{"_id":"61abc48fe3ae4b1f1a4093dd","slug":"the-hospital-is-ten-kilometers-away-from-them-and-the-police-station-is-eight-kilometers-away-jhansi-news-jhs210228129","type":"story","status":"publish","title_hn":"इनके यहां से तो दस किलोमीटर दूर अस्पताल है और आठ किलोमीटर दूर थाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इनके यहां से तो दस किलोमीटर दूर अस्पताल है और आठ किलोमीटर दूर थाना
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झांसी। शहरी दायरे में शामिल होने के बावजूद पाल कॉलोनी, करारी, सिमरधा जैसे इलाकों तक शहरी सुविधाएं नहीं पहुंची। करीब 35-40 हजार आबादी के इस इलाके में लोगों को इलाज के लिए आठ से दस किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। बीस साल से शहरी सीमा में शामिल होने के बावजूद यहां पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं पहुंच सकीं।
वर्ष 2002 में झांसी शहर को नगर महापालिका के बजाए नगर निगम में तब्दील किया गया। आसपास की 15 ग्राम सभाओं को निगम सीमा में शामिल कर दिया गया। इससे यहां विकास की उम्मीद जगी लेकिन, बीस साल बाद भी यहां की हालत नहीं बदली। निगम की उत्तरी सीमा मैरी के संपूर्ण भाग से होते हुए ग्राम बूढ़ा, नगरिया कुआं, सिमरधा, करारी, अंबावाय एवं परवई गांव की सीमा तक पहुंच चुकी है। पूरे इलाके की आबादी करीब चालीस हजार है लेकिन, आसपास कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। इलाज के लिए जिला अस्पताल तक जाना पड़ता है। करारी से अस्पताल की दूरी करीब 10 किमी है। आसपास के इलाके में भी कोई अच्छा नर्सिंग होम नहीं है। कुछ छोटे-छोटे क्लीनिक खुले हैं, जो सिर्फ सर्दी, बुखार की दवा देने तक सीमित हैं। महिलाओं को इलाज के लिए जिला अस्पताल तक जाना पड़ता है। अस्पताल दूर होने से गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है।
पाल कॉलोनी, करारी, सिमरधा जैसे इलाकों में पीने का पानी भी नहीं है। पॉल कॉलोनी में करीब तीन साल पहले पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन, आज तक यह शुरू नहीं हुई। मोहल्ले के लोगों के लिए हैंडपंप ही सहारा है। गर्मियों में जलस्तर नीचे जाते ही यह काम करना बंद कर देते हैं।
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इसी तरह इस पूरी आबादी के लिए सिर्फ पोस्ट ऑफिस है। यह भी करीब दस किमी दूर सीपरी बाजार में है। पढ़ाई के लिए यहां तीन अलग-अलग प्राथमिक विद्यालय हैं लेकिन, इंटर कॉलेज नहीं है। हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पूरे इलाके में कोई उच्च शिक्षण संस्थान नहीं है।
साफ-सफाई को लेकर नगर निगम ने भी कोई इंतजाम नहीं किए। अधिकांश जगहों पर जल निकासी की नालियां कच्ची हैं। बूढ़ा एवं मैरी के कुछ हिस्से छोड़कर कहीं भी सफाईकर्मी नहीं आते। शहरी इलाकों में कूड़ा उठाने को सीधे घरों से कूड़ा उठवाया जा रहा है लेकिन, इस इलाके में इसका कोई अता-पता नहीं। बिजली की कटौती से भी लोग परेशान रहते हैं।
वर्ष 2002 में नगर निगम दायरे में शामिल हुई ग्राम सभाओं का ब्यौरा
ग्राम सभा ग्राम सभा का कुल क्षेत्रफल हेक्टेयर
बिजौली 246.896
हंसारी 25.103
गढियागांव 177.578
करारी 168.783
करगुवां 4.525
कोछाभांवर 36.043
भगवंतपुरा 74.473
पिछोर 25.874
सिमरधा 56.418
सिमराहा 12.147
लहरगिर्द 122.752
झांसी खास 86.903
तालपुरा भट्टागांव, खिरक पट्टी 11.47
सिगर्रा 32.184
मैरी 30.416
कुल 1111.542 हेक्टेयर
- पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है। पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन, काफी समय बाद भी कनेक्शन नहीं हुआ। हैंडपंप ही सहारा है। गर्मियों में बिल्कुल पानी नहीं मिलता
शांति देवी
- आसपास कोई अस्पताल नहीं है। बीमार पड़ने पर करीब आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है
अंजली
पीने के पानी की बहुत परेशानी है। कई बार शिकायत की गई लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई।
ऋतिक
आसपास कोई स्कूल नहीं है। हम लोगों को पढ़ने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। पास में स्कूल बनवाया जाना चाहिए
कुणाल
बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। इससे काफी परेशानी होती है। बच्चों की भी पढ़ाई नहीं हो पाती है। शिकायत की जाती है तब भी कोई सुनवाई नहीं होती।
सुमन
नगर निगम सीमा मेें शामिल होने के बावजूद इन इलाकों में कोई भी सुविधा नहीं बढ़ी। स्ट्रीट लाइट खराब हो जाती है तब ठीक नहीं होती। शिकायतों के बाद भी काम नहीं होता।
रोहित सेंगर
करीब आठ किमी दूर थाना
