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बच्चों और जवानों की कम हो रही याददाश्त, भूल रहे आजकल की बात

Mon, 11 Apr 2022 10:27 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 10:27 PM IST
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The memory of children and jawans is decreasing, forgetting the matter of today
झांसी। भागमभाग जिंदगी में ऑनलाइन दिखने का स्टेटस सिंबल लोगों को बीमार कर रहा है। तनाव के अलावा इससे बच्चों और जवानों की याददाश्त कम हो रही है। बच्चे जहां खाना खाकर भूल रहे हैं, उन्हें पढ़ा हुआ पाठ याद नहीं रहता वहीं 25 साल के युवा आजकल में किया गया काम भूल जा रहे हैं। झांसी स्थित मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में इधर 20 दिनों में ऐसे 170 केस आए हैं। फिलहाल मनोवैज्ञानिक इनकी काउंसलिंग कर रहे हैं।
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कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई और ऑनलाइन वर्क ने बच्चों की पढ़ाई और लोगों की आजीविका चलाने में बड़ी मदद की। वहीं यह ऑनलाइन प्लेटफार्म अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। बच्चे हों या बड़े, सभी दिन और रात का बहुत सारा समय मोबाइल पर बिता रहे हैं। यही टाइमपास अब तनाव दे रहा है। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. मनीष बताते हैं कि पिछले 20 दिनों में केंद्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन मिलाकर 170 ऐसे केस आ चुके हैं जिनमें 9 साल के बच्चों से लेकर 45 साल तक के युवाओं की याददाश्त कमजोर हो रही है।
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बच्चे बता रहे कि उन्हें पढ़ा हुआ कुछ भी याद नहीं रहता, वो खाना खाते हैं लेकिन भूल जाते हैं कि कितनी रोटी खाई। अपना टिफिन, पेंसिल बॉक्स और किताबें रखकर भूल जाते हैं। वहीं, 25 से 45 साल के युवाओं के कई केस में लोग बता रहे हैं कि वो अपना सामान रखकर भूल जाते हैं। घर से निकलने से पहले कहीं जाने की सोचते हैं लेकिन बाद में ध्यान भूल जाता है। स्थिति अधिक बिगड़ने पर याददाश्त भूलने का डर मनोविकार का रूप ले सकता है। व्यक्ति ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ) का शिकार हो सकता है। इनमें कुछ केस ऐसे भी हैं। इन दिनों सरकारी स्कूलों में भी काउंसलिंग की जा रही है। डॉ. मनीष ने बताया कि इसमें महिलाएं भी शामिल हैं।
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ये हैं प्रमुख कारण
-बच्चों का मोबाइल खेलना, कोरोना काल में लगातार ऑनलाइन पढ़ाई करना।
-युवाओं में लाइफ और काम का तनाव, समाज से दूर मोबाइल में मगन रहना।
-ऑनलाइन सोशल लाइफ में ज्यादा बिजी रहना, पेरेन्टस का ज्यादा ध्यान न देना।
-फ्रेंड सर्किल में दिखावा और हर वक्त ऑनलाइन दिखने को स्टेटस समझना।
ऐसे कर रहे काउंसलिंग
-पेरेन्ट्स बच्चों को समय दें, बच्चों को इंडोर और आउटडोर गेम्स खिलाएं।
-स्कूल पढ़ाई के साथ गेम्स एक्टिविटी बढ़ाएं और हफ्ते में एक दिन बाल सभा करें।
-युवा परिवार और समाज में घुलें-मिलें, अपनी बातें शेयर करें। परिवार को समय दें।
-सेवा कार्यों से जुड़ें और पढ़ाई और काम के घंटे तय करें, मोबाइल ऑफ करके सोएं।
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