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Jhansi News: चौथे ओवर की चौथी गेंद....जिंदगी की पिच से आउट हुआ युवक

Thu, 06 Nov 2025 01:46 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 06 Nov 2025 01:46 AM IST
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The fourth ball of the fourth over...the young man was out on the pitch of life.

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। जीआईसी ग्राउंड में बुधवार सुबह करीब नौ बजे क्रिकेट मैच में चौथे ओवर की चौथी गेंद फेंकते समय युवक को तेज घबराहट हुई। जब तक वह कुछ बोल पाता, लड़खड़ा कर गिर पड़ा। साथी युवकों ने उसे मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। चिकित्सक इसे हार्ट अटैक मान रहे हैं। फिर भी इसकी पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम कराने के बाद मृतक का दिल फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।



सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के नालबंद डेरी निवासी स्वामी प्रसाद अहिरवार के करीब 30 वर्षीय बेटे रविंद्र कुमार अहिरवार एलआईसी में विकास अधिकारी थे। वह क्रिकेट खेलने के शौकीन थे। इसके चलते अक्सर छुट्टी के दिन क्रिकेट मैच खेलते थे। सुबह साढ़े सात बजे से वह जीआईसी मैदान में क्रिकेट मैच खेलने गए। मैच खेल रहे साथी खिलाड़ी अभिषेक ने बताया कि रविंद्र बल्लेबाजी कर चुका था। जब दूसरी टीम बल्लेबाजी कर रही थी, तब रविंद्र अपने चौथे ओवर की चौथी गेंद फेंकने के लिए दौड़ा, तभी घबराहट होने पर रुका और गेंद जमीन पर ही पटक दी। उसने तुरंत एक घूंट पानी पीया और वहीं गिर गया।
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दौड़कर उसके साथी नजदीक पहुंचे मगर उसके शरीर में किसी प्रकार की क्रिया-प्रतिक्रिया नहीं थी। उसे तुरंत एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सिपरी बाजार थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी तरह की चोट, विषाक्त खाने-पीने की पुष्टि नहीं हुई है।
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तीन दिन पहले ही लड़की देखने गए थे परिजन

झांसी। परिजन रविंद्र की जल्द शादी करने की तैयारी कर रहे थे क्योंकि आए दिन रिश्ते आ रहे थे। तीन दिन पहले परिजन उसकी शादी के लिए लड़की को देखने के लिए गए थे। लड़की परिजनों को पसंद आई थी और रिश्ता पक्का करने की तैयारी चल रही थी।



0- पिता को देख मुस्कराया, हाथ हिलाया और निकल गया रविंद्र

झांसी। रविंद्र की मौत से घरवालों का रो-रोककर बुरा हाल है। पिता ने रोते हुए बताया कि रविंद्र सुबह जब घर से निकल रहा था, तब उसे देखते हुए मुस्कराया। हाथ उठाकर हिलाया और निकल गया। करीब डेढ़ घंटे बाद पता चला कि उसकी मौत हो गई है।



पिता स्वामी प्रसाद अहिरवार ने बताया कि बुधवार सुबह जागने के बाद घर से जाने तक रविंद्र का व्यवहार काफी बदला-बदला था। जिसे याद करके दिल फटा जा रहा है। उन्होंने बताया कि सुबह सात बजे वह जागकर बाहर आया तो उनसे जल्दी जागने की वजह पूछी। उसकी बात सुनकर रविंद्र ने कोई जवाब नहीं दिया मगर तेजी से मुस्कुराया। कुछ समय बाद बोला, मुझे आपके साथ चाय पीनी है। दोनों ने बैठकर चाय पी। इस दौरान वह बात कर रहा था मगर बीच-बीच में मंद-मंद मुस्करा रहा था। चाय पीने के बाद उसने कपड़े पहने और घर से जाते समय फिर मुस्कुराया और हाथ हिलाते हुए निकल गया। वह भी काम करने के लिए चले गए। करीब डेढ़ घंटे बाद पता चला कि रविंद्र की तबीयत बिगड़ गई है। जब वह मेडिकल कॉलेज आए तो उसकी मौत होने का पता चला।

हर माह हार्ट अटैक के औसतन 65 से 70 युवा हो रहे भर्ती

झांसी। अत्यधिक तनाव, स्क्रीन की वजह से नींद पूरी नहीं करने, फास्ट फूड, वसायुक्त खान-पान, खेलकूद न करने की वजह से अब युवा भी हृदय रोगी हो रहे हैं। न सिर्फ मेडिकल कॉलेज बल्कि निजी नर्सिंगहोम में हर माह औसतन हार्ट अटैक के 65 से 70 युवा भर्ती हो रहे हैं, जिनकी एंजियोप्लास्टी की जाती है।



मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में एक अगस्त से 31 अक्तूबर तक 285 हार्ट अटैक के रोगी आए, जिनमें 40 वर्ष के कम आयु के 95 से ज्यादा रोगी रहे। हृदय रोग विशेषज्ञों ने बताया कि कोरोना के बाद से हृदय रोगियों की संख्या में डेढ़ गुना तक वृद्धि हुई है, जिनमें युवा भी शामिल हैं। युवाओं के दिल के रोगी होने की वजह आउटडोर गतिविधियां अथवा खेलकूद एकदम कम होना है।

वह बताते हैं कि पहले घर का सामान खरीदने के लिए लोग पैदल बाजार जाते थे मगर अब ऑनलाइन मंगाते हैं या फिर वाहन पर सवार होकर जाते हैं। यही नहीं, एक ही जगह पर घंटों स्क्रीन पर बिताते हैं। देर तक तक मोबाइल देखते हैं, इसकी वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है।



मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार, तीन माह के अंदर इमरजेंसी में हार्ट अटैक के 285 रोगी आ चुके हैं। इनमें युवाओं की संख्या 95 से ज्यादा है। वहीं, हृदय रोग की ओपीडी में रोजाना 30 से 35 युवा उपचार के लिए आते हैं। वहीं, निजी नर्सिंगहोम में हर माह औसतन 50 युवा हृदय रोगी आते हैं, जिनकी एंजियोप्लास्टी की जाती है।

0- ये कहना है विशेषज्ञों का

तनाव, भागमभाग और वसायुक्त खान-पान की वजह से युवा भी दिल के रोगी हो रहे हैं। हर माह औसतन 50 युवाओं की एंजियोप्लास्टी करनी पड़ रही है। - डॉ. निर्देश जैन, हृदय रोग विशेषज्ञ




खेलकूद के बजाय मोबाइल पर घंटों समय बिताने, तनाव और नशा की लत की वजह से युवा हृदय रोगी हो रहे हैं। इमरजेंसी ही नहीं, ओपीडी में भी हृदय रोगी काफी बढ़े हैं। - डाॅ. आलोक शर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ
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