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Jhansi News: राख से पटे रास्ते से गूंजी गोलियों की आवाज सुन अटकी ग्रामीणों की सांस
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झांसी। झांसी-कानपुर हाईवे से सटकर पारीछा बांध की ओर जाने वाला कच्चा रास्ता बुधवार की दोपहर अचानक गोलियों तड़तड़ाहट से गूंज उठा। आवाज सुनकर आसपास काम कर रहे ग्रामीण भयभीत हो गए। हालांकि, इसके कुछ देर बाद एक के बाद एक पुलिस की गाड़ियों की घटनास्थल की ओर आवाजाही शुरू हो गई। इसके बाद ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। तब जाकर साफ हुआ कि पुलिस ने एनकाउंटर किया है और इसमें अतीक का बेटा असद और शूटर गुलाम मारा गया है।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट के पास से दो रास्ते पारीछा बांध की ओर जाते हैं। एक रास्ता पक्का है, ज्यादातर लोग बांध की ओर जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। जबकि, दूसरा रास्ता कच्चा है। इसका इस्तेमाल दिन भर में इक्का-दुक्का ग्रामीण ही करते हैं। इसके अलावा कभी कभार इस रास्ते से थर्मल प्लांट की राख से भरे ट्रकों की आवाजाही होती है। यही वजह है कि पूरा रास्ता राख से पटा हुआ है। किसी भी गाड़ी के निकलने पर राख का गुबार उठ जाता है। बुधवार की दोपहर इस जगह पर पांच-छह ग्रामीण ही मौजूद थे, जो अपनी बकरियां चराने वहां गए हुए थे। अचानक इलाके के सन्नाटे को चीरती हुई कई राउंड गोलियों की आवाज आई। आवाज सुनकर ग्रामीण सहम गए थे। काफी देर बाद ग्रामीणों को पता चला कि यहां एनकाउंटर हुआ है। इसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। घटनास्थल पारीछा के अलावा बड़गांव, चिरगांव से भी लोग पहुंचने लगे। इसके अलावा मीडिया कर्मियों की गाड़ियां घटनास्थल की ओर दौड़ने लगीं। सन्नाटे के आगोश में रहने वाले इस इलाके में तेजी से लोगों की आवाजाही बढ़ गई। यह स्थिति घटना के तीन-चार घंटे बाद तक बनी रही।
गोली की आवाज सुनकर लगा टायर फटा
झांसी। घटनास्थल के पास पारीछा गांव के रामचरन बकरियां चरा रहे थे। बकरियां आसपास चर रहीं थीं और वे पेड़ के नीचे लेटे हुए थे। इसी दरम्यान उन्हें एक गोली चलने की आवाज आई। रामचरन ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि किसी गाड़ी का टायर फटा है। इसके बाद एक के बाद एक आवाज आने लगी। इससे वे घबरा गए और अपनी बकरियों को समेटकर गांव जाने लगे। लेकिन, तभी पुलिस की दो गाड़ियां आती नजर आईं। इस पर वह रुक गए। कुछ देर बाद घटनास्थल पर पहुंचे। नहर के पास दो लोग लहूलुहान पड़े हुए थे। तब जाकर उन्हें पता चला कि पुलिस ने यहां एनकाउंटर किया है।
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तड़तड़ाहट सुनते ही खेत में लेट गए थे गंभीर
झांसी। घटनास्थल पर मौजूद गंभीर सिंह ने बताया कि पास में ही उनका खेत है, जिस पर वह खेतीबाड़ी का काम कर रहे थे। अचानक गोलियों की आवाज आने लगी। इस पर उन्हें लगा कि बदमाश किसी घटना को अंजाम दे रहे हैं। इससे घबराकर वे खेत में ही लेटकर छुप गए थे। काफी देर तक वह इसी तरह छुपे रहे। लेकिन, जब पुलिस की आवाजाही शुरू हुई तो वे भी खेत से बाहर आ गए। आगे बढ़कर देखा तो वहां दो लाशें खून से लथपथ पड़ी हुईं थीं। कई पुलिस वाले सादा लिबास में थे। वे अपने हाथों में हथियार थामे हुए थे। किसी को लाशों के पास तक जाने नहीं दिया जा रहा था।
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट के पास से दो रास्ते पारीछा बांध की ओर जाते हैं। एक रास्ता पक्का है, ज्यादातर लोग बांध की ओर जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। जबकि, दूसरा रास्ता कच्चा है। इसका इस्तेमाल दिन भर में इक्का-दुक्का ग्रामीण ही करते हैं। इसके अलावा कभी कभार इस रास्ते से थर्मल प्लांट की राख से भरे ट्रकों की आवाजाही होती है। यही वजह है कि पूरा रास्ता राख से पटा हुआ है। किसी भी गाड़ी के निकलने पर राख का गुबार उठ जाता है। बुधवार की दोपहर इस जगह पर पांच-छह ग्रामीण ही मौजूद थे, जो अपनी बकरियां चराने वहां गए हुए थे। अचानक इलाके के सन्नाटे को चीरती हुई कई राउंड गोलियों की आवाज आई। आवाज सुनकर ग्रामीण सहम गए थे। काफी देर बाद ग्रामीणों को पता चला कि यहां एनकाउंटर हुआ है। इसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई। घटनास्थल पारीछा के अलावा बड़गांव, चिरगांव से भी लोग पहुंचने लगे। इसके अलावा मीडिया कर्मियों की गाड़ियां घटनास्थल की ओर दौड़ने लगीं। सन्नाटे के आगोश में रहने वाले इस इलाके में तेजी से लोगों की आवाजाही बढ़ गई। यह स्थिति घटना के तीन-चार घंटे बाद तक बनी रही।
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गोली की आवाज सुनकर लगा टायर फटा
झांसी। घटनास्थल के पास पारीछा गांव के रामचरन बकरियां चरा रहे थे। बकरियां आसपास चर रहीं थीं और वे पेड़ के नीचे लेटे हुए थे। इसी दरम्यान उन्हें एक गोली चलने की आवाज आई। रामचरन ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि किसी गाड़ी का टायर फटा है। इसके बाद एक के बाद एक आवाज आने लगी। इससे वे घबरा गए और अपनी बकरियों को समेटकर गांव जाने लगे। लेकिन, तभी पुलिस की दो गाड़ियां आती नजर आईं। इस पर वह रुक गए। कुछ देर बाद घटनास्थल पर पहुंचे। नहर के पास दो लोग लहूलुहान पड़े हुए थे। तब जाकर उन्हें पता चला कि पुलिस ने यहां एनकाउंटर किया है।
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तड़तड़ाहट सुनते ही खेत में लेट गए थे गंभीर
झांसी। घटनास्थल पर मौजूद गंभीर सिंह ने बताया कि पास में ही उनका खेत है, जिस पर वह खेतीबाड़ी का काम कर रहे थे। अचानक गोलियों की आवाज आने लगी। इस पर उन्हें लगा कि बदमाश किसी घटना को अंजाम दे रहे हैं। इससे घबराकर वे खेत में ही लेटकर छुप गए थे। काफी देर तक वह इसी तरह छुपे रहे। लेकिन, जब पुलिस की आवाजाही शुरू हुई तो वे भी खेत से बाहर आ गए। आगे बढ़कर देखा तो वहां दो लाशें खून से लथपथ पड़ी हुईं थीं। कई पुलिस वाले सादा लिबास में थे। वे अपने हाथों में हथियार थामे हुए थे। किसी को लाशों के पास तक जाने नहीं दिया जा रहा था।