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Jhansi News: रेलकर्मी की मौत के मामले में तत्कालीन त्वचा रोग विशेषज्ञ व नर्सिंग होम संचालक की लापरवाही
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24 साल पहले हुई थी मौत, उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने दिया 8,94,000 रुपये अदा करने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रेलवे वर्कशॉप के हेड टाइमकीपर की 24 साल पहले हुई मौत के मामले में उपभोक्ता संरक्षण प्रतितोष आयोग ने मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. डीसी गोबिल व नर्सिंग होम संचालक को करीब नौ लाख रुपये क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया है। इस मामले में एक चिकित्सक की मौत के कारण उसे कार्रवाई से अलग कर दिया। चूंकि नर्सिंग होम का बीमा द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने कर रखा था लिहाजा राशि का आधा-आधा हिस्सा डॉ. गोबिल व बीमा कंपनी वहन करेंगे।
परिवाद के मुताबिक रेलवे वर्कशॉप के हेड टाइमकीपर ओमप्रकाश सिंह (44) की मई 2001 में तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें सिरदर्द की शिकायत हुई तो इलाहाबाद बैंक चौराहे के पास रहने वाले डॉ. गणेशदत्त शुक्ला को दिखाया गया। डॉ. शुक्ला के दवा देने के बाद ओमप्रकाश की हालत और खराब हो गई। घबराहट के साथ उनके शरीर पर लाल दाने निकल आए थे। इसके चलते पहले उन्हें रेलवे हॉस्पिटल में दिखाया गया। यहां से उन्हें मुंबई रेफर किया गया लेकिन वहां से वापस झांसी भेज दिया गया। यहां उनको मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन लेक्चरर व त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. डीसी गोबिल को दिखाया गया। उनके पर्चे पर मरीज ओमप्रकाश को मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित डॉ. आरके अग्रवाल द्वारा संचालित मेवा चौधरी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें ज्यादा दवाइयां दी गईं। साथ ही डॉ. गोबिल की सलाह पर ह्यूमन प्लाज्मा चढ़ाने को कहा गया। जून 2001 को उन्हें प्लाज्मा दिया गया। प्लाज्मा बिना विशेषज्ञ की सलाह के कंपाउंडर ने केवल 15 मिनट में ही चढ़ा दिया। नतीजा यह हुआ कि ढाई घंटे में मरीज का हार्ट फेल हो गया और उनकी मौत हो गई थी।
मांगा था 18 लाख रुपये मुआवजा
परिजनों ने डॉक्टरों की लापरवाही व मृतक की उम्र 44 साल मानते हुए उपभोक्ता संरक्षण आयोग में दायर परिवाद में मांग की थी कि अगर वे नौकरी कर रहे होते तो 60 साल की उम्र तक वेतन भत्तों के रूप में 16 लाख रुपये अर्जित कर लेते। इसलिए 18,98,000 रुपये क्षतिपूर्ति राशि दी जाए लेकिन आयोग ने दस्तावेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर 8,94,000 रुपये ही देने का आदेश दिया।
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2010 में खारिज किया जा चुका है मामला
मृतक ओमप्रकाश के बेटे देवेंद्र सिंह व राजेंद्र सिंह और बेटी अनीता सिंह व साधना सिंह के परिवाद पर यह मामला 15 साल पहले भी जिला उपभोक्ता फोरम में विचारण के लिए आया था लेकिन 2011 में इसे निरस्त कर दिया गया था। बाद में मृतक के परिजनों ने उप्र राज्य उपभोक्ता फोरम में अपील दायर की थी। राज्य फोरम ने सुनवाई के बाद दो साल पहले आदेश दिया था कि इस मामले की जिला उपभोक्ता फोरम फिर से सुनवाई करे। जिला उपभोक्ता संरक्षण प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अमरपाल सिंह व सदस्यगण देवेश कुमार अग्निहोत्री और ज्योति प्रभा जैन ने फिर से सुनवाई की। सोमवार को निर्णय पारित करते हुए मृतक ओमप्रकाश सिंह के परिजनों को 2024 से वास्तविक भुगतान के दिन तक छह फीसदी ब्याज के साथ 8,94,832 