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मेडिकल कालेज में हुआ दवाओं का अकाल...कैसे हो बुंदेलखंड वालों का सस्ता इलाज
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झांसी। बुंदेलखंड वालों का सस्ता इलाज हो भी तो कैसे। झांसी मेडिकल कालेज में दवाओं का अकाल हो गया है। हालात यह हैं कि जो दवाएं मेडिकल कालेज में मुफ्त में मिल जाती थीं वह बाहर से पैसे लेकर खरीदनी पड़ रही हैं। दरअसल दवाओं का बजट न आने से यह संकट खड़ा हुआ है। वहीं, वेयर हाउस में भी कई दवाएं खत्म हो गई हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का सबसे ज्यादा टोटा बताया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में हर साल अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में बजट आ जाता था। मगर इस बार चुनाव की वजह से इसमें कुछ देरी हो गई है। वहीं, सरकारी अस्पतालों को 80 फीसदी दवाएं यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन से खरीदने के आदेश हैं। जबकि, 20 फीसदी ई-टेंडर के जरिए खरीद सकते हैं। इसके लिए झांसी की गेड़ा कॉलोनी में वेयर हाउस भी खुला हुआ है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा समय में वेयर हाउस में 295 प्रकार की आवश्यक दवाओं में 215 तरह की दवाएं उपलब्घ हैं। वहीं, जो दवाओं हैं, वो भी मांग के मुताबिक काफी कम मिल पा रही हैं। मेडिकल कॉलेज में एनएस की बोतल से लेकर कई एंटीबायोटिक दवाएं खत्म हो गई हैं। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को कई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
वेयर हाउस में ये दवाएं नहीं
मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि वेयर हाउस में एंटीबायोटिक दवाओं में एमोक्सीसिलिन और कारबोनिक एसिड, लाइनजोलिड इंजेक्शन, मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन नहीं है। जबकि, ब्रेन इंजरी में लगने वाला इंजेक्शन मनीटोल, बीपी की दवा रेमिप्रिल, त्वचा के लिए इट्राकोनोजोल से लेकर एनएस की बोतल तक नहीं है।
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कॉरपोरेशन से मांगी सवा करोड़ की दवाएं
प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने कहा कि यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से सवा करोड़ रुपये की दवाओं के ऑर्डर दे दिए हैं। एनएस की बोतल समेत एक लाख की दवाएं कोटेशन पर लेने के भी आदेश जारी किए हैं। चार-पांच दिनों में दवाओं की कमी दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि वेयर हाउस में एनएस की बोतल न होने पर ई-टेंडर से खरीदने को कहा था। मगर सप्लायर ने पुरानी दर पर देने से मना कर दिया। बाद में दो महीने के लिए देने पर सहमति बनी है।
अपने रिश्तेदार को दिखाने आया तो डॉक्टर ने पांच दवाएं लिखी थीं। मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर में एक भी नहीं मिलीं। मजबूरी में बाहर से खरीदने जा रहा हूं। - संजय जैन, पृथ्वीपुर।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मेरे समधी भर्ती हैं। कुछ दवाएं तो यहां मिल रही हैं लेकिन अधिकांश बाहर से खरीदनी पड़ रही है। जो कि काफी महंगी मिल रही है। - राजकुमार लोधी, करैरा।
वेयर हाउस में न मिलने वाली दवाओं को ई-टेंडर से खरीदा जा रहा है। एनएस की बोतल की खरीद का ऑर्डर दे दिया गया है। जल्द ही कुछ अन्य दवाओं की खरीद की जाएगी। शासन से बजट का आवंटन होने की सूचना मिली है। ऐसे में जल्द ही भरपूर दवाएं मरीजों को मिलने लगेंगी। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज में हर साल अप्रैल के पहले या दूसरे सप्ताह में बजट आ जाता था। मगर इस बार चुनाव की वजह से इसमें कुछ देरी हो गई है। वहीं, सरकारी अस्पतालों को 80 फीसदी दवाएं यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन से खरीदने के आदेश हैं। जबकि, 20 फीसदी ई-टेंडर के जरिए खरीद सकते हैं। इसके लिए झांसी की गेड़ा कॉलोनी में वेयर हाउस भी खुला हुआ है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा समय में वेयर हाउस में 295 प्रकार की आवश्यक दवाओं में 215 तरह की दवाएं उपलब्घ हैं। वहीं, जो दवाओं हैं, वो भी मांग के मुताबिक काफी कम मिल पा रही हैं। मेडिकल कॉलेज में एनएस की बोतल से लेकर कई एंटीबायोटिक दवाएं खत्म हो गई हैं। ऐसे में अस्पताल आने वाले मरीजों को कई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
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वेयर हाउस में ये दवाएं नहीं
मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि वेयर हाउस में एंटीबायोटिक दवाओं में एमोक्सीसिलिन और कारबोनिक एसिड, लाइनजोलिड इंजेक्शन, मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन नहीं है। जबकि, ब्रेन इंजरी में लगने वाला इंजेक्शन मनीटोल, बीपी की दवा रेमिप्रिल, त्वचा के लिए इट्राकोनोजोल से लेकर एनएस की बोतल तक नहीं है।
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कॉरपोरेशन से मांगी सवा करोड़ की दवाएं
प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने कहा कि यूपी मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से सवा करोड़ रुपये की दवाओं के ऑर्डर दे दिए हैं। एनएस की बोतल समेत एक लाख की दवाएं कोटेशन पर लेने के भी आदेश जारी किए हैं। चार-पांच दिनों में दवाओं की कमी दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि वेयर हाउस में एनएस की बोतल न होने पर ई-टेंडर से खरीदने को कहा था। मगर सप्लायर ने पुरानी दर पर देने से मना कर दिया। बाद में दो महीने के लिए देने पर सहमति बनी है।
अपने रिश्तेदार को दिखाने आया तो डॉक्टर ने पांच दवाएं लिखी थीं। मेडिकल कॉलेज के दवा काउंटर में एक भी नहीं मिलीं। मजबूरी में बाहर से खरीदने जा रहा हूं। - संजय जैन, पृथ्वीपुर।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में मेरे समधी भर्ती हैं। कुछ दवाएं तो यहां मिल रही हैं लेकिन अधिकांश बाहर से खरीदनी पड़ रही है। जो कि काफी महंगी मिल रही है। - राजकुमार लोधी, करैरा।
वेयर हाउस में न मिलने वाली दवाओं को ई-टेंडर से खरीदा जा रहा है। एनएस की बोतल की खरीद का ऑर्डर दे दिया गया है। जल्द ही कुछ अन्य दवाओं की खरीद की जाएगी। शासन से बजट का आवंटन होने की सूचना मिली है। ऐसे में जल्द ही भरपूर दवाएं मरीजों को मिलने लगेंगी। - डॉ. हरीशचंद्र आर्या, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज।