{"_id":"6270255d0ba68b5bfc3adba9","slug":"the-relationship-between-mining-mafia-and-officers-has-been-exposed-even-before-jhansi-news-jhs219892963","type":"story","status":"publish","title_hn":"खनन माफियाओं और अफसरों के रिश्ते पहले भी होते रहे हैं उजागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खनन माफियाओं और अफसरों के रिश्ते पहले भी होते रहे हैं उजागर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। बालू के अवैध खनन को लेकर बुंदेलखंड हमेशा से ही चर्चा में रहा है। नदियों का सीना चीरकर यहां से निकाली गई बालू ने नेताओं और अफसरों को खूब मालामाल करने का काम किया है। सत्ता से गठजोड़ कर रसूखदारों ने यहां बेशुमार दौलत कमाई। अब ये सभी पुराने मामले खंगाले जा रहे हैं, जिससे कइयों की नींद उड़ी हुई है।
बुंदेलखंड में ललितपुर, झांसी, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट में नदी से लेकर पहाड़ तक अवैध खनन की भेंट चढ़ चुके। अवैध खनन करने वालों की निगाह से केन, यमुना, बेतवा नदी खास निशाने पर हैं। इस अवैध खनन के इस खेल के पीछे संगठित तरीके से राजनेता व अफसरों का गठजोड़ काम करता रहा है। हर सरकार में इनका काम बेरोकटोक चलता रहा। अवैध खनन से जुड़े मामलों की कई शिकायतें हो चुकी हैं। इनमें झांसी, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट तक शिकायतें हुईं। नदी को बांधकर अवैध तरीके से बनाए घाटों से पोकलैंड, लिफ्टर की मदद से बालू निकालना आम बात है। यहां की सियासत में भी इसकी झलक देखने को मिलती है। अवैध खनन चुनाव में हमेशा अहम मुद्दा रहा है।
सेवानिवृत्त हो चुके अधिकांश अफसर
झांसी। विजिलेंस जांच के दायरे में आए अधिकांश अफसर अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पूर्व जिलाधिकारी जगन्नाथ सिंह, पूर्व जिलाधिकारी ओम सिंह देशवाल, पूर्व सीडीओ भूपेंद्र त्रिपाठी, डीडीओ प्रेमचंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अफसरों का कहना है कि यह सभी अफसर कुछ वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए। इस मामले में शिकायत होने के करीब तीन साल बाद जांच शुरू करने की अनुमति शासन ने दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुंदेलखंड में ललितपुर, झांसी, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट में नदी से लेकर पहाड़ तक अवैध खनन की भेंट चढ़ चुके। अवैध खनन करने वालों की निगाह से केन, यमुना, बेतवा नदी खास निशाने पर हैं। इस अवैध खनन के इस खेल के पीछे संगठित तरीके से राजनेता व अफसरों का गठजोड़ काम करता रहा है। हर सरकार में इनका काम बेरोकटोक चलता रहा। अवैध खनन से जुड़े मामलों की कई शिकायतें हो चुकी हैं। इनमें झांसी, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट तक शिकायतें हुईं। नदी को बांधकर अवैध तरीके से बनाए घाटों से पोकलैंड, लिफ्टर की मदद से बालू निकालना आम बात है। यहां की सियासत में भी इसकी झलक देखने को मिलती है। अवैध खनन चुनाव में हमेशा अहम मुद्दा रहा है।
विज्ञापन
सेवानिवृत्त हो चुके अधिकांश अफसर
झांसी। विजिलेंस जांच के दायरे में आए अधिकांश अफसर अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पूर्व जिलाधिकारी जगन्नाथ सिंह, पूर्व जिलाधिकारी ओम सिंह देशवाल, पूर्व सीडीओ भूपेंद्र त्रिपाठी, डीडीओ प्रेमचंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अफसरों का कहना है कि यह सभी अफसर कुछ वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए। इस मामले में शिकायत होने के करीब तीन साल बाद जांच शुरू करने की अनुमति शासन ने दी है।
विज्ञापन