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Jhansi News: छह माह से भू-गर्भ विभाग में पानी की लैब में नहीं रसायन, निराश लौट रहे किसान
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बीयू के भू-गर्भ विभाग में पानी की जांच करने वाली लैब में छह माह से केमिकल्स नहीं है, जिससे जांचें बंद हैं। आगामी चार-पांच तक लैब के शुरू होने की उम्मीद भी नजर नहीं आती है। इस वजह से पानी की जांच के लिए आने वाले किसान और जनसामान्य के लोग निराश होकर लौट रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि बीयू की लैब में ग्रामीण अपने कुआं, नलकूप आदि के पानी की जांच कराने के लिए आते हैं, जो नि:शुल्क होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर के पानी की जांच कराने के लिए आता है, तो उसे शुल्क देना होता है। पानी की सामान्य जांच का शुल्क 1400 रुपये हैं। यदि कोई विशेष जांच कराना चाहता है तो उसका अधिकतम शुल्क 3100 रुपये है। विगत छह माह से यह लैब पूरी तरह से बंद है। इसकी वजह केमिकल्स का पूरी तरह से खत्म होना है। इसके अलावा लैब संचालित करने वाला स्टॉफ भी नहीं है। दावा किया जा रहा है कि नए शिक्षा सत्र में केमिकल्स की व्यवस्था करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। बीयू प्रशासन को कैमिकल्स उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एसपी सिंह का कहना है कि छुट्टी की वजह से लैब नहीं चल रही है। इस वजह से किसान एवं लोगों के पानी की जांच नहीं हो रही है। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सिंह का कहना है कि लैब में केमिकल्स खत्म हो गए हैं, जिसकी वजह से करीब छह माह से लैब में काम नहीं हो रहा है। नए सत्र लैब शुरू करने के लिए केमिकल्स आदि की व्यवस्था की जा रही है। बीयू प्रशासन से केमिकल्स के लिए धनराशि की मांग की है।
झांसी। बीयू के भू-गर्भ विभाग में पानी की जांच करने वाली लैब में छह माह से केमिकल्स नहीं है, जिससे जांचें बंद हैं। आगामी चार-पांच तक लैब के शुरू होने की उम्मीद भी नजर नहीं आती है। इस वजह से पानी की जांच के लिए आने वाले किसान और जनसामान्य के लोग निराश होकर लौट रहे हैं।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि बीयू की लैब में ग्रामीण अपने कुआं, नलकूप आदि के पानी की जांच कराने के लिए आते हैं, जो नि:शुल्क होती है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर के पानी की जांच कराने के लिए आता है, तो उसे शुल्क देना होता है। पानी की सामान्य जांच का शुल्क 1400 रुपये हैं। यदि कोई विशेष जांच कराना चाहता है तो उसका अधिकतम शुल्क 3100 रुपये है। विगत छह माह से यह लैब पूरी तरह से बंद है। इसकी वजह केमिकल्स का पूरी तरह से खत्म होना है। इसके अलावा लैब संचालित करने वाला स्टॉफ भी नहीं है। दावा किया जा रहा है कि नए शिक्षा सत्र में केमिकल्स की व्यवस्था करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। बीयू प्रशासन को कैमिकल्स उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. एसपी सिंह का कहना है कि छुट्टी की वजह से लैब नहीं चल रही है। इस वजह से किसान एवं लोगों के पानी की जांच नहीं हो रही है। वहीं, विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सिंह का कहना है कि लैब में केमिकल्स खत्म हो गए हैं, जिसकी वजह से करीब छह माह से लैब में काम नहीं हो रहा है। नए सत्र लैब शुरू करने के लिए केमिकल्स आदि की व्यवस्था की जा रही है। बीयू प्रशासन से केमिकल्स के लिए धनराशि की मांग की है।
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