फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   There are difficulties, but our spirits are high...we will touch the sky

Jhansi News: मुश्किलें हैं, मगर हौसले बुलंद हैं... छुएंगे आसमान

Thu, 04 Apr 2024 01:31 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी Updated Thu, 04 Apr 2024 01:31 AM IST
विज्ञापन
There are difficulties, but our spirits are high...we will touch the sky
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


झांसी। उनकी जिंदगी में तमाम मुश्किलें हैं, आर्थिक तंगी है, लेकिन हौसला बुलंद है। वे हॉकी खेलकर अपने सपनों को परवाज देकर आसमान छूना चाहते हैं। परिवार के सपने पूरे करना चाहते हैं। इसलिए कड़ा अभ्यास कर अपने खेल को निखारने में जुटे हैं। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में चल रहे केंद्रीय प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न मंडलों से पहुंचे हॉकी खिलाड़ियों की कहानी उनके संघर्ष को बयां करने के साथ ही सफलता की नई इबारत लिख रही है।
मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के एस्ट्रोटर्फ पर इन दिनों केंद्रीय प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। इसमें भाग ले रहे 115 खिलाड़ी खेल छात्रावास में प्रवेश पाना चाहते हैं। इनमें कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिनकी आंखों में सुनहरे सपने और जिम्मेदारियों की बोझ है। किसी की मां सिलाई करती हैं तो किसी का भाई शहर में मजदूरी कर रहा है। उन्हें उम्मीद है कि एक दिन उनका बेटी या बेटा बेहतरीन खिलाड़ी बनकर अपने देश और उनका नाम रोशन करेगा। खिलाड़ी भी परिजनों की इसी आस को कामयाबी में बदलने का जज्बा रखकर कड़े अभ्यास में जुटे हैं।
विज्ञापन

-------------
मां की आंखों में खुशी देखना चाहती हैं नैंसी

वाराणसी से आईं नैंसी सिंह ओलंपिक खेलकर अपनी मां का सपना पूरा करना चाहती हैं। वे बताती हैं कि मेरे पिता फोटोग्राफर थे लेकिन बीमारी के कारण उनकी दो साल पहले मृत्यु हो गई। पिता की मौत के बाद मां एक प्राइवेट बैंक में चपरासी का काम करने लगीं। उन्होंने मुझे हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। आर्थिक तंगी के बाद भी उन्होंने मुझे खेलने से कभी मना नहीं किया। दो साल से हॉकी खेल रही हूं। राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर, अयोध्या, झांसी में खेल चुकी हैं। अब छात्रावास में प्रवेश लेकर अपने खेल को निखारकर ओलंपिक तक पहुंचना चाहती हूं।
विज्ञापन
विज्ञापन

---------
किसान का बेटा कर रहा दे दनादन गोल
कर्मपुर से आए राघवेंद्र सिंह चौहान चार साल से एस्ट्रोटर्फ पर दे दनादन गोल दाग रहे हैं। उनके पिता किसान हैं। राघवेंद्र बताते हैं कि गांव में बच्चों को हॉकी खेलते देखकर अपने खेत में प्रैक्टिस शुरू की। पिता को खेती से इतनी आमदनी नहीं होती कि हॉकी जैसे खेल का महंगा खर्च उठा सकें। रिश्तेदारों से मदद लेनी पड़ती है। अब तक रायबरेली, लखनऊ में राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में खेल चुका हूं। अब भारतीय हॉकी टीम में शामिल होने का सपना है।
------------


मजदूर भाई के लिए पाना है मेडल
देवीपाटन से आए प्रहलाद पांडेय अपने मजदूर भाई की आंखों में जीत की खुशी और हाथ में मेडल थमाना चाहते हैं। प्रहलाद बताते हैं कि मेरे पिता नहीं हैं। बड़े भाई गुजरात में मजदूरी करते हैं। मजदूरी से जो कुछ मिलता है, उससे मेरी मदद कर देते हैं। भाई का सपना मुझे हॉकी का बड़ा खिलाड़ी बनाना है। मैं भी उनके सपने को हकीकत में बदलने के लिए कड़े अभ्यास में जुटा हूं। गोरखपुर, बनारस और झांसी में राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता खेल चुका हूं। ओलंपिक में खेलना चाहता हूं।

------------
देश के लिए खेलना जागृति का सपना
वाराणसी की खिलाड़ी जागृति यादव देश के लिए खेलना चाहती हैं। वे बताती हैं कि मेरी मां कपड़ों की सिलाई करती हैं। मुझे हॉकी खिलाड़ी बनाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं। मेरे टीचर भी काफी सहयोग करते हैं। कभी पैसे नहीं होने पर वो मदद भी करते हैं। राज्य स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता में झांसी, गोरखपुर और नेशनल हॉकी प्रतियोगिता झांसी में खेल चुकी हूं। अब छात्रावास में प्रवेश लेकर देश के लिए खेलने का सपना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed