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पर्यटन विकास को मोदी सरकार का झटका
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 20 Dec 2016 12:55 AM IST
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river, jhansi news
- फोटो : demo
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झांसी की गढ़मऊ झील की पर्यटन विकास योजना काम पूरा होने के पहले ही बंद हो गई है। जबकि, इस पर एक करोड़ सत्रह लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। केंद्र की मोदी सरकार ने योजना पर खर्च की जाने वाली 4.83 करोड़ की बाकी रकम देने से हाथ खींच लिए हैं, जिससे बुंदेलखंड में पर्यटन विकास की यह महत्वपूर्ण योजना बंद हो गई है।
गढ़मऊ झील झांसी महानगर से महज तेरह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चारों ओर पहाड़ियों से घिरे गढ़मऊ गांव के बीचों-बीच झील स्थित है, जिसमें वर्षभर पानी रहता है। यह नजारा बेहद सुरम्य है। यही वजह है कि इसे बड़े पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। योजना के तहत झील के चारों ओर पाथ-वे बनाया जाना था और बीचों बीच फाउंटेन लगना था। इसके अलावा बोटिंग क्लब, कैफेटेरिया, लाइटिंग, शौचालय आदि बनाने की भी योजना थी। इस प्रोजेक्ट पर छह करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। कई सालों तक फाइलों में झूलने के बाद इस प्रोजेक्ट को केंद्र की यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में मंजूरी दी थी और 1.17 करोड़ रुपये की शुरुआती किस्त भी जारी कर दी गई थी।
साल 2015 में मौके पर काम शुरू हो गया था। यहां तीन घाट बनाए गए और पहाड़ियों के बीच से झील तक पहुंचने का रास्ता बनाया गया। साथ ही कई स्थानों पर बैंच लगाई गईं। लेकिन, इसके बाद बजट की आगामी किस्त जारी नहीं की गई, जिससे काम बंद हो गया। पहले बजट का इंतजार किया जाता रहा, लेकिन अब केंद्र सरकार ने पर्यटन विभाग से यह स्पष्ट कर दिया है कि बजट की आगामी किस्त जारी नहीं की जाएगी। मोदी सरकार के इस फैसले से बुंदेलखंड के पर्यटन विकास की एक बड़ी योजना धड़ाम हो गई है।
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‘गढ़मऊ झील को बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना थी। कई सालों के इंतजार के बाद योजना को मंजूरी मिली थी। लेकिन, काम पूरा नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार ने योजना के तहत अब बजट जारी करने से मना कर दिया है। अब यह फैसला क्यों किया गया है? इस संबंध में सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है।’
- डॉ. कल्याण सिंह यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
गढ़मऊ झील पर्यटन विकास की योजना किन कारणों से बंद की गई, इस संबंध में अभी स्पष्ट तो कुछ नहीं कहा जा सकता। इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। लेकिन, केंद्र सरकार को कई योजनाएं राज्य सरकार का अपेक्षित सहयोग न मिलने की वजह से बंद करनी पड़ीं हैं। केंद्र द्वारा विकास पर खर्च की जाने वाली रकम का प्रदेश में सदुपयोग नहीं हो रहा है।
-डॉ. जगदीश सिंह चौहान, सांसद उमा भारती के प्रतिनिधि।
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गढ़मऊ झील झांसी महानगर से महज तेरह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चारों ओर पहाड़ियों से घिरे गढ़मऊ गांव के बीचों-बीच झील स्थित है, जिसमें वर्षभर पानी रहता है। यह नजारा बेहद सुरम्य है। यही वजह है कि इसे बड़े पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। योजना के तहत झील के चारों ओर पाथ-वे बनाया जाना था और बीचों बीच फाउंटेन लगना था। इसके अलावा बोटिंग क्लब, कैफेटेरिया, लाइटिंग, शौचालय आदि बनाने की भी योजना थी। इस प्रोजेक्ट पर छह करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। कई सालों तक फाइलों में झूलने के बाद इस प्रोजेक्ट को केंद्र की यूपीए सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में मंजूरी दी थी और 1.17 करोड़ रुपये की शुरुआती किस्त भी जारी कर दी गई थी।
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साल 2015 में मौके पर काम शुरू हो गया था। यहां तीन घाट बनाए गए और पहाड़ियों के बीच से झील तक पहुंचने का रास्ता बनाया गया। साथ ही कई स्थानों पर बैंच लगाई गईं। लेकिन, इसके बाद बजट की आगामी किस्त जारी नहीं की गई, जिससे काम बंद हो गया। पहले बजट का इंतजार किया जाता रहा, लेकिन अब केंद्र सरकार ने पर्यटन विभाग से यह स्पष्ट कर दिया है कि बजट की आगामी किस्त जारी नहीं की जाएगी। मोदी सरकार के इस फैसले से बुंदेलखंड के पर्यटन विकास की एक बड़ी योजना धड़ाम हो गई है।
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‘गढ़मऊ झील को बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना थी। कई सालों के इंतजार के बाद योजना को मंजूरी मिली थी। लेकिन, काम पूरा नहीं हो पाया है। केंद्र सरकार ने योजना के तहत अब बजट जारी करने से मना कर दिया है। अब यह फैसला क्यों किया गया है? इस संबंध में सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है।’
- डॉ. कल्याण सिंह यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
गढ़मऊ झील पर्यटन विकास की योजना किन कारणों से बंद की गई, इस संबंध में अभी स्पष्ट तो कुछ नहीं कहा जा सकता। इसकी जानकारी जुटाई जाएगी। लेकिन, केंद्र सरकार को कई योजनाएं राज्य सरकार का अपेक्षित सहयोग न मिलने की वजह से बंद करनी पड़ीं हैं। केंद्र द्वारा विकास पर खर्च की जाने वाली रकम का प्रदेश में सदुपयोग नहीं हो रहा है।
-डॉ. जगदीश सिंह चौहान, सांसद उमा भारती के प्रतिनिधि।