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प्यासी धरती पर खूब लहलहा रही कर्ज की फसल

Sat, 12 Dec 2020 01:02 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Dec 2020 01:02 AM IST
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Thirsty field crop many produce
झांसी। पानी की कमी की वजह से झांसी और ललितपुर जिले के कई इलाकों में खेती का बुरा हाल बना हुआ है। लेकिन, प्यासी धरती पर कर्ज की फसल खूब लहलहा रही है। दोनों जिलों के तीन लाख सत्तासी हजार किसानों पर 28 अरब रुपये का कर्ज है। समय से अदायगी न कर पाने की वजह से कर्जदार किसानों पर ब्याज का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
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झांसी और ललितपुर के कई इलाकों में पानी का भीषण संकट है। भूगर्भ जल जवाब दे चुका है और सिंचाई का अन्य कोई साधन नहीं है। इन इलाकों के किसान खेती के लिए पूरी तरह से बरसात के जल पर ही निर्भर हैं। लेकिन, मानसून की दगेबाजी की वजह से किसानों के सामने संकट खड़ा हो जाता है। अकसर असमय बारिश भी किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। ऐसे तमाम किसान बैंकों से लिए गए ऋण की समय से अदायगी नहीं कर पाते हैं। मजबूरी में वे कर्ज के दलदल में फंसे रहते हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि झांसी जिले के दो लाख सैंतीस हजार किसानों ने अलग-अलग बैंकों से सत्ताइस अरब इक्यासी करोड़ अस्सी लाख रुपये का कर्ज ले रखा है। जबकि, ललितपुर में डेढ़ लाख से अधिक किसान एक अरब सात करोड़ रुपये के कर्जदार हैं। समय से अदायगी न करने की वजह से किसानों पर ब्याज का बोझ भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
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समय से अदायगी न करने पर बढ़ जाता है ब्याज
झांसी। किसानों को साहूकारों के चंगुल से छुड़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 1998 में किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की थी। इसका मुख्य उद्देश्य था कि किसान अपनी कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी के आगे हाथ न फैलाएं तथा बैंक से रियायती ब्याज पर ऋण लेकर अपना काम चलाएं। लेकिन, आमतौर पर देखने में आता है कि किसान केसीसी से लिए कर्ज का उपयोग शादी - ब्याह आदि जैसे व्यक्तिगत कार्यों में कर लेते हैं। इसके बाद अगले सीजन में फसल खराब होने पर उनकी हालत खराब हो जाती है। समय से अदायगी न करने पर उन्हें बढ़ा हुआ ब्याज देना पड़ता है। लिया हुआ कर्ज एक साल के भीतर चुकाने पर किसानों को महज चार प्रतिशत ब्याज देना होता है। लेकिन, इस अवधि के बाद ऋण अदा करने पर सात प्रतिशत ब्याज लगता है।
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लिए गए कर्ज की समय से अदायगी करने पर किसानों को ब्याज में तीन प्रतिशत की छूट दी जाती है। उन्हें महज चार प्रतिशत ब्याज ही देना होता है। खाता अनियमित होने पर ब्याज बढ़ जाता है। क्रेडिट कार्ड किसानों की कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं, इससे उन्हें सस्ते ब्याज पर ऋण मिलता है। तय अवधि में कर्ज चुकाने वाले किसानों को इससे खासा लाभ होता है।
- अरुण कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक
अक्सर मौसम दगा दे जाता है। किसानों की उपज की लागत तक नहीं निकल पाती है। कर्ज पर ब्याज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। बुंदेलखंड के किसान परेशान हैं। कर्ज का बोझ कम करने के उपाय होने चाहिए। - शिवनारायण सिंह परिहार, किसान नेता
12 बीघा जमीन है। साल 2014 में किसान क्रेडिट कार्ड बनवाया था। तीन लाख पैंतीस हजार रुपये का कर्ज है। लेकिन, कर्ज चुकाने की हैसियत नहीं है, जिससे बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। - अब्दुल शफीक, भंडरा
मऊरानीपुर में बैंक से 2015 में क्रेडिट कार्ड बनवाया था। कुल नौ बीघा जमीन पर एक लाख चौंतीस हजार रुपये का कर्ज है। खेती नुकसान का सौदा हो चली है। ऐसे में कर्ज की अदायगी मुश्किल हो रही है। - आसाराम कुशवाहा, भदरवारा

बारह एकड़ जमीन पर पांच लाख रुपये का कर्ज है। नियमित अदायगी न होने की वजह से ये राशि लगातार बढ़ती जा रही है। पानी की कमी की वजह से खेती का भी हाल बेहाल है। - भगवानदास, ककरबई

तीन एकड़ जमीन बैंक मेें बंधक है। एक लाख रुपये का केसीसी का कर्ज है। पानी की कमी की वजह से इस साल भी जमीन खाली पड़ी हुई है। इन हालातों में कर्ज की अदायगी मुश्किल बनी हुई है। - मातादीन, मड़पुरा
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