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बिजलीः एक मालगाड़ी मिलने से मुश्किल बढ़ी
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट में चार में से तीन इकाइयों से उत्पादन शुरू हो गया है, लेकिन मंगलवार को तीन की जगह एक मालगाड़ी कोयला मिलने से दोबारा उत्पादन पर असर पड़ता नजर आ रहा है। प्लांट अधिकारियों का कहना है कि बुधवार को तीन रैक (मालगाड़ी) नहीं मिलने पर एक इकाई को बंद करना पड़ सकता है। वहीं, ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट में मंगलवार को तीसरी इकाई को भी चालू कर लिया गया। हालांकि, दिन के वक्त एक इकाई में तकनीकी खराबी के कारण उसकी मरम्मत का काम चल रहा है।
झांसी के थर्मल पावर संयंत्र और ललितपुर में स्थित बजाज पावर प्लांट में रोजाना 2900 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन, कोयले की कमी की वजह से पिछले 11 दिन में उत्पादन में भारी गिरावट आ गई थी। पारीछा की चार में से दो और बजाज की तीन में से दो इकाइयों का उत्पादन ठप पड़ गया था। दोनों जगह प्रतिदिन कोयले की रैक (मालगाड़ी) मिलना शुरू होने से हालत धीरे- धीरे सामान्य होने लगे थे, मगर, पारीछा प्लांट को मंगलवार को एक मालगाड़ी कोयला ही मिल सका।
इससे दोबारा उत्पादन कम होने की स्थिति बनने लगी है। बुधवार को अगर तीन मालगाड़ी कोयला नहीं मिला तो चालू तीन इकाइयों में एक को बंद करना पड़ सकता है। वर्तमान में पारीछा की चार इकाइयों में 250 मेगावाट की दो व 210 मेगावाट की एक इकाई से उत्पादन हो रहा है। इसी तरह ललितपुर प्लांट की 660- 660 मेगावाट की तीन इकाइयों से मंगलवार को उत्पादन शुरू हो गया। अभी दो इकाइयों से उत्पादन हो रहा था। हालांकि, दिन के वक्त एक इकाई तकनीकी खराबी से बंद हो गई जिसकी मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। देर रात तक इस इकाई के चालू होने की उम्मीद थी।
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मंगलवार को एक मालगाड़ी कोयला ही मिल सका। इस हिसाब से बुधवार को तीन मालगाड़ी मिलना जरूरी है। अन्यथा स्टॉक की स्थिति से एक इकाई को दोबारा बंद करना पड़ सकता है।
एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक (पारीछा थर्मल पावर प्लांट)।
मंगलवार को तीसरी इकाई को भी चालू कर लिया गया। स्टॉक में तीन- चार दिन का कोयला उपलब्ध है। हालांकि, दिन के वक्त एक इकाई में तकनीकी खराबी आने से वह बंद हो गई। मरम्मत कार्य चल रहा है।
राजीव श्रीवास्तव, असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट (बजाज पावर प्लांट)।
प्रदेश में दिन ढलते ही बढ़ जाती है बिजली की मांग
नवरात्र पर्व के चलते दिन ढलते ही प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ जाती है। प्रदेश में इन दिनों दिन के वक्त बिजली की मांग 15 हजार से 16 हजार मेगावाट चल रही है। शाम होते ही यह मांग बढ़कर 20 हजार मेगावाट पर पहुंच जाती है। झांसी जनपद में 150 मेगावाट से 170 मेगावाट बिजली की मांग चल रही है। उत्तर पावर कारपोरेशन अपनी इकाइयों से छह हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। बाकी की पूर्ति निजी कंपनियों व दूसरे राज्यों से पूरी की जा रही है।
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झांसी के थर्मल पावर संयंत्र और ललितपुर में स्थित बजाज पावर प्लांट में रोजाना 2900 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। लेकिन, कोयले की कमी की वजह से पिछले 11 दिन में उत्पादन में भारी गिरावट आ गई थी। पारीछा की चार में से दो और बजाज की तीन में से दो इकाइयों का उत्पादन ठप पड़ गया था। दोनों जगह प्रतिदिन कोयले की रैक (मालगाड़ी) मिलना शुरू होने से हालत धीरे- धीरे सामान्य होने लगे थे, मगर, पारीछा प्लांट को मंगलवार को एक मालगाड़ी कोयला ही मिल सका।
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इससे दोबारा उत्पादन कम होने की स्थिति बनने लगी है। बुधवार को अगर तीन मालगाड़ी कोयला नहीं मिला तो चालू तीन इकाइयों में एक को बंद करना पड़ सकता है। वर्तमान में पारीछा की चार इकाइयों में 250 मेगावाट की दो व 210 मेगावाट की एक इकाई से उत्पादन हो रहा है। इसी तरह ललितपुर प्लांट की 660- 660 मेगावाट की तीन इकाइयों से मंगलवार को उत्पादन शुरू हो गया। अभी दो इकाइयों से उत्पादन हो रहा था। हालांकि, दिन के वक्त एक इकाई तकनीकी खराबी से बंद हो गई जिसकी मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। देर रात तक इस इकाई के चालू होने की उम्मीद थी।
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मंगलवार को एक मालगाड़ी कोयला ही मिल सका। इस हिसाब से बुधवार को तीन मालगाड़ी मिलना जरूरी है। अन्यथा स्टॉक की स्थिति से एक इकाई को दोबारा बंद करना पड़ सकता है।
एमके सचान, मुख्य महाप्रबंधक (पारीछा थर्मल पावर प्लांट)।
मंगलवार को तीसरी इकाई को भी चालू कर लिया गया। स्टॉक में तीन- चार दिन का कोयला उपलब्ध है। हालांकि, दिन के वक्त एक इकाई में तकनीकी खराबी आने से वह बंद हो गई। मरम्मत कार्य चल रहा है।
राजीव श्रीवास्तव, असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट (बजाज पावर प्लांट)।
प्रदेश में दिन ढलते ही बढ़ जाती है बिजली की मांग
नवरात्र पर्व के चलते दिन ढलते ही प्रदेश में बिजली की मांग बढ़ जाती है। प्रदेश में इन दिनों दिन के वक्त बिजली की मांग 15 हजार से 16 हजार मेगावाट चल रही है। शाम होते ही यह मांग बढ़कर 20 हजार मेगावाट पर पहुंच जाती है। झांसी जनपद में 150 मेगावाट से 170 मेगावाट बिजली की मांग चल रही है। उत्तर पावर कारपोरेशन अपनी इकाइयों से छह हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। बाकी की पूर्ति निजी कंपनियों व दूसरे राज्यों से पूरी की जा रही है।