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कोरोना में चला गया घर का मुखिया, कौन चुकाए होमलोन...153 परिवारों पर संकट
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झांसी। जिले में 153 परिवार ऐसे हैं, जिनके घर के मुखिया (कमाऊ सदस्य) की कोरोना महामारी के संक्रमण की चपेट में आने से मौत हो गई थी। लेकिन, अब इन परिवारों पर बेघर होने का भी खतरा मंडरा रहा है। घर बनाने के लिए बैंक से लिए गए कर्ज की अदायगी न होने की वजह से हालात ऐसे पैदा हो गए हैं। बैंकों की ओर से कर्ज वसूली की तैयारी शुरू कर दी गई है।
कोरोना वायरस के संक्रमण ने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं। परिजनों की मौत के अलावा तमाम परिवारों पर गंभीर आर्थिक संकट भी मंडरा रहा है। खासतौर पर उन परिवारों के हालात बेहद खराब हैं, जिनके कमाऊ सदस्य की मौत हो चुकी है। यहां तक कि अब इनमें से तमाम परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा भी मंडराने लगा है। बैंकों द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि होम लोन लेने वाले 315 व्यक्तियों की कोरोना काल में मौत हो चुकी है। इनमें से 192 लोग ऐसे थे, जिन्होंने बैंक से लिए गए कर्ज का इंश्योरेंस करा रखा था। ऐसे में इनके कर्ज की अदायगी तो इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कर दी जाएगी। लेकिन, सबसे बड़ा संकट 153 परिवारों के सामने खड़ा हुआ है, जिन्होंने होम लोन इंश्योरेंस नहीं कराया था और ये परिवार कर्ज की अदायगी भी नहीं कर पा रहे हैं। इन पर बैंकों की 30 करोड़ 60 लाख रुपये की रकम फंसी हुई है। कर्ज न लौटा पाने की स्थिति में बैंक इनकी संपत्ति को नीलाम करने तक की कार्यवाही अमल में ला सकते हैं। हालांकि, अभी तक बैंक शांत बैठे हुए थे, लेकिन अब उनकी ओर से वसूली की तैयारी शुरू कर दी गई है।
कोरोना काल में बैंकों के कर्जधारक कई लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में कर्ज की अदायगी नहीं की जा रही है। तमाम होम लोन के केस फंस गए हैं। परिजनों की माली हालत ऐसी नहीं है कि वे कर्ज की अदायगी कर पाएं। वसूली के लिए बैंक की ओर से नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
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- प्रभात शुक्ला, मंडल प्रमुख - पंजाब नेशनल बैंक
केस - 1
घर चलाना मुश्किल, घर कैसे बचाएंगे
झांसी। शिवाजी नगर निवासी प्राइवेट कंपनी में कार्यरत एक व्यक्ति ने तीन साल पहले बैंक से लोन लेकर घर बनाया था। 18 लाख के लोन में से वे महज सवा दो लाख रुपये की ही अदायगी कर पाए थे। इसी बीच जून माह में वे कोरोना की चपेट में आ गए। इलाज पर परिजनों ने छह-सात लाख रुपये खर्च किए। इसके लिए भी चार लाख रुपये पहचान वालों से उधार लिए, लेकिन जान नहीं बच पाई। अब परिवार के सामने जीवन-यापन का संकट बना हुआ है। ऐसे में होम लोन का कर्ज चुकाना तो दूर की बात है।
केस - 2
पति-पत्नी दोनों की मौत, बच्चों पर आया भार
झांसी। ललितपुर रोड निवासी एक व्यवसायी ने बैंक से चालीस लाख रुपये का लोन लेकर घर खरीदा था। इसके कुछ समय बाद ही कोरोना की पहली लहर आ गई, जिससे धंधा मंदा पड़ गया। बैंक की किस्तें चूक गईं। इससे पहले की कारोबार संभल पाता कारोबारी खुद कोरोना की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। इसके पंद्रह दिन बाद ही उसकी पत्नी भी चल बसी। किशोर आयु के बच्चों पर अचानक भार आ गया। व्यापार भी काफी घाटे में चला गया। ऐसे में होम लोन की अदायगी उनके लिए चुनौती बनी हुई है।
केस - 3
पत्नी और बेटी फंसी कर्ज के जंजाल में
झांसी। बड़ागांव गेट बाहर निवासी एक कारोबारी ने पांच साल पहले ही अपना घर बनाया था। इसके लिए बैंक से 23 लाख रुपये का कर्ज लिया था। जबकि, कारोबार के लिए भी उसने बैंक से आठ लाख रुपये की लिमिट बनवा रखी थी। होम लोन की आठ लाख रुपये की अदायगी के बाद 15 लाख का कर्ज अभी उसके सिर पर था। इसी दरम्यान कोरोना से मई माह उसकी मौत हो गई। इससे कारोबार भी ठप पड़ गया। परिवार में अब पत्नी और बेटी बची हैं, जिन पर बैंक लिमिट व होम लोन चुकाने की जिम्मेदारी आ गई है।
केस - 4
नए घर में कदम रखने से पहले हुई मौत
झांसी। पुराने शहर में रहने वाले एक व्यक्ति ने होम लोन लेकर बालाजी रोड पर मकान बनाया था। नए घर में शिफ्ट होने से पहले ही वो कोरोना की चपेट में आ गया। निजी अस्पताल में लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उसकी जान नहीं बच पाई। परिवार में अब वृद्ध पिता के अलावा पत्नी व दो छोटे बच्चे रह गए हैं। उनकी प्राथमिक बच्चों की पढ़ाई और जीवन यापन की है। ऐसे में होम लोन की अदायगी उनके लिए चुनौती बनी हुई है। कई महीनों से किस्तें अदा नहीं कर पाए हैं। यहां तक कि नए मकान में परिजनों ने अभी कदम तक नहीं रखा है।
