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Jhansi News: पूरे साल महापौर खर्च नहीं कर सके विवेकाधीन निधि के दो लाख

Mon, 10 Mar 2025 02:17 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 10 Mar 2025 02:17 AM IST
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The mayor could not spend two lakhs of discretionary fund for the whole year

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। विवेकाधीन निधि के तौर पर महापौर को हर साल दो लाख रुपये मिलते हैं, लेकिन महापौर बिहारीलाल आर्य पूरे साल भर इस निधि का इस्तेमाल नहीं कर सके। अब वित्तीय वर्ष खत्म होने में चंद दिन शेष बचे हैं। रकम का इस्तेमाल न होने से यह रकम निगम के खजाने में वापस हो जाएगी।



नगर निगम अधिनियम-1959 में महापौर को कोई वित्तीय अधिकार नहीं है। नगर निगम निधि भी महापौर सीधे खर्च नहीं कर सकते। विधायक एवं सांसदों की तरह उनको कोई निधि नहीं मिलती। हालांकि अवस्थापना निधि एवं केंद्रीय वित्त आयोग के कार्य महापौर की अध्यक्षता में बनी कमेटी करती है। इन सबके बीच महापौर को सिर्फ विवेकाधीन कोष से सलाना दो लाख रुपये ही अपनी मर्जी से खर्च करने की इजाजत होती है। अपने विवेक से महापौर किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद में यह रकम खर्च कर सकते हैं।
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इस साल भी इस निधि के दो लाख रुपये खर्च नहीं हो सके। वित्तीय वर्ष खत्म होने पर यह रकम नगर निगम के खजाने में वापस लौट जाएगी। महापौर बिहारी लाल आर्य का कहना है कि यह निधि आकस्मिकता में खर्च करने के लिए सुरक्षित रखी है।
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इनसेट

नगर निगम को निधि देने में कंजूसी बरत रहे सांसद-विधायक



महानगर सीमा में छह विधायक समेत सांसद निवास करते हैं, लेकिन नगर निगम को निधि देने में यह सभी जनप्रतिनिधि कंजूसी बरतते हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में सांसद निधि अनुदान व्यय के तौर पर सिर्फ दो लाख रुपये ही दिए जबकि पिछले वर्ष 23-24 में 58 लाख रुपये दिए थे। इसी तरह, विधायक निधि अनुदान व्यय के तौर महज पांच लाख रुपये दिए गए। आमतौर पर महानगर सीमा में रहने वाले विधायक तमाम जनसुविधाओं के कार्यों के लिए निगम को अपनी निधि से कुछ हिस्सा काम कराने के लिए देते हैं, लेकिन झांसी के विधायक निगम को अपनी निधि देने के मामले में जमकर कंजूसी बरत रहे हैं।
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