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शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता... यही उसका मान, यही है पहचान
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झांसी। आज शिक्षक दिवस है। सभी बच्चे अपने-अपने शिक्षकों को उपहार देकर उनके प्रति स्नेह और श्रद्धा व्यक्त करेंगे। लेकिन हमारे बीच कई ऐसे शिक्षक भी हैं जिनके लिए हर रोज शिक्षक दिवस है। वह पूरी तन्मयता और कर्तव्यनिष्ठ होकर बच्चों और समाज को अपने गुणों की बूटी दे रहे हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं जो वर्षों पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन आज भी अपने विद्यालय और नई पौध को सींच रहे हैं। उनका कहना है कि एक शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। रिटायरमेंट के बाद भी वह बच्चों और समाज को सही-गलत की सीख देता है। यही उसका मान और उसकी पहचान है। शिक्षक दिवस पर हमने भी कुछ ऐसे ही शिक्षकों से बात की, जो अपने गुणों से विद्यालय के अंदर और अपने आसपास की दुनिया में कहीं स्वयं तो कहीं अपने पढ़ाये छात्र-छात्राओं के जरिए झांसी का नाम रोशन कर रहे हैं...।
सेवानिवृत्ति के चार साल बाद भी रोज जाती हैं विद्यालय
झांसी। प्राथमिक विद्यालय गढ़धुरियागंज की पूर्व प्रधानाध्यापिका जमीला खातून सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने शिक्षामित्र के सहयोग और बच्चों को बेहतर वातावरण देने के लिए हर रोज स्कूल पहुंच रही हैं। जमीला खातून वर्ष 2019 में विद्यालय से सेवानिवृत्त हुईं थीं। वह बाल साहित्यकार भी हैं। इनकी कई किताबें छप चुकी हैं। बच्चों पर आधारित किताब ‘नन्हीं उड़ान’ और कविता संग्रह का विमोचन भी स्कूल के बच्चों ने ही किया है। हरियाली के लिए वह स्कूल में बच्चों संग पौधे भी लगा रहीं।
निशुल्क काउंसलिंग व कॅरियर गाइडेंस दे रहीं
झांसी। ललितपुर जीजीआईसी की पूर्व शिक्षिका व डायट बरुआसागर में कार्यरत रहने के बाद मंडलीय मनोविज्ञान में रह चुकीं शिक्षिका रश्मी गुप्ता सेवानिवृत्ति के बाद भी छात्र-छात्राओं और जरूरतमंदों को निशुल्क काउंसलिंग व कॅरियर गाइडेंस दे रही हैं। इलाइट चौराहे के पास ग्रीन पार्क कॉलोनी में रहने वाली रश्मी गुप्ता का कहना है कि एक शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। उसका काम जीवन भर दूसरों को पढ़ाना और अच्छी सलाह देना है। यही शिक्षक की असली पहचान है।
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दो किमी तक नहीं है सड़क, 20 किमी रास्ता तय कर पहुंचतीं हैं विद्यालय
झांसी। आवास विकास केकेपुरी में रहने वाली शिक्षिका रचना तिवारी बबीना के प्राथमिक विद्यालय ढीमरपुरा में प्रधानाध्यापिका हैं। स्कूल जाने के रास्ते में दो किलोमीटर तक कोई सड़क नहीं है। बरसात के दिनों में यहां से निकलना बेहद मुश्किल होता है। लेकि न रचना तिवारी हर रोज 18 से 20 किलोमीटर का सफर तय करके विद्यालय पहुंचती हैं। इनका कहना है कि कल के होनहारों को आज अच्छी पढ़ाई जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों को एक कदम और आगे बढ़ाने की जरूरत है।
हजारों शिष्य संगीत के क्षेत्र में रोशन कर रहे नाम
झांसी। प्रभु श्री रामलाल संगीत महाविद्यालय के गुरु पंडित कृष्णकांत झा के सैकड़ों शिष्य आज संगीत के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रहे हैं। इन्होंने वर्ष 1974 में गुरुजन चंद्रमोहन महाराज की प्रेरणा से संगीत साधकों के लिए इस महाविद्यालय को शुरू किया था। शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य, तबला वादन और लय-ताल के महारथी पंडित कृष्णकांत का कहना है कि संगीत जीवन में मधुरता लाता है। संगीत वह विधा है जो दवा की तरह जिंदगी की भागदौड़ में थक चुके दिमाग को शांत करता है।
गुरु होने के साथ बेहतरीन माउथ ऑर्गन वादक भी
