Schizophrenia Day: 'बेटी पिशाच का रूप है मार दो', भूत-प्रेत का साया नहीं सिजोफ्रेनिया का शिकार होते हैं ऐसे लोग
डॉ. शिकाफा ने बताया कि एक तिहाई मरीज दवाओं से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। बाकी रोगियों की बीमारी दवाओं से नियंत्रित रहती है। बताया कि ये आनुवंशिक बीमारी है। 10 से 15 प्रतिशत मरीजों में किसी के परिजनों को ये बीमारी पहले हो चुकी होती है। जरूरत पड़ने पर रोगियों को विशेष थेरेपी दी जाती है।
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झांसी की रहने वाली एक महिला अपने तीन साल के मासूम बच्चे का कत्ल कर देती है। करीब एक महीने पहले ही उसे कोर्ट द्वारा उसे सजा सुनाई गई है। वहीं, मनोचिकित्सक जब महिला का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं, तो पता चलता है कि वह सिजोफ्रेनिया की मरीज है। उसने डॉक्टर को बताया कि कोई बाबा कान में आकर बोलते थे कि बेटी पिशाच का रूप है। इसलिए मार डाला। ये तो सिर्फ एक उदाहरण हैं। झांसी में कई मरीज परिजनों के साथ आए दिन हिंसक व्यवहार कर रहे हैं।
जिला अस्पताल में हर साल सिजोफ्रेनिया के चार हजार मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि सोमवार को ही उन्होंने सिजोफ्रेनिया के 21 मरीज देखे। हालांकि, औसतन 10-11 मरीज इस बीमारी के ओपीडी में आते रहते हैं। यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर बीमारी है। इसका असर व्यक्ति के व्यवहार और भावनाओं पर पड़ता है। 15 से 25 साल की आयु में बीमारी की शुरूआत होती है। मरीज अपने मन के भाव चेहरे पर प्रकट नहीं कर पाते हैं। कोई मरीज आकर कहता है कि परिजन उसे जहर देकर मारने की कोशिश में हैं। कोई सड़क पर हंसते लोगों को देखता है तो मरीज को लगता है कि वो उसे देखकर मुस्कुरा रहे हैं। इस पर वह लोगों से लड़ने लगता है। वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. अर्जित गौरव ने बताया कि किसी मरीज को आवाजें उनकी प्रशंसा करने वाली सुनाई देती हैं तो किसी को आलोचना करने वाली। निंदा करने वाली आवाजों से मरीज बहुत परेशान हो जाता है।
ऐसे हो जाते मरीज
- अकेले रहने लगते
- किसी से बात नहीं करते
- दिनचर्या बदल जाती, कई दिन नहीं नहाते
- भाव शून्य हो जाते
- किसी से संबंध नहीं रखते
परिजन इन बातों का रखें ध्यान
- परिजन जबरन बात मनवाने का प्रयास न करें
- मरीज आक्रामक हो रहा तो ध्यान भटकाएं
- लग रहा हमला कर देगा तो मौके से हट जाएं
- भूत-प्रेत का चक्कर समझ झाड़-फूंक न कराएं
सीपरी की 70 साल की वृद्धा को हमेशा लगता है कि उसका बेटा जान से मार देगा। फिर एक दिन वो सिर में पट्टी बांधते हुए जिला अस्पताल के डॉक्टर के पास पहुंची। उसने कहा कि बेटे ने मारपीट कर दी है। बहुत तेज दर्द हो रहा है। मगर उसके सिर पर कोई चोट का निशान नहीं था। फिर मनोचिकित्सक के पास भेजकर वृद्धा का इलाज शुरू कराया गया।
महोबा के रहने वाले एक मरीज का इलाज कराने के लिए परिजन जिला अस्पताल लेकर आए। परिजनों ने डॉक्टरों को बताया कि निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इसके बाद रोगी को लगने लगा कि सभी विरोधी मिलकर उसकी हत्या करवा देंगे। घरों में कई सीसीटीवी कैमरे लगवाए लिए। हर समय परिजनों से बोलता रहता कि कोई गेट पर मारने आ गया है।
शहर एक युवती अपने कमरे में बैठकर धीमी आवाज में कुछ बोलते हुए घड़ी की तरफ इशारा कर रही थी। फिर बोली घड़ी सीधी नहीं है। इधर करो, उधर करो। उस कमरे में कोई नहीं था। जब पिता ने उसकी इस हरकतों को देखा तो उन्हें शक हुआ। मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। तब डॉक्टर को बताया एक महिला तो हमेशा उससे बातें करने के लिए आ जाती है।