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Jhansi News: हर जिले में होगी पंचायत, बिजली रथ भी निकलेगा
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- आरोप, इलेक्टि्रसिटी एक्ट-2023 को किया जा रहा दरकिनार
- समिति संयोजक बोले, निजीकरण से आ रही बड़े घोटाले की बू
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिस तरह से निजीकरण किया जा रहा है, उससे बड़े घोटाले की बू आ रही है। इलेक्टि्सिटी एक्ट-2003 को दरकिनार कर निजीकरण हो रहा है। एक जनवरी को कर्मचारी काला दिवस मनाएंगे। हर जिले में बिजली पंचायत होगी और बिजली रथ निकाला जाएगा।
बिजली पंचायत में हिस्सा लेने आए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति संयोजक शैलेंद्र दुबे ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इस निजीकरण से प्रदेश के 75 में से 42 जिले की बिजली निजी हाथों में चली जाएगी। इससे न सिर्फ किसान बल्कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वालों के सामने महंगी बिजली लेना मजबूरी होगी।
उन्होंने कहा कि प्रयागराज में बिजली पंचायत के बाद सभी जिलों में बिजली पंचायत होगी और बिजली रथ निकलेगा। इलेक्टि्रसिटी एक्ट-2003 के तहत यदि कोई परिसंपत्ति दी जाती है तो उसकी कीमत का मूल्यांकन जरूरी है। ऊर्जा मंत्री और पावर कारपोरेशन के चेयरमैन बिना मूल्यांकन के अरबों रुपये की परिसंपत्ति कौड़ियों के भाव निजी हाथों में देने पर आमादा है। पूर्व में ऊर्जा मंत्री के साथ हुए दो समझौता के अनुसार बिजली विभाग का निजीकरण नहीं हो सकता है। समझौते में वर्तमान बिजली व्यवस्था सुधारने का जिक्र है। इसके बावजूद, निजीकरण किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि आगरा में निजीकरण हुआ। इससे हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री को पूरी बात नहीं बताई जा रही है। मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में तय कर लिया गया है कि यदि एकतरफ टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई या निजीकरण प्रक्रिया तेज हुई तो पूरे देश में आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। आंदोलन की रूपरेखा क्या होगी, यह उसी समय पर बताई जाएगी।
एक-दो वर्ष में लाइन लॉस 15 फीसदी से नीचे लाने के लिए संकल्पबद्ध
दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में समिति के जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय व पीके दीक्षित ने कहा बिजली कर्मियों का मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास है। वर्ष 2016-17 में 41 प्रतिशत लाइन लॉस था, जो 2023-24 में 17 प्रतिशत रह गया हैं। बिजली कर्मी अगले एक-दो वर्ष में लाइन लॉस 15 फीसदी से नीचे लाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। अच्छा कार्य चल रहा है, जिससे प्रबंधन के निजीकरण की मंशा बिगड़ रही है। उन्होंने कहा पॉवर कारपोरेशन ने निजीकरण के मसौदे में पूरे वितरण निगम की भूमि मात्र एक रुपए प्रति वर्ष की लीज पर देने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार लाखों करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों बिना मूल्यांकन निजी घरानों को सौंपने की साजिश है। उन्होंने बताया पांच जनवरी को प्रयागराज में बिजली पंचायत होगी। पंचायत में दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।
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- समिति संयोजक बोले, निजीकरण से आ रही बड़े घोटाले की बू
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिस तरह से निजीकरण किया जा रहा है, उससे बड़े घोटाले की बू आ रही है। इलेक्टि्सिटी एक्ट-2003 को दरकिनार कर निजीकरण हो रहा है। एक जनवरी को कर्मचारी काला दिवस मनाएंगे। हर जिले में बिजली पंचायत होगी और बिजली रथ निकाला जाएगा।
बिजली पंचायत में हिस्सा लेने आए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति संयोजक शैलेंद्र दुबे ने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि इस निजीकरण से प्रदेश के 75 में से 42 जिले की बिजली निजी हाथों में चली जाएगी। इससे न सिर्फ किसान बल्कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वालों के सामने महंगी बिजली लेना मजबूरी होगी।
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उन्होंने कहा कि प्रयागराज में बिजली पंचायत के बाद सभी जिलों में बिजली पंचायत होगी और बिजली रथ निकलेगा। इलेक्टि्रसिटी एक्ट-2003 के तहत यदि कोई परिसंपत्ति दी जाती है तो उसकी कीमत का मूल्यांकन जरूरी है। ऊर्जा मंत्री और पावर कारपोरेशन के चेयरमैन बिना मूल्यांकन के अरबों रुपये की परिसंपत्ति कौड़ियों के भाव निजी हाथों में देने पर आमादा है। पूर्व में ऊर्जा मंत्री के साथ हुए दो समझौता के अनुसार बिजली विभाग का निजीकरण नहीं हो सकता है। समझौते में वर्तमान बिजली व्यवस्था सुधारने का जिक्र है। इसके बावजूद, निजीकरण किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि आगरा में निजीकरण हुआ। इससे हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। मुख्यमंत्री को पूरी बात नहीं बताई जा रही है। मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में तय कर लिया गया है कि यदि एकतरफ टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई या निजीकरण प्रक्रिया तेज हुई तो पूरे देश में आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। आंदोलन की रूपरेखा क्या होगी, यह उसी समय पर बताई जाएगी।
एक-दो वर्ष में लाइन लॉस 15 फीसदी से नीचे लाने के लिए संकल्पबद्ध
दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में समिति के जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय व पीके दीक्षित ने कहा बिजली कर्मियों का मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास है। वर्ष 2016-17 में 41 प्रतिशत लाइन लॉस था, जो 2023-24 में 17 प्रतिशत रह गया हैं। बिजली कर्मी अगले एक-दो वर्ष में लाइन लॉस 15 फीसदी से नीचे लाने के लिए संकल्पबद्ध हैं। अच्छा कार्य चल रहा है, जिससे प्रबंधन के निजीकरण की मंशा बिगड़ रही है। उन्होंने कहा पॉवर कारपोरेशन ने निजीकरण के मसौदे में पूरे वितरण निगम की भूमि मात्र एक रुपए प्रति वर्ष की लीज पर देने का प्रस्ताव है। इसी प्रकार लाखों करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों बिना मूल्यांकन निजी घरानों को सौंपने की साजिश है। उन्होंने बताया पांच जनवरी को प्रयागराज में बिजली पंचायत होगी। पंचायत में दीपक चक्रवर्ती, सरजू त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।