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में शिक्षिका डॉ. मनीषा जैन अच्छी गुरु होने के अलावा शहर की एकमात्र महिला माउथ ऑर्गन वादक भी हैं। इन्होंने हाल ही में जगन्नाथ पुरी ओडिशा में आयोजित इंडियन माउथ ऑर्गन प्लेयर मीट 2022 में झांसी का प्रतिनिधित्व किया है। डॉ. मनीषा छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के साथ-साथ पर्सनालिटी डेवलपमेंट के लिए भी जागरूक करती हैं। इन्हें संगीत का शौक भी है। इन्हें कक्षा छह से ही माउथ ऑर्गन बजाने का शौक था।
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सेवानिवृत्ति के चार साल बाद भी रोज जाती हैं विद्यालय
झांसी। प्राथमिक विद्यालय गढ़धुरियागंज की पूर्व प्रधानाध्यापिका जमीला खातून सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने शिक्षामित्र के सहयोग और बच्चों को बेहतर वातावरण देने के लिए हर रोज स्कूल पहुंच रही हैं। जमीला खातून वर्ष 2019 में विद्यालय से सेवानिवृत्त हुईं थीं। वह बाल साहित्यकार भी हैं। इनकी कई किताबें छप चुकी हैं। बच्चों पर आधारित किताब ‘नन्हीं उड़ान’ और कविता संग्रह का विमोचन भी स्कूल के बच्चों ने ही किया है। हरियाली के लिए वह स्कूल में बच्चों संग पौधे भी लगा रहीं।
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निशुल्क काउंसलिंग व कॅरियर गाइडेंस दे रहीं
झांसी। ललितपुर जीजीआईसी की पूर्व शिक्षिका व डायट बरुआसागर में कार्यरत रहने के बाद मंडलीय मनोविज्ञान में रह चुकीं शिक्षिका रश्मी गुप्ता सेवानिवृत्ति के बाद भी छात्र-छात्राओं और जरूरतमंदों को निशुल्क काउंसलिंग व कॅरियर गाइडेंस दे रही हैं। इलाइट चौराहे के पास ग्रीन पार्क कॉलोनी में रहने वाली रश्मी गुप्ता का कहना है कि एक शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता। उसका काम जीवन भर दूसरों को पढ़ाना और अच्छी सलाह देना है। यही शिक्षक की असली पहचान है।
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दो किमी तक नहीं है सड़क, 20 किमी रास्ता तय कर पहुंचतीं हैं विद्यालय
झांसी। आवास विकास केकेपुरी में रहने वाली शिक्षिका रचना तिवारी बबीना के प्राथमिक विद्यालय ढीमरपुरा में प्रधानाध्यापिका हैं। स्कूल जाने के रास्ते में दो किलोमीटर तक कोई सड़क नहीं है। बरसात के दिनों में यहां से निकलना बेहद मुश्किल होता है। लेकि न रचना तिवारी हर रोज 18 से 20 किलोमीटर का सफर तय करके विद्यालय पहुंचती हैं। इनका कहना है कि कल के होनहारों को आज अच्छी पढ़ाई जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों को एक कदम और आगे बढ़ाने की जरूरत है।
हजारों शिष्य संगीत के क्षेत्र में रोशन कर रहे नाम
झांसी। प्रभु श्री रामलाल संगीत महाविद्यालय के गुरु पंडित कृष्णकांत झा के सैकड़ों शिष्य आज संगीत के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रहे हैं। इन्होंने वर्ष 1974 में गुरुजन चंद्रमोहन महाराज की प्रेरणा से संगीत साधकों के लिए इस महाविद्यालय को शुरू किया था। शास्त्रीय संगीत, कथक नृत्य, तबला वादन और लय-ताल के महारथी पंडित कृष्णकांत का कहना है कि संगीत जीवन में मधुरता लाता है। संगीत वह विधा है जो दवा की तरह जिंदगी की भागदौड़ में थक चुके दिमाग को शांत करता है।
गुरु होने के साथ बेहतरीन माउथ ऑर्गन वादक भी
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में शिक्षिका डॉ. मनीषा जैन अच्छी गुरु होने के अलावा शहर की एकमात्र महिला माउथ ऑर्गन वादक भी हैं। इन्होंने हाल ही में जगन्नाथ पुरी ओडिशा में आयोजित इंडियन माउथ ऑर्गन प्लेयर मीट 2022 में झांसी का प्रतिनिधित्व किया है। डॉ. मनीषा छात्र-छात्राओं को पढ़ाने के साथ-साथ पर्सनालिटी डेवलपमेंट के लिए भी जागरूक करती हैं। इन्हें संगीत का शौक भी है। इन्हें कक्षा छह से ही माउथ ऑर्गन बजाने का शौक था।