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दद्दा की धरती पर नहीं प्रतिभाओं की कमी : मोहम्मद रियाज
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान, ओलंपियन और अर्जुन अवॉर्डी मोहम्मद रियाज राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में मुख्य चयनकर्ता के रूप में शामिल हुए हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की धरती पर प्रतिभाओं की कमी नहीं है। सिर्फ उन्हें शुरुआत से ही निखारने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हॉकी के भगवान कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की नगरी से कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी जूनियर भारतीय टीम में खेल रहे हैं। जिनसे पूरे देश को काफी उम्मीदें हैं। हॉकी के जादूगर के जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है यह गर्व की बात है। कहा कि टीम की जीत में हर खिलाड़ी का योगदान होता है। स्कूल स्तर से ही खिलाड़ी के खेल को निखारा जाए तो वह जरूर ही एक दिन बड़ा खिलाड़ी बनता है। कहा की पहले जर्मनी, स्पेन और हॉलैंड जैसे देश अधिकांश टूर्नामेंटों के सेमीफाइनल में प्रवेश करती थीं। लेकिन काफी बदलाव हुआ है। कम रैंकिंग वाली टीमें अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और चैंपियनशिप जीत रही हैं। पूर्व भारतीय कप्तान रियाज 1996 और 2000 में ओलंपिक, 1994 में विश्व कप और 1998 तथा 1994 में एशियाई खेल में सिल्वर मेडल हासिल कर चुके हैं। इसके साथ ही 1998 में बैंकॉक में गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं। 2002 में बेल्जियम में और 2004 में जर्मनी में पेशेवर लीग में भी खेल चुके हैं। वर्तमान में नबोदित खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके पिता अंतरराष्ट्रीय मैच रेफरी होने के साथ ही उनका बेटा रेहान और बेटी शमीना रियाज भी जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप खेल रहे हैं।
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झांसी। भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान, ओलंपियन और अर्जुन अवॉर्डी मोहम्मद रियाज राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप में मुख्य चयनकर्ता के रूप में शामिल हुए हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की धरती पर प्रतिभाओं की कमी नहीं है। सिर्फ उन्हें शुरुआत से ही निखारने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि हॉकी के भगवान कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद की नगरी से कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी जूनियर भारतीय टीम में खेल रहे हैं। जिनसे पूरे देश को काफी उम्मीदें हैं। हॉकी के जादूगर के जन्मदिन को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में पूरे भारत में मनाया जाता है यह गर्व की बात है। कहा कि टीम की जीत में हर खिलाड़ी का योगदान होता है। स्कूल स्तर से ही खिलाड़ी के खेल को निखारा जाए तो वह जरूर ही एक दिन बड़ा खिलाड़ी बनता है। कहा की पहले जर्मनी, स्पेन और हॉलैंड जैसे देश अधिकांश टूर्नामेंटों के सेमीफाइनल में प्रवेश करती थीं। लेकिन काफी बदलाव हुआ है। कम रैंकिंग वाली टीमें अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और चैंपियनशिप जीत रही हैं। पूर्व भारतीय कप्तान रियाज 1996 और 2000 में ओलंपिक, 1994 में विश्व कप और 1998 तथा 1994 में एशियाई खेल में सिल्वर मेडल हासिल कर चुके हैं। इसके साथ ही 1998 में बैंकॉक में गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं। 2002 में बेल्जियम में और 2004 में जर्मनी में पेशेवर लीग में भी खेल चुके हैं। वर्तमान में नबोदित खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके पिता अंतरराष्ट्रीय मैच रेफरी होने के साथ ही उनका बेटा रेहान और बेटी शमीना रियाज भी जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप खेल रहे हैं।
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