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Jhansi News: बुंदेली लोकगीतों के बीच हुआ टेसू-झिझिया का विवाह
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माेंठ। ग्राम बम्हरौली में एसडीएम कॉलोनी के पीछे सोमवार को बालिकाओं ने बुंदेली लोक परंपरा के अनुसार सुआटा और झिझिया से जुड़ी रस्में निभाईं। इस दौरान बुंदेली लोकगीत गाए गए। बैंड-बाजे और आतिशबाजी के बीच विवाह समारोह आयोजित किया गया।
बुंदेलखंड में सुआटा पूजन और टेसू-झिझिया की परंपरा लंबे समय से प्रचलित है। नवरात्र के दौरान बालिकाएं मिट्टी से सुआटा की आकृति बनाकर उसकी पूजा करती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। वहीं, टेसू और झिझिया से जुड़ी परंपरा में बच्चे घर-घर जाकर लोकगीत गाते हैं तथा लोगों से गेहूं, आटा और रुपये प्राप्त करते हैं। शरद पूर्णिमा के आसपास टेसू और झिझिया का विवाह कराने की परंपरा भी प्रचलित है।
ग्राम बम्हरौली में बालिकाओं ने घरों के बाहर और चौराहों पर मिट्टी की प्रतिमाएं बनाईं। सात दिन बाद मिट्टी की झिझिया में दीप जलाकर घर-घर जाकर बुंदेली गीत गाए और लोगों से अनाज व रुपये एकत्र किए। इसके बाद विवाह की रस्में निभाई गईं। रात्रि में मोहल्ले के लोगों के सहयोग से मिट्टी की प्रतिमाओं का सामूहिक विसर्जन किया गया। इस आयोजन में अपूर्वा, वर्षा, कुसुम, बिट्टी, नव्या, शालिनी, रुही, पाविका, अद्रिका, मिष्टी, अदिति सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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बुंदेलखंड में सुआटा पूजन और टेसू-झिझिया की परंपरा लंबे समय से प्रचलित है। नवरात्र के दौरान बालिकाएं मिट्टी से सुआटा की आकृति बनाकर उसकी पूजा करती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। वहीं, टेसू और झिझिया से जुड़ी परंपरा में बच्चे घर-घर जाकर लोकगीत गाते हैं तथा लोगों से गेहूं, आटा और रुपये प्राप्त करते हैं। शरद पूर्णिमा के आसपास टेसू और झिझिया का विवाह कराने की परंपरा भी प्रचलित है।
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ग्राम बम्हरौली में बालिकाओं ने घरों के बाहर और चौराहों पर मिट्टी की प्रतिमाएं बनाईं। सात दिन बाद मिट्टी की झिझिया में दीप जलाकर घर-घर जाकर बुंदेली गीत गाए और लोगों से अनाज व रुपये एकत्र किए। इसके बाद विवाह की रस्में निभाई गईं। रात्रि में मोहल्ले के लोगों के सहयोग से मिट्टी की प्रतिमाओं का सामूहिक विसर्जन किया गया। इस आयोजन में अपूर्वा, वर्षा, कुसुम, बिट्टी, नव्या, शालिनी, रुही, पाविका, अद्रिका, मिष्टी, अदिति सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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