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तीन दिन तक मुर्दे का इलाज करते रहे मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर!
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल में तीन दिन तक मुर्दे का इलाज किया जाता रहा। बृहस्पतिवार को परिजन जब शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पहुंचे तो कागजों में ब्रॉड डेड (मृत आया) लिखा हुआ था। वहीं, प्राचार्य ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उनका कहना है कि दस्तावेजों में लिखा-पढ़ी में गलती हुई है। फिर भी कार्रवाई करेंगे।
करैरा निवासी रोहित यादव ( 17) को सांप ने डस लिया था। हालत बिगड़ने पर 1 अगस्त को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। चाचा रामराजा यादव ने बताया कि तीन दिनों तक उसका मेडिकल कॉलेज में इलाज चला। बृहस्पतिवार तड़के उसने पीने के लिए पानी भी मांगा। जब डॉक्टर से पानी देने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सुबह देना। इसके कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। फिर डॉक्टरों ने लिखा-पढ़ी करने के बाद कहा कि उसे घर ले जाओ। मगर हमने पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया। जब मोर्चरी पहुंचे और कागजात दिखाए तो उसमें अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ही ब्रॉड डेड लिखा हुआ था। ये देखकर परिजनों के भी होश उड़ गए और वो हैरत में पड़ गए। मामले की सूचना मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों तक पहुंची। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि अस्पताल में इतने वरिष्ठ और कनिष्ठ चिकित्सक और स्टाफ रहता है कि ऐसी लापरवाही नहीं हो सकती है। सर्पदंश के बाद किशोर का तीन दिन तक इलाज चला है। दस्तावेजों में गलती से ब्रॉड डेड लिख गया है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जिसकी भी गलती होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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करैरा निवासी रोहित यादव ( 17) को सांप ने डस लिया था। हालत बिगड़ने पर 1 अगस्त को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती किया गया। चाचा रामराजा यादव ने बताया कि तीन दिनों तक उसका मेडिकल कॉलेज में इलाज चला। बृहस्पतिवार तड़के उसने पीने के लिए पानी भी मांगा। जब डॉक्टर से पानी देने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सुबह देना। इसके कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। फिर डॉक्टरों ने लिखा-पढ़ी करने के बाद कहा कि उसे घर ले जाओ। मगर हमने पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया। जब मोर्चरी पहुंचे और कागजात दिखाए तो उसमें अस्पताल में भर्ती होने के दौरान ही ब्रॉड डेड लिखा हुआ था। ये देखकर परिजनों के भी होश उड़ गए और वो हैरत में पड़ गए। मामले की सूचना मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों तक पहुंची। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि अस्पताल में इतने वरिष्ठ और कनिष्ठ चिकित्सक और स्टाफ रहता है कि ऐसी लापरवाही नहीं हो सकती है। सर्पदंश के बाद किशोर का तीन दिन तक इलाज चला है। दस्तावेजों में गलती से ब्रॉड डेड लिख गया है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जिसकी भी गलती होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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