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कभी रहीं झांसी की शान, आज धरोहरें हो रहीं वीरान

Mon, 22 Nov 2021 10:24 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 22 Nov 2021 10:24 PM IST
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The pride of Jhansi was once upon a time, today the heritage is getting deserted
विश्वधरोहर दिवस -----------------------नगर का भांडेरी गेट जहां से महारानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजो के युद्ध करते ह?
झांसी। भारतीय इतिहास में झांसी का अहम योगदान है। बुंदेल और चंदेल काल से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक झांसी के इतिहास में काफी कुछ ऐसा शामिल हुआ, जो आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ी धरोहर है। तमाम धरोहर ऐसी हैं, जो कभी झांसी की शान और पहचान रहीं, लेकिन अब वीरान हो रहीं हैं। शासन से लेकर प्रशासन तक सबकी नजर पुरातत्व और धरोहर के नाम पर झांसी का किला, रानी महल, बरुआसागर के किले तक सिमट कर रह जाती है। इसके अलावा अन्य धरोहरों को कोई देखने वाला नहीं है। हाल यह है कि कई धरोहरें अतिक्रमण की चपेट में है, तो कई जर्जरहाल हो चुकी हैं। इन दिनों पुरातत्व विभाग विश्व धरोहर सप्ताह मना रहा है। विद्यार्थियों व सैलानियों को पुरातत्व धरोहरों से जोड़ा जा रहा है, लेकिन गुमनाम स्मारकों को सामने लाने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है।
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झोकनबाग मेमोरियल सिमेट्री अतिक्रमण की चपेट में
1857-58 की क्रांति से पहले हुए संघर्ष में कई अंग्रेज सैनिक मारे गए थे। इनकी स्मृति में ब्रिटिश सरकार ने झोकनबाग में मेमोरियल सिमेट्री का निर्माण कराया था। मगर, यहां अब कब्जों की भरमार है। कई बार यहां से कब्जा हटाने और जीर्णोद्धार कराने की योजनाएं बनीं, लेकिन कुछ नहीं हो सका। आलम यह है कि इसके चारों ओर कई लोगों ने अतिक्रमण कर दुकानें बना ली हैं। एक दशक पहले तक इस स्मारक पर इंग्लैंड के कई पर्यटक आते थे, लेकिन अब कोई नहीं आता। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षा सहायक अभिषेक कुमार ने बताया कि झोकनबाग मेमोरियल सिमेट्री के विकास को लेकर प्रस्ताव तैयार हो रहा है, स्वीकृत होते ही कार्य शुरू हो जाएगा।
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मोहल्लों के नाम पर सिमट कर रह गए दरवाजे
झांसी में दुश्मन को नगर के अंदर घुसने से रोकने के लिए सुरक्षा की दृष्टि से बनाए गए परकोटा और दरवाजे अब मोहल्लों के नाम तक सिमट कर रह गए हैं। परकोटा कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनके आसपास लोगों ने अतिक्रमण कर अपने आवास बना लिए हैं। इसके साथ ही ओरछा गेट, उन्नाव गेट, दतिया गेट, सागर गेट समेत तमाम प्राचीन दरवाजे अपना अस्तित्व खो रहे हैं। इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण भांडेरी गेट भी अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। यह वह दरवाजा है, जिसने रानी लक्ष्मीबाई को हमेशा के लिए अपनी प्रिय झांसी से बिछड़ता देखा।
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कभी चमकने वाले महल मेें अब लगे हैं कूड़े के ढेर
नईबस्ती स्थित रघुनाथ महल भी बदहाली का शिकार है। कभी इस महल में हमेशा चहल पहल और सफाई रहती थी, लेकिन अब कूड़े के ढेर लगे हैं। हालांकि पुरातत्व विभाग ने इसके सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्य के लिए नगर निगम को एनओसी दे दी है। विभाग का कहना है कि जल्द ही विकास कार्य शुरू हो जाएंगे। वहीं, हाथी खाना जहां हाथियों और घोड़ों को रखा जाता था, वह भी बदहाल है। हालांकि, इसके एक छोटे से हिस्से में पार्क बना दिया गया है।
पहचान की तलाश में है झांसी के पहले राजा की समाधि
झांसी के पहले राजा रामचंद्र राव की समाधि पुरानी तहसील के पास है। लेकिन, सरकारी संरक्षण के अभाव में यह अतिक्रमण की चपेट में है। यह ऐतिहासिक स्थल अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रहा है।
गोसाईयों के मंदिरों को भी संरक्षण का इंतजार
महानगर में अधिकांश शिव मंदिर गोसाईं संप्रदाय के संतों द्वारा 17 वीं शताब्दी में बनवाए थे। इनकी संख्या 56 से अधिक बतायी जाती है। इनमें से कई मंदिरों के गर्भगृह में बुंदेली चित्र आज भी हैं। इसके अलावा मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी देवताओं की मूर्तियां व नक्काशी अद्भुत है। लेकिन, सुरैया का बाग सहित कई अन्य क्षेत्रों में स्थित यह मंदिर संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के इंतजार में हैं।
धरोहर सप्ताह में हो रहे हैं आयोजन
विश्व पुरातत्व धरोहर सप्ताह के अंतर्गत राज्य पुरातत्व विभाग द्वारा झांसी और ललितपुर में कई आयोजन कराए जा रहे हैं। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के अनुसार छात्र छात्राओं को लक्ष्मी मंदिर, बरुआसागर किले का भ्रमण कराया जा रहा है। 23 और 25 नवंबर को राजकीय संग्रहालय में संगोष्ठी होगी। इसके अलावा ऐतिहासिक स्थलों के चित्रों की प्रदर्शनी तथा 25 नवंबर को चित्रकला प्रतियोगिता होगी।

पुरातत्व विभाग के पास संसाधनों व कर्मचारियों की बेहद कमी ह्रै। सभी संरक्षित स्मारकों को पूरी तरह से सहेजा जा रहा है। रघुनाथ राव महल के बाराद्वारी का भी नगर निगम जल्द ही विकास कार्य करेगा। वहीं, नगर परकोटा व परकोटा के दरवाजों को संरक्षण की अति आवश्यकता है।
डॉ. एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी
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