इस पूरे इलाके की आबादी करीब चालीस हजार है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद कोई नया थाना कायम नहीं हुआ। पूरे इलाके का अधिकांश हिस्सा सीपरी बाजार थाने में आता है, जिसकी अधिकांश जगहों से दूरी करीब आठ किमी है। इसी तरह बूढ़ा, मैरी आदि इलाकों के रहने वालों को भी अपनी शिकायत लेकर करीब आठ किमी दूर सीपरी बाजार थाना जाना पड़ता है। इतनी दूर थाना होने की वजह से यहां की आबादी की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। पुलिस को भी अपराध की सूचना मिलने पर यहां तक पहुंचने में काफी समय लगता है।
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वर्ष 2002 में झांसी शहर को नगर महापालिका के बजाए नगर निगम में तब्दील किया गया। आसपास की 15 ग्राम सभाओं को निगम सीमा में शामिल कर दिया गया। इससे यहां विकास की उम्मीद जगी लेकिन, बीस साल बाद भी यहां की हालत नहीं बदली। निगम की उत्तरी सीमा मैरी के संपूर्ण भाग से होते हुए ग्राम बूढ़ा, नगरिया कुआं, सिमरधा, करारी, अंबावाय एवं परवई गांव की सीमा तक पहुंच चुकी है। पूरे इलाके की आबादी करीब चालीस हजार है लेकिन, आसपास कोई सरकारी अस्पताल नहीं है। इलाज के लिए जिला अस्पताल तक जाना पड़ता है। करारी से अस्पताल की दूरी करीब 10 किमी है। आसपास के इलाके में भी कोई अच्छा नर्सिंग होम नहीं है। कुछ छोटे-छोटे क्लीनिक खुले हैं, जो सिर्फ सर्दी, बुखार की दवा देने तक सीमित हैं। महिलाओं को इलाज के लिए जिला अस्पताल तक जाना पड़ता है। अस्पताल दूर होने से गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है।
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पाल कॉलोनी, करारी, सिमरधा जैसे इलाकों में पीने का पानी भी नहीं है। पॉल कॉलोनी में करीब तीन साल पहले पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन, आज तक यह शुरू नहीं हुई। मोहल्ले के लोगों के लिए हैंडपंप ही सहारा है। गर्मियों में जलस्तर नीचे जाते ही यह काम करना बंद कर देते हैं।
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इसी तरह इस पूरी आबादी के लिए सिर्फ पोस्ट ऑफिस है। यह भी करीब दस किमी दूर सीपरी बाजार में है। पढ़ाई के लिए यहां तीन अलग-अलग प्राथमिक विद्यालय हैं लेकिन, इंटर कॉलेज नहीं है। हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पूरे इलाके में कोई उच्च शिक्षण संस्थान नहीं है।
साफ-सफाई को लेकर नगर निगम ने भी कोई इंतजाम नहीं किए। अधिकांश जगहों पर जल निकासी की नालियां कच्ची हैं। बूढ़ा एवं मैरी के कुछ हिस्से छोड़कर कहीं भी सफाईकर्मी नहीं आते। शहरी इलाकों में कूड़ा उठाने को सीधे घरों से कूड़ा उठवाया जा रहा है लेकिन, इस इलाके में इसका कोई अता-पता नहीं। बिजली की कटौती से भी लोग परेशान रहते हैं।
वर्ष 2002 में नगर निगम दायरे में शामिल हुई ग्राम सभाओं का ब्यौरा
ग्राम सभा ग्राम सभा का कुल क्षेत्रफल हेक्टेयर
बिजौली 246.896
हंसारी 25.103
गढियागांव 177.578
करारी 168.783
करगुवां 4.525
कोछाभांवर 36.043
भगवंतपुरा 74.473
पिछोर 25.874
सिमरधा 56.418
सिमराहा 12.147
लहरगिर्द 122.752
झांसी खास 86.903
तालपुरा भट्टागांव, खिरक पट्टी 11.47
सिगर्रा 32.184
मैरी 30.416
कुल 1111.542 हेक्टेयर
- पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है। पाइप लाइन बिछाई गई लेकिन, काफी समय बाद भी कनेक्शन नहीं हुआ। हैंडपंप ही सहारा है। गर्मियों में बिल्कुल पानी नहीं मिलता
शांति देवी
- आसपास कोई अस्पताल नहीं है। बीमार पड़ने पर करीब आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। महिलाओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है
अंजली
पीने के पानी की बहुत परेशानी है। कई बार शिकायत की गई लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हुई।
ऋतिक
आसपास कोई स्कूल नहीं है। हम लोगों को पढ़ने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। पास में स्कूल बनवाया जाना चाहिए
कुणाल
बिजली आने-जाने का कोई समय नहीं है। इससे काफी परेशानी होती है। बच्चों की भी पढ़ाई नहीं हो पाती है। शिकायत की जाती है तब भी कोई सुनवाई नहीं होती।
सुमन
नगर निगम सीमा मेें शामिल होने के बावजूद इन इलाकों में कोई भी सुविधा नहीं बढ़ी। स्ट्रीट लाइट खराब हो जाती है तब ठीक नहीं होती। शिकायतों के बाद भी काम नहीं होता।
रोहित सेंगर
करीब आठ किमी दूर थाना
इस पूरे इलाके की आबादी करीब चालीस हजार है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद कोई नया थाना कायम नहीं हुआ। पूरे इलाके का अधिकांश हिस्सा सीपरी बाजार थाने में आता है, जिसकी अधिकांश जगहों से दूरी करीब आठ किमी है। इसी तरह बूढ़ा, मैरी आदि इलाकों के रहने वालों को भी अपनी शिकायत लेकर करीब आठ किमी दूर सीपरी बाजार थाना जाना पड़ता है। इतनी दूर थाना होने की वजह से यहां की आबादी की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। पुलिस को भी अपराध की सूचना मिलने पर यहां तक पहुंचने में काफी समय लगता है।