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बूढ़े पुल को बाय-बाय कहेगा रेलवे

Tue, 23 Aug 2016 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 23 Aug 2016 12:35 AM IST
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 The old railway bridge, say bye - bye
overbirj, jhansi news - फोटो : demo
झांसी। रेलवे स्टेशन पर सात दशक पूर्व बना सबसे पहला फुट ओवरब्रिज आने वाले दिनों में नजर नहीं आएगा। यह पुल अपनी उम्र पूरी कर चुका है। भविष्य में यह पुल हादसे का करण न बने इसलिए रेलवे ने इसे तोड़ने का फैसला लिया है।
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इस समय रेलवे स्टेशन पर तीन फुट ओवरब्रिज बने हुए हैं। इनमें मुख्य द्वार के सामने एक पुराना फुट ओवरब्रिज व एक नया एस्केलेटर पुल बना हुआ है। एक पुल आगे की तरफ बना हुआ है, जिसका रास्ता जीआरपी थाने के बगल से जाता है। नया एस्केलेटर फुट ओवरब्रिज यात्रियों के लिए एक साल पहले खोल दिया गया था। इस ब्रिज को बनाने का उद्देश्य पास में बने पुराने ब्रिज को तोड़ना था, क्योंकि यह अपनी उम्र पूरी कर चुुका है।
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पुराने पुल को तोड़ने के बाद यात्रियों की दिक्कतें बढ़ना तय है। दरअसल, पुराने फुट ओवरब्रिज में ही हर प्लेटफार्म पर उतरने के लिए रैंप बना हुआ है। इससे व्हील चेयर, स्ट्रेचर से बीमार यात्रियों को दूसरे प्लेटफार्मों पर ले जाने में परेशानी नहीं होती है। रैंप से वृद्ध व विकलांग यात्रियों को भी जाने में सहूलियत होती है। दूसरी तरफ नये ब्रिज की ऊंचाई यात्रियों के लिए परेशानी बनी हुई है।
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एस्केलेटर न चल रहा हो तो इस ब्रिज की साढ़े आठ मीटर ऊंचाई सबके पसीने छुड़ा देती है। पुल पर चढ़ने के लिए 56 सीढ़ियां बनाई गई हैं। किसी के लिए भी एक साथ सामान लेकर इतनी सीढ़ियां चढ़ना मुश्किल है। रैंप न होने से दूसरे प्लेटफार्मों पर उतरना भी मुश्किल भरा होता है। पीआरओ गिरीश कंचन ने बताया कि नये पुल पर रैंप और लिफ्ट लगने के बाद ही पुराने पुल को तोड़ा जाएगा।

रैंप का बनना जरूरी 
झोकन बाग निवासी रमेश चंद्र साहू का कहना है कि एस्केलेटर पुल पर प्लेटफार्म दो/ तीन व चार/ पांच पर उतरने के लिए रैंप का बनाया जाना बहुत जरूरी है। रैंप के बिना सामान लेकर चढ़ना इस पुल पर मुश्किल भरा हो जाता है। 

दूसरे प्लेटफार्मों पर भी लगाई जाए एस्केलेटर 
सिविल लाइन निवासी अनय कुमार वर्मा ने कहा कि नए फुट ओवर ब्रिज पर प्लेटफार्म एक की तरह ही दूसरे प्लेटफार्मों पर भी चढ़ने-उतरने के लिए एस्केलेटर मशीन लगना चाहिए, तभी इस पुल को बनाने का उद्देश्य पूरा होगा। 


यह भी है समाधान
सिकंदराबाद और आगरा फोर्ट स्टेशनों पर भी इसी तरह की समस्या है। इन स्टेशनों पर पटरियों के बीच पाथ-वे बनाया गया है जिसके जरिए विकलांग, बीमार या वृद्ध यात्री व्हील चेयर अथवा किसी दूसरे साधन से आराम से आते-जाते हैं।
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