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सत्ताधारी दल के नेता का घूमा फोन, बदल गईं टेंडर की शर्तें!
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tender condition will change in one politician call
झांसी। नगर निगम में सत्ता के प्रभाव में माननीय अधिकारियों पर खूब दवाब बना रहे हैं। महानगर में सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता के निजी सचिव के फोन पर एक टेंडर की शर्तें बदल गईं। इसे लेकर शुक्रवार को नगर निगम में चर्चा का आलम रहा। पूरे मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम ने 17 अगस्त को हाईमास्ट लाइटों की खरीद के लिए जैम पोर्टल पर निविदा अपलोड कराई थी। इसमें तमाम नियम और शर्तें लागू की गईं। 27 अगस्त को निविदा खोली जानी थी। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार निविदा को निगम अधिकारियों ने छह घंटे पहले निरस्त कर दिया। बताया जाता है कि निविदा को लेकर सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता के निजी सचिव ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को फोन किए। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो फोन के जरिए अधिकारियों पर निविदा निरस्त करने और शर्तों में बदलाव करने का दवाब बनाया गया। इसके बाद निविदा की दो शर्तों में बदलाव किया गया। सूत्र बताते हैं कि निविदा में पहले कार्यदायी संस्था का अनुभव तीन वर्ष का था, जिसे सात वर्ष कर दिया गया। इसके साथ ही पहले जैम पोर्टल पर पूरे देश की कार्यदायी संस्थाओं से आवेदन मांगे गए थे, जिसे बदलकर प्रदेश तक सीमित कर दिया गया। बताया जाता है कि सता दल के नेता के निजी सचिव किसी चहेते को लाभ दिलाना चाहते हैं, जिसके चलते निविदा की तिथि को खोलने से पहले ही चार सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। ऐसे में अधिकारियों की कारगुजारी सवालों के घेरे में आ गई है।
एक ठेकेदार ने सौंपा था ज्ञापन
निविदा को बदलने के लिए पहले से तैयारी की जा चुकी थी। एक ठेकेदार ने 24 अगस्त को ज्ञापन सौंपकर निविदा की शर्तों में सरलीकरण की मांग की थी। जिसमें ठेकेदार ने इन्हीं शर्तों में बदलाव का जिक्र किया था। मामले में निगम के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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नगर निगम ने 17 अगस्त को हाईमास्ट लाइटों की खरीद के लिए जैम पोर्टल पर निविदा अपलोड कराई थी। इसमें तमाम नियम और शर्तें लागू की गईं। 27 अगस्त को निविदा खोली जानी थी। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार निविदा को निगम अधिकारियों ने छह घंटे पहले निरस्त कर दिया। बताया जाता है कि निविदा को लेकर सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता के निजी सचिव ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को फोन किए। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो फोन के जरिए अधिकारियों पर निविदा निरस्त करने और शर्तों में बदलाव करने का दवाब बनाया गया। इसके बाद निविदा की दो शर्तों में बदलाव किया गया। सूत्र बताते हैं कि निविदा में पहले कार्यदायी संस्था का अनुभव तीन वर्ष का था, जिसे सात वर्ष कर दिया गया। इसके साथ ही पहले जैम पोर्टल पर पूरे देश की कार्यदायी संस्थाओं से आवेदन मांगे गए थे, जिसे बदलकर प्रदेश तक सीमित कर दिया गया। बताया जाता है कि सता दल के नेता के निजी सचिव किसी चहेते को लाभ दिलाना चाहते हैं, जिसके चलते निविदा की तिथि को खोलने से पहले ही चार सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया है। ऐसे में अधिकारियों की कारगुजारी सवालों के घेरे में आ गई है।
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एक ठेकेदार ने सौंपा था ज्ञापन
निविदा को बदलने के लिए पहले से तैयारी की जा चुकी थी। एक ठेकेदार ने 24 अगस्त को ज्ञापन सौंपकर निविदा की शर्तों में सरलीकरण की मांग की थी। जिसमें ठेकेदार ने इन्हीं शर्तों में बदलाव का जिक्र किया था। मामले में निगम के अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
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