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लेमन ग्रास से हरी- भरी हो रही है बुंदेलखंड की धरती

Mon, 23 Aug 2021 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:18 AM IST
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The land of Bundelkhand is getting green with lemon grass
लेमन ग्रास।
झांसी। लेमन ग्रास बुंदेलखंड को हरियाली देने के साथ ही अपने उत्पाद से देश की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ कर रहा है। इससे तैयार सैनिटाइजर और तेल विदेशों में निर्यात कर झांसी का कृषि विश्वविद्यालय करीब 16 करोड़ की आय अर्जित कर रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लेमन ग्रास के एक लीटर तेल की कीमत करीब 1200 रुपये है। वहीं आयुर्वेदिक काढ़े में इसका जमकर उपयोग किया जा रहा है। एक बार पौधा लगाकर इसकी तीन बार कटाई की जाती है। बुंदेलखंड के हजारों किसान परंपरागत खेती के साथ- साथ इसकी खेती कर खूब मुनाफा कमा रहे हैं।
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कोरोना काल में जीवन दायिनी बनकर उभरे लेमन ग्रास उत्पाद का कृषि विश्वविद्यालय विदेशों को निर्यात कर रहा है। वहीं इसके माध्यम से भारत में आयुष काढ़े में इसका जमकर उपयोग हुआ। खासियत यह है कि केवल मिट्टी में नमी रहने पर भी पैदा किया जा सकता है। भारत में इससे बनाए गए सैनिटाइजर और तेल भी तैयार कर संयुक्त राज्य अमेरिका, श्रीलंका, थाईलैंड, फ्रांस, ताइवान, मलेशिया, कनाडा, बेल्जियम, अर्जेंटिना, आस्ट्रेलिया, जर्मनी आदि देशों में भेजे जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार लेमन ग्रास के एक लीटर तेल की कीमत करीब 1200 रुपये है। एक बार लगाकर इसकी तीन वर्ष तक कटाई की जाती है। प्रत्येक छह महीने में इसकी कटाई की जाती है। एक हेक्टेयर खेत की पहली कटाई में करीब 25 लीटर तेल निकाला जाता है, जबकि दूसरी कटाई में निकलने वाले तेल की मात्र 70 लीटर तक होती है। खासियत यह है कि हर बार की कटाई में तेल की मात्रा बढ़ती जाती है।
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कृषि विश्वविद्यालय किसानों को प्रशिक्षण के साथ पौधे की उपलब्ध करा रहा है। किसानों ने इसमें रुचि दिखाई है और अच्छा उत्पादन कर रहे हैं। मवेशी इसे नुकसान नहीं करते जिससे किसानों को नुकसान होने का भय भी नहीं रहता। इस वर्ष अब तक करीब 16 करोड़ का तेल निर्यात विश्व के दस से अधिक देशों में किया जा चुका है। डा. एके पांडेय, डीन, उद्यानिकी एवं वानिकी, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय
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