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जांघ में घुसकर पीठ से निकला डंडा सर्जरी कर निकाला गया
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झांसी। मड़ावरा में रहने वाले सफाई कर्मचारी की जांघ से घुसकर पेट के रास्ते होते हुए पीठ से निकला झाड़ू का डंडा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने सर्जरी करके निकाला। इस डंडे ने बड़ी आंत में छेद कर लिया था। गनीमत रही कि लिवर और किडनी को नुकसान होने से बच गया।
थाना मड़ावरा के ग्राम सोंरई निवासी अंबिका प्रसाद (46) पुत्र रामरतन पाटकार पंचायतीराज विभाग में सफाई कर्मी के पद पर कार्य करता है। उसकी ड्यूटी बृहस्पतिवार को ग्राम लखंजर में लगी थी। वह बृृहस्पतिवार को सुबह करीब दस बजे ड्यूटी करने के बाद बाइक पर झाडू लेकर वापस घर आ रहा था। जब वह ग्राम लखंजर के जंगल में पहुंचा तो उसे दो युवक दिखाई दिए, जिन्हें देखकर अचानक से वह डर गया और बाइक को तेज चलाकर भागने का प्रयास करने लगा। इस दौरान उसकी तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई, जिससे वह भी बाइक समेत जमीन पर घिसटता हुआ काफी दूर तक चला गया और झाडू में फंसा लगभग पांच फुट का डंडा उसकी जांघ में घुसता हुआ पेट व पीठ से लगभग तीन फुट अंदर जा धंसा। मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के डॉॅ. सौरभ पुरोहित ने मरीज की सर्जरी की।
उन्होंने बताया कि एक घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद डंडे को निकाला जा सका। डंडा लिवर के ठीक नीचे से निकला था। राहत की बात ये रही कि इससे किडनी या लिवर को नुकसान नहीं पहुंचा। वरना जान जाने का भी खतरा हो सकता था।
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थाना मड़ावरा के ग्राम सोंरई निवासी अंबिका प्रसाद (46) पुत्र रामरतन पाटकार पंचायतीराज विभाग में सफाई कर्मी के पद पर कार्य करता है। उसकी ड्यूटी बृहस्पतिवार को ग्राम लखंजर में लगी थी। वह बृृहस्पतिवार को सुबह करीब दस बजे ड्यूटी करने के बाद बाइक पर झाडू लेकर वापस घर आ रहा था। जब वह ग्राम लखंजर के जंगल में पहुंचा तो उसे दो युवक दिखाई दिए, जिन्हें देखकर अचानक से वह डर गया और बाइक को तेज चलाकर भागने का प्रयास करने लगा। इस दौरान उसकी तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई, जिससे वह भी बाइक समेत जमीन पर घिसटता हुआ काफी दूर तक चला गया और झाडू में फंसा लगभग पांच फुट का डंडा उसकी जांघ में घुसता हुआ पेट व पीठ से लगभग तीन फुट अंदर जा धंसा। मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के डॉॅ. सौरभ पुरोहित ने मरीज की सर्जरी की।
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उन्होंने बताया कि एक घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद डंडे को निकाला जा सका। डंडा लिवर के ठीक नीचे से निकला था। राहत की बात ये रही कि इससे किडनी या लिवर को नुकसान नहीं पहुंचा। वरना जान जाने का भी खतरा हो सकता था।
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