने दोनों ही जिलों के औषधि निरीक्षक को पत्र लिखकर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा। साथ ही जब वो मौके पर गए तो दोनों कंपनियों के पते पर खाली प्लॉट था। पूछताछ करने पर वहां के लोगों ने जानकारी दी कि यहां किसी कंपनी का कार्यालय कभी नहीं रहा। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस खबर का संज्ञान लेते शासन ने औषधि प्रशासन विभाग को दवा विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं।
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जांच में फेल मिलने वाली जिन कंपनियों के कार्यालय पते पर नहीं मिले, उनकी बिक्री करने वाले दवा विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं। अब जल्द ही दोनों दवा विक्रेताओं पर मुकदमा करा दिया जाएगा। - मुकेश पालीवाल, सहायक आयुक्त, खाद्य।