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रावण का किरदार ऐसा भाया बनवा दी लंका मीनार, होती है पूजा
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झांसी। बुंदेलखंड में रामलीला और उसके चरित्रों को लेकर हमेशा ही विशेष आकर्षण रहा है। कालपी के मथुरा प्रसाद निगम, जिन्हें लोग लंकेश भी कहते थे को रावण का चरित्र ऐसा भाया कि उन्होंने लंकापति के सम्मान में लगभग 225 फ ीट ऊंची लंका की मीनार ही बनवा दी। इस मीनार में रावण का कुनबा चित्रित है। रावण और कुंभकरण की विशाल प्रतिमाएं भी हैं। बताया जाता है कि मथुरा प्रसादजी ने करीब 50 वर्ष रामलीला में रावण का किरदार अदा किया।
कई खूबियों से परिपूर्ण बुंदेलखंड का कालपी नगर ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत संभाले हुए हैं। यहां की रामलीला भी डेढ़ शताब्दी वर्ष से भी पुरानी है। मथुरा प्रसाद जी के वंशज डॉ. विवेक निगम बताते हैं कि उनके परदादा शरीर से काफ ी लंब,े चौड़े थे। रावण का किरदार पूरी तन्मयता से निभाते थे। इससे उन्हें लंका मीनार बनाने की प्रेरणा मिली। जो 1875 में बनकर तैयार हुई। आज यह मीनार सैलानियों एवं स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। उनके अनुसार पर्यटन विभाग की ओर से विकास कार्य के लिए प्रोजेक्ट तैयार हो चुका है। इधर, लुढकेश्वर बाल समाज रामलीला के सदस्य राम सुंदर तिवारी बताते हैं कि यहां रावण का दहन नहीं होता है। बल्कि पूूूूजा की जाती है।
भगवान शिव के दर्शन करते रहते हैं रावण
225 फ ीट लंबी मीनार की कई खूबियां है। जानकारी के अनुसार इसके निर्माण में सीप, उड़द की दाल, शंख, कौड़ी आदि का उपयोग किया गया था। सात मंजिला इस मीनार में 7 चक्कर के रूप में 173 घुमावदार सीढ़ियां हैं। मीनार के चारों ओर लंका कांड के चित्र बने हुए हैं। इसके अलावा भगवान विष्णु के अवतारों, ग्रहों, नक्षत्रों आदि का भी अंकन है। मीनार में सवा सौ फ ीट ऊंची रावण की प्रतिमा है। साथ ही कुंभकरण, विभीषण की भी प्रतिमाएं हैं। रावण की प्रतिमा के सामने ही भगवान शिव का भी मंदिर है। ताकि दशानन अपने आराध्य को सदैव देख सके। इसके अलावा चित्रगुप्त भगवान का भी मंदिर है। मीनार की चारदीवारी पर नाग नागिन का जोड़ा बना हुआ है। बताया जाता है कि इस संपूर्ण निर्माण में एक लाख 75 हजार का खर्च मथुरा प्रसाद जी का हुआ था।
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भाई बहन का एक साथ मीनार में चढ़ना है मना
लंका मीनार में भाई-बहन का एक साथ जाना वर्जित है। क्योंकि मीनार की पूरी चढ़ाई करने पर सात फेरे जैसे हो जाते हैं। ऐसे में इस पर रोक है।
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कई खूबियों से परिपूर्ण बुंदेलखंड का कालपी नगर ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत संभाले हुए हैं। यहां की रामलीला भी डेढ़ शताब्दी वर्ष से भी पुरानी है। मथुरा प्रसाद जी के वंशज डॉ. विवेक निगम बताते हैं कि उनके परदादा शरीर से काफ ी लंब,े चौड़े थे। रावण का किरदार पूरी तन्मयता से निभाते थे। इससे उन्हें लंका मीनार बनाने की प्रेरणा मिली। जो 1875 में बनकर तैयार हुई। आज यह मीनार सैलानियों एवं स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। उनके अनुसार पर्यटन विभाग की ओर से विकास कार्य के लिए प्रोजेक्ट तैयार हो चुका है। इधर, लुढकेश्वर बाल समाज रामलीला के सदस्य राम सुंदर तिवारी बताते हैं कि यहां रावण का दहन नहीं होता है। बल्कि पूूूूजा की जाती है।
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225 फ ीट लंबी मीनार की कई खूबियां है। जानकारी के अनुसार इसके निर्माण में सीप, उड़द की दाल, शंख, कौड़ी आदि का उपयोग किया गया था। सात मंजिला इस मीनार में 7 चक्कर के रूप में 173 घुमावदार सीढ़ियां हैं। मीनार के चारों ओर लंका कांड के चित्र बने हुए हैं। इसके अलावा भगवान विष्णु के अवतारों, ग्रहों, नक्षत्रों आदि का भी अंकन है। मीनार में सवा सौ फ ीट ऊंची रावण की प्रतिमा है। साथ ही कुंभकरण, विभीषण की भी प्रतिमाएं हैं। रावण की प्रतिमा के सामने ही भगवान शिव का भी मंदिर है। ताकि दशानन अपने आराध्य को सदैव देख सके। इसके अलावा चित्रगुप्त भगवान का भी मंदिर है। मीनार की चारदीवारी पर नाग नागिन का जोड़ा बना हुआ है। बताया जाता है कि इस संपूर्ण निर्माण में एक लाख 75 हजार का खर्च मथुरा प्रसाद जी का हुआ था।
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लंका मीनार में भाई-बहन का एक साथ जाना वर्जित है। क्योंकि मीनार की पूरी चढ़ाई करने पर सात फेरे जैसे हो जाते हैं। ऐसे में इस पर रोक है।