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तेरह वर्षों में इस साल सबसे कम बारिश, सूखे की तरफ बढ़ रहा है झांसी
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झांसी। 13 वर्षों में इस साल जुलाई माह में सबसे कम बारिश हुई है। ऐसे में झांसी एक बार फिर सूखे की तरफ बढ़ता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि 15 जुलाई के बाद जिन्होंने खरीफ की फसलों की बुवाई की है, उनकी 20 फीसदी तक उपज घट सकती है। वहीं, 30 जुलाई तक बुवाई नहीं होने पर फसलों का उत्पादन 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।
बुंदेलखंड में इस बार मानसून रूठा हुआ है। यहां पर जुलाई में अच्छी बारिश होती है। इसी के आधार पर किसान फसलों की बुवाई करते हैं। इस बार के आंकड़ों को देखें तो जुलाई में अब तक महज 91.64 मिलीमीटर पानी गिर पाया है। जबकि, 15 जून से शुरू हुए मानसूनी सीजन में अब तक कुल 120.52 मिलीमीटर बरसात हुई है। मौसम विभाग के अधिकारी हाल फिलहाल अच्छी वर्षा को लेकर कम उम्मीद लगाए हैं। अच्छा पानी न गिरने से कई किसानों ने देर से तो कइयों ने अब तक फसलों की बुवाई तक नहीं की है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि खरीफ की बुवाई 20 जून से 15 जुलाई तक हो जानी चाहिए। सामान्यता ये तीन महीने की फसलें होती हैं। बुंदेलखंड में दलहन, तिलहन मुख्य फसल है। ऐसे में कम वर्षा के चलते इन फसलों की बुवाई इस बार समय से न होने पर रकबा घट जाएगा। जहां पानी के साधन हैं, वहां किसानों ने धान लगाना शुरू किया है। मगर आगे बारिश न हुई तो वहां सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। इससे फसलों को नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि 15 जुलाई के बाद बोई गई फसलों का उत्पादन 20 फीसदी और 30 जुलाई के बाद बुवाई करने पर 50 प्रतिशत तक उपज घट जाएगी। फिर रबी की फसल के लिए देर होगी। बुवाई के लिए नमी की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। एक अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इससे खर्च का बोझ किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस बार खरीफ की फसल अच्छी नहीं होने का अनुमान है।
कब कितनी हुई वर्षा
साल जुलाई में बारिश
2007 70.3
2008 204.94
2009 172.12
2010 252.3
2011 288.76
2012 328.24
2013 328.74
2014 154.29
2015 216.26
2016 269.66
2017 144.54
2018 290.62
2019 137.50
2020 127.68
2021 149.20
किसकी-कितनी हुई बुवाई
फसल लक्ष्य बुवाई प्रतिशत
बाजरा 8 1
धान 8488 2
मक्का 1476 9
ज्वार 2072 10
मोटा अनाज 48 12
उर्द 78587 12.5
मूंग 6320 15
अरहर 444 29
मूंगफली 28554 24
सोयाबीन 3138 40
तिल 117779 50
(नोट: लक्ष्य हेक्टेयर में।)
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बुंदेलखंड में इस बार मानसून रूठा हुआ है। यहां पर जुलाई में अच्छी बारिश होती है। इसी के आधार पर किसान फसलों की बुवाई करते हैं। इस बार के आंकड़ों को देखें तो जुलाई में अब तक महज 91.64 मिलीमीटर पानी गिर पाया है। जबकि, 15 जून से शुरू हुए मानसूनी सीजन में अब तक कुल 120.52 मिलीमीटर बरसात हुई है। मौसम विभाग के अधिकारी हाल फिलहाल अच्छी वर्षा को लेकर कम उम्मीद लगाए हैं। अच्छा पानी न गिरने से कई किसानों ने देर से तो कइयों ने अब तक फसलों की बुवाई तक नहीं की है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि खरीफ की बुवाई 20 जून से 15 जुलाई तक हो जानी चाहिए। सामान्यता ये तीन महीने की फसलें होती हैं। बुंदेलखंड में दलहन, तिलहन मुख्य फसल है। ऐसे में कम वर्षा के चलते इन फसलों की बुवाई इस बार समय से न होने पर रकबा घट जाएगा। जहां पानी के साधन हैं, वहां किसानों ने धान लगाना शुरू किया है। मगर आगे बारिश न हुई तो वहां सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। इससे फसलों को नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि 15 जुलाई के बाद बोई गई फसलों का उत्पादन 20 फीसदी और 30 जुलाई के बाद बुवाई करने पर 50 प्रतिशत तक उपज घट जाएगी। फिर रबी की फसल के लिए देर होगी। बुवाई के लिए नमी की व्यवस्था नहीं हो पाएगी। एक अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इससे खर्च का बोझ किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इस बार खरीफ की फसल अच्छी नहीं होने का अनुमान है।
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कब कितनी हुई वर्षा
साल जुलाई में बारिश
2007 70.3
2008 204.94
2009 172.12
2010 252.3
2011 288.76
2012 328.24
2013 328.74
2014 154.29
2015 216.26
2016 269.66
2017 144.54
2018 290.62
2019 137.50
2020 127.68
2021 149.20
किसकी-कितनी हुई बुवाई
फसल लक्ष्य बुवाई प्रतिशत
बाजरा 8 1
धान 8488 2
मक्का 1476 9
ज्वार 2072 10
मोटा अनाज 48 12
उर्द 78587 12.5
मूंग 6320 15
अरहर 444 29
मूंगफली 28554 24
सोयाबीन 3138 40
तिल 117779 50
(नोट: लक्ष्य हेक्टेयर में।)