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कोरोना वायरस के संक्रमण ने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं। परिजनों की मौत के अलावा तमाम परिवारों पर गंभीर आर्थिक संकट भी मंडरा रहा है। खासतौर पर उन परिवारों के हालात बेहद खराब हैं, जिनके कमाऊ सदस्य की मौत हो चुकी है। यहां तक कि अब इनमें से तमाम परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा भी मंडराने लगा है। बैंकों द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि होम लोन लेने वाले 315 व्यक्तियों की कोरोना काल में मौत हो चुकी है। इनमें से 192 लोग ऐसे थे, जिन्होंने बैंक से लिए गए कर्ज का इंश्योरेंस करा रखा था। ऐसे में इनके कर्ज की अदायगी तो इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कर दी जाएगी। लेकिन, सबसे बड़ा संकट 153 परिवारों के सामने खड़ा हुआ है, जिन्होंने होम लोन इंश्योरेंस नहीं कराया था और ये परिवार कर्ज की अदायगी भी नहीं कर पा रहे हैं। इन पर बैंकों की 30 करोड़ 60 लाख रुपये की रकम फंसी हुई है। कर्ज न लौटा पाने की स्थिति में बैंक इनकी संपत्ति को नीलाम करने तक की कार्यवाही अमल में ला सकते हैं। हालांकि, अभी तक बैंक शांत बैठे हुए थे, लेकिन अब उनकी ओर से वसूली की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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कोरोना काल में बैंकों के कर्जधारक कई लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में कर्ज की अदायगी नहीं की जा रही है। तमाम होम लोन के केस फंस गए हैं। परिजनों की माली हालत ऐसी नहीं है कि वे कर्ज की अदायगी कर पाएं। वसूली के लिए बैंक की ओर से नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।
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- प्रभात शुक्ला, मंडल प्रमुख - पंजाब नेशनल बैंक
केस - 1
घर चलाना मुश्किल, घर कैसे बचाएंगे
झांसी। शिवाजी नगर निवासी प्राइवेट कंपनी में कार्यरत एक व्यक्ति ने तीन साल पहले बैंक से लोन लेकर घर बनाया था। 18 लाख के लोन में से वे महज सवा दो लाख रुपये की ही अदायगी कर पाए थे। इसी बीच जून माह में वे कोरोना की चपेट में आ गए। इलाज पर परिजनों ने छह-सात लाख रुपये खर्च किए। इसके लिए भी चार लाख रुपये पहचान वालों से उधार लिए, लेकिन जान नहीं बच पाई। अब परिवार के सामने जीवन-यापन का संकट बना हुआ है। ऐसे में होम लोन का कर्ज चुकाना तो दूर की बात है।
केस - 2
पति-पत्नी दोनों की मौत, बच्चों पर आया भार
झांसी। ललितपुर रोड निवासी एक व्यवसायी ने बैंक से चालीस लाख रुपये का लोन लेकर घर खरीदा था। इसके कुछ समय बाद ही कोरोना की पहली लहर आ गई, जिससे धंधा मंदा पड़ गया। बैंक की किस्तें चूक गईं। इससे पहले की कारोबार संभल पाता कारोबारी खुद कोरोना की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। इसके पंद्रह दिन बाद ही उसकी पत्नी भी चल बसी। किशोर आयु के बच्चों पर अचानक भार आ गया। व्यापार भी काफी घाटे में चला गया। ऐसे में होम लोन की अदायगी उनके लिए चुनौती बनी हुई है।
केस - 3
पत्नी और बेटी फंसी कर्ज के जंजाल में
झांसी। बड़ागांव गेट बाहर निवासी एक कारोबारी ने पांच साल पहले ही अपना घर बनाया था। इसके लिए बैंक से 23 लाख रुपये का कर्ज लिया था। जबकि, कारोबार के लिए भी उसने बैंक से आठ लाख रुपये की लिमिट बनवा रखी थी। होम लोन की आठ लाख रुपये की अदायगी के बाद 15 लाख का कर्ज अभी उसके सिर पर था। इसी दरम्यान कोरोना से मई माह उसकी मौत हो गई। इससे कारोबार भी ठप पड़ गया। परिवार में अब पत्नी और बेटी बची हैं, जिन पर बैंक लिमिट व होम लोन चुकाने की जिम्मेदारी आ गई है।
केस - 4
नए घर में कदम रखने से पहले हुई मौत
झांसी। पुराने शहर में रहने वाले एक व्यक्ति ने होम लोन लेकर बालाजी रोड पर मकान बनाया था। नए घर में शिफ्ट होने से पहले ही वो कोरोना की चपेट में आ गया। निजी अस्पताल में लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उसकी जान नहीं बच पाई। परिवार में अब वृद्ध पिता के अलावा पत्नी व दो छोटे बच्चे रह गए हैं। उनकी प्राथमिक बच्चों की पढ़ाई और जीवन यापन की है। ऐसे में होम लोन की अदायगी उनके लिए चुनौती बनी हुई है। कई महीनों से किस्तें अदा नहीं कर पाए हैं। यहां तक कि नए मकान में परिजनों ने अभी कदम तक नहीं रखा है।