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टारगेट पर रहा रेलवे ट्रैक

Thu, 01 Dec 2016 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 01 Dec 2016 01:40 AM IST
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 Target is on track
train, jhansi news - फोटो : demo
पुखरायां व मलासा स्टेशनों के बीच इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटनास्थल की जांच के लिए बुधवार को मुख्य संरक्षा आयुक्त (पूर्वी परिमंडल) पीके आचार्य तीसरी बार पहुंचे। इस बार जांच ट्रैक (पटरियों) पर केंद्रित रही। जांच की गोपनीयता के लिए उन्होंने अपने साथ सिर्फ पांच अफसरों को ही रखा। उनके साथ वे ट्रैक का निरीक्षण कर संबंधित बिंदुओं पर चर्चा करते रहे। उन्होंने ट्राली पर बैठकर कई जगह ट्रैक की क्षमता परखी।
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बुधवार को दुर्घटनास्थल की
जांच में गोपनीयता का विशेष ध्यान रखते हुए मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने अपने साथ मुख्य अभियंता प्राचार्य आलोक रंजन, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर जीसी बुधलाकोटी व निगरानी कमेटी के सदस्य वरिष्ठ मंडल अभियंता (सेंट्रल) अनुराग यादव, प्राचार्य सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर झांसी करुणेश श्रीवास्तव व उप मुख्य संरक्षा अधिकारी आरके यादव को ही रखा। बाकी अफसर दूर कैंपों में बैठे रहे। दोपहर बारह बजे उन्होंने जांच शुरू की, जो देर शाम तक चलती रही। जांच पूरी तरह ट्रैक पर केंद्रित रही।
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उन्होंने दुर्घटनास्थल के दोनों तरफ काफी दूर तक पटरियों को देखा। स्लीपर (पटरियों के बीच डलने वाले सीमेंट के खंभे) चेक किए और ट्राली पर बैठकर पटरियों पर जर्क व लर्ज (हल्के व बड़े झटके) महसूस करने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने पुखरायां स्टेशन पर स्टेशन मास्टर से सवाल-जवाब किए और रिकार्ड भी चेक किया। शाम को वे ट्रैक पर कुर्सी डालकर भी अफसरों से मंथन करते रहे। दुर्घटनास्थल पर तत्कालीन डीआरएम एसके अग्रवाल, अपर मंडल रेल प्रबंधक विनीत सिंह, मुख्य कारखाना प्रबंधक झांसी अतुल्य सिन्हा, वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता इलाहाबाद एके सिंह भी मौजूद रहे। 
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गौरतबल है कि हादसे के दूसरे दिन 21 नंवबर को मुख्य संरक्षा आयुक्त की जांच ने रेल फ्रैक्चर के कारण दुर्घटना होने के संकेत दिए थे। 24 नवंबर को दुर्घटनास्थल का दूसरी बार अवलोकन कर उन्होंने क्षतिग्रस्त बोगियों की पड़ताल शुरू करवा दी थी। 

गार्ड से पूछा टार्च थी तो क्यों नहीं देखा खंभा नंबर 
मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) पीके आचार्य ने बुधवार को इंदौर-पटना एक्सप्रेस में तैनात गार्ड एके श्रीवास्तव को दुर्घटनास्थल पर बुलाया था। दोपहर करीब एक बजे सीआरएस ने गार्ड से उसकी जिम्मेदारी से जुड़े सवाल पूछे। पूछा कि ड्यूटी के दौरान क्या ब्रेकवान में बैठे रहते हो? हादसे के बाद खंभा नंबर नोट क्यों नहीं किया था? टॉर्च साथ में नहीं थी क्या? इस पर गार्ड ने कहा कि झटका लगने के बाद वह गिर गया था। इस कारण टॉर्च होने के बाद भी खंभा नंबर नोट नहीं कर सका। इसके अलावा भी सीआरएस ने गार्ड से कई क्रास सवाल किए, जिनके वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। इस पर गार्ड को फटकार भी मिली।     

ट्रैकमैनों को रखा दूर 
जांच के दौरान दुर्घटनास्थल पर काम कर रहे ट्रैकमैनों को क्रासिंग गेट की दूसरी तरफ भेज दिया गया था। उनसे कह दिया गया कि जांच होने तक वे दूर ही रहें। मालूम हो कि दुर्घटनास्थल पर तीन दिन भोजन न मिलने व इसके बाद बेवक्त भोजन मिलने से ट्रैकमैन परेशान चल रहे हैं। अफसरों को लग रहा था कि कहीं ट्रैकमैन अपनी समस्या को मुख्य संरक्षा आयुक्त के समक्ष न रख दें। 
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