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अदा करने का आदेश दिया। अगर इस दौरान राशि जमा नहींं की गई तो इस पर नौ फीसदी ब्याज देना होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रेलवे वर्कशॉप के हेड टाइमकीपर की 24 साल पहले हुई मौत के मामले में उपभोक्ता संरक्षण प्रतितोष आयोग ने मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. डीसी गोबिल व नर्सिंग होम संचालक को करीब नौ लाख रुपये क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश दिया है। इस मामले में एक चिकित्सक की मौत के कारण उसे कार्रवाई से अलग कर दिया। चूंकि नर्सिंग होम का बीमा द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने कर रखा था लिहाजा राशि का आधा-आधा हिस्सा डॉ. गोबिल व बीमा कंपनी वहन करेंगे।
परिवाद के मुताबिक रेलवे वर्कशॉप के हेड टाइमकीपर ओमप्रकाश सिंह (44) की मई 2001 में तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें सिरदर्द की शिकायत हुई तो इलाहाबाद बैंक चौराहे के पास रहने वाले डॉ. गणेशदत्त शुक्ला को दिखाया गया। डॉ. शुक्ला के दवा देने के बाद ओमप्रकाश की हालत और खराब हो गई। घबराहट के साथ उनके शरीर पर लाल दाने निकल आए थे। इसके चलते पहले उन्हें रेलवे हॉस्पिटल में दिखाया गया। यहां से उन्हें मुंबई रेफर किया गया लेकिन वहां से वापस झांसी भेज दिया गया। यहां उनको मेडिकल कॉलेज के तत्कालीन लेक्चरर व त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. डीसी गोबिल को दिखाया गया। उनके पर्चे पर मरीज ओमप्रकाश को मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित डॉ. आरके अग्रवाल द्वारा संचालित मेवा चौधरी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें ज्यादा दवाइयां दी गईं। साथ ही डॉ. गोबिल की सलाह पर ह्यूमन प्लाज्मा चढ़ाने को कहा गया। जून 2001 को उन्हें प्लाज्मा दिया गया। प्लाज्मा बिना विशेषज्ञ की सलाह के कंपाउंडर ने केवल 15 मिनट में ही चढ़ा दिया। नतीजा यह हुआ कि ढाई घंटे में मरीज का हार्ट फेल हो गया और उनकी मौत हो गई थी।
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मांगा था 18 लाख रुपये मुआवजा
परिजनों ने डॉक्टरों की लापरवाही व मृतक की उम्र 44 साल मानते हुए उपभोक्ता संरक्षण आयोग में दायर परिवाद में मांग की थी कि अगर वे नौकरी कर रहे होते तो 60 साल की उम्र तक वेतन भत्तों के रूप में 16 लाख रुपये अर्जित कर लेते। इसलिए 18,98,000 रुपये क्षतिपूर्ति राशि दी जाए लेकिन आयोग ने दस्तावेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर 8,94,000 रुपये ही देने का आदेश दिया।
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2010 में खारिज किया जा चुका है मामला
मृतक ओमप्रकाश के बेटे देवेंद्र सिंह व राजेंद्र सिंह और बेटी अनीता सिंह व साधना सिंह के परिवाद पर यह मामला 15 साल पहले भी जिला उपभोक्ता फोरम में विचारण के लिए आया था लेकिन 2011 में इसे निरस्त कर दिया गया था। बाद में मृतक के परिजनों ने उप्र राज्य उपभोक्ता फोरम में अपील दायर की थी। राज्य फोरम ने सुनवाई के बाद दो साल पहले आदेश दिया था कि इस मामले की जिला उपभोक्ता फोरम फिर से सुनवाई करे। जिला उपभोक्ता संरक्षण प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष अमरपाल सिंह व सदस्यगण देवेश कुमार अग्निहोत्री और ज्योति प्रभा जैन ने फिर से सुनवाई की। सोमवार को निर्णय पारित करते हुए मृतक ओमप्रकाश सिंह के परिजनों को 2024 से वास्तविक भुगतान के दिन तक छह फीसदी ब्याज के साथ 8,94,832 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अदा करने का आदेश दिया। अगर इस दौरान राशि जमा नहींं की गई तो इस पर नौ फीसदी ब्याज देना होगा।