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Jhansi News: ओरछा के पूर्व तहसीलदार की वेतनवृद्धि रोकी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ओरछा । संभाग आयुक्त डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत ने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने पर पूर्व पदस्थ ओरछा तहसीलदार सुमित गुर्जर की एक वर्षीय वेतन वृद्धि रोके जाने का आदेश किया है।
संभाग आयुक्त कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार उपायुक्त (राजस्व) सागर संभाग ने न्यायालय व कार्यालय तहसीलदार ओरछा का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाई गई अनियमितताओं के संदर्भ में तहसीलदार ओरछा सुमित गुर्जर को नोटिस जारी कर 10 दिवस की समयावधि में स्पष्टीकरण चाहा गया था। प्रकरण में सुमित गुर्जर तहसीलदार ओरछा द्वारा प्रस्तुत उत्तर और कलेक्टर निवाड़ी द्वारा दिए गए अभिमत का अवलोकन व परीक्षण किया गया, जिसमें पाया कि न्यायालय तहसीलदार ओरछा में वर्ष 2021-22 से निरीक्षण दिनांक तक 27 अपंजीकृत प्रकरण पाए गए। आवेदन पत्र जो प्रकरण के रूप में रखे गए थे, वह पंजीबद्ध नहीं थे। दो प्रकरण लगभग 10 माह से अभिमत के लिए लंबित रखे गए थे। अनेक प्रकरणों में आदेश पत्रिकाओं पर पेशी दिनांक नियत की गई, किंतु उस दिनांक को प्रकरण नहीं लिया गया है। कई प्रकरणों में आठ से दस पेशियों तक पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए गए। प्रतिलिपि शाखा में रसीद कट्टा, डेली कैशबुक, मुख्य कैशबुक संधारित होना नहीं पाई गई।
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ओरछा । संभाग आयुक्त डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत ने पदीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरतने पर पूर्व पदस्थ ओरछा तहसीलदार सुमित गुर्जर की एक वर्षीय वेतन वृद्धि रोके जाने का आदेश किया है।
संभाग आयुक्त कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार उपायुक्त (राजस्व) सागर संभाग ने न्यायालय व कार्यालय तहसीलदार ओरछा का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाई गई अनियमितताओं के संदर्भ में तहसीलदार ओरछा सुमित गुर्जर को नोटिस जारी कर 10 दिवस की समयावधि में स्पष्टीकरण चाहा गया था। प्रकरण में सुमित गुर्जर तहसीलदार ओरछा द्वारा प्रस्तुत उत्तर और कलेक्टर निवाड़ी द्वारा दिए गए अभिमत का अवलोकन व परीक्षण किया गया, जिसमें पाया कि न्यायालय तहसीलदार ओरछा में वर्ष 2021-22 से निरीक्षण दिनांक तक 27 अपंजीकृत प्रकरण पाए गए। आवेदन पत्र जो प्रकरण के रूप में रखे गए थे, वह पंजीबद्ध नहीं थे। दो प्रकरण लगभग 10 माह से अभिमत के लिए लंबित रखे गए थे। अनेक प्रकरणों में आदेश पत्रिकाओं पर पेशी दिनांक नियत की गई, किंतु उस दिनांक को प्रकरण नहीं लिया गया है। कई प्रकरणों में आठ से दस पेशियों तक पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए गए। प्रतिलिपि शाखा में रसीद कट्टा, डेली कैशबुक, मुख्य कैशबुक संधारित होना नहीं पाई गई।
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