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टैंकर पहुंचते ही टूट पड़ते हैं लोग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2016 01:03 AM IST
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water problem, jhansi news
- फोटो : amar ujala
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झांसी। अंदर उन्नाव गेट स्थित सरांय मुहल्ले के लोग इन दिनों अपना कामकाज छोड़कर दिन भर पानी के टैंकर के आने का इंतजार करते रहते हैं। टैंकर के आते ही लोग पानी भरने के लिए टूट पड़ते हैं। लोगों में इस कदर संघर्ष नजर आता है कि टैंकर को खाली होने में दस से पंद्रह मिनट का समय भी नहीं लगता है। अगर, कोई परिवार पानी भरने से चूक जाए तो उसके पास दूसरे दिन के इंतजार के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं रहता है।
यहां रहने वाली जशोदा का कहना है कि पिछले दो साल से केवल सर्दियों के दिनों में नल से पानी आता है। बाकी दिनों में हैंडपंप से ही पानी भरना पड़ता है। भारती ने कहा कि गर्मियों में क्षेत्र में हैंडपंप भी पानी देना बंद कर देते हैं। ऐसे में टैंकर का ही सहारा बचता है। दशरथ का कहना है कि उन्नाव गेट चौकी पर पानी की टंकी बननी थी, मगर उसे दो किलोमीटर दूर पंचवटी कॉलोनी के पास बना दिया।
जगदीश साहू ने कहा कि पानी की व्यवस्था करने के चक्कर में पूरी दिनचर्या खराब हो गई है। जवाहर लाल राय का कहना था कि अगर यही हालात बने रहे तो उनको भी पानी खरीद लेना पड़ेगा। सनी विश्वकर्मा ने कहा कि उन्नाव गेट के पास ही पानी की टंकी बननी चाहिए, ताकि यहां पर पाइपों लाइनों में भी पानी आ सके।
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नंदनपुरा में सूखे अधिकांश हैंडपंप
नंदनपुरा क्षेत्र में जलस्तर गिरने से अधिकांश हैंडपंप सूख गए हैं, जिन हैंडपंपों में थोड़ा बहुत पानी आ भी रहा है तो उनमें हर समय पानी भरने वालों की कतार लगी रहती है।
यहां रहने वाली संपत का कहना है कि हैंडपंप पर पानी भरने के लिए रात में जागना पड़ता है। इससे उनकी नींद तक पूरी नहीं हो पा रही है। अंजू का कहना था कि दिन भर में हैंडपंप से भी तीन- चार बाल्टी पानी मिल पाता है।
रामकुमारी ने बताया कि हैंडपंप से हर पंद्रह मिट में पांच मिनट के लिए पानी निकलता है, इस कारण बर्तन कतार में रखकर जाना पड़ता है। संजय सेवनिया ने कहा कि क्षेत्र में पाइप लाइन बिछी है, मगर नलों में पानी नहीं आ रहा है। यह समस्या पिछले दो साल से बनी हुई है। आशीष वर्मा ने कहा कि गली नंबर सात में लगे हैंडपंप से हम लोग पानी भरते है।
हैंडपंप से पानी निकलना बंद होने पर उन्हें गली नंबर आठ में लगे हैंडपंप पर पानी भरने जाना पड़ता है। लखन वर्मा का कहना था कि कभी कभार पानी का टैंकर आता है। मगर, जो व्यक्ति टैंकर चालक को पैसे दे देता है। चालक टैंकर को उसी के घर के बाहर खड़ा कर देता है।
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यहां रहने वाली जशोदा का कहना है कि पिछले दो साल से केवल सर्दियों के दिनों में नल से पानी आता है। बाकी दिनों में हैंडपंप से ही पानी भरना पड़ता है। भारती ने कहा कि गर्मियों में क्षेत्र में हैंडपंप भी पानी देना बंद कर देते हैं। ऐसे में टैंकर का ही सहारा बचता है। दशरथ का कहना है कि उन्नाव गेट चौकी पर पानी की टंकी बननी थी, मगर उसे दो किलोमीटर दूर पंचवटी कॉलोनी के पास बना दिया।
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जगदीश साहू ने कहा कि पानी की व्यवस्था करने के चक्कर में पूरी दिनचर्या खराब हो गई है। जवाहर लाल राय का कहना था कि अगर यही हालात बने रहे तो उनको भी पानी खरीद लेना पड़ेगा। सनी विश्वकर्मा ने कहा कि उन्नाव गेट के पास ही पानी की टंकी बननी चाहिए, ताकि यहां पर पाइपों लाइनों में भी पानी आ सके।
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नंदनपुरा में सूखे अधिकांश हैंडपंप
नंदनपुरा क्षेत्र में जलस्तर गिरने से अधिकांश हैंडपंप सूख गए हैं, जिन हैंडपंपों में थोड़ा बहुत पानी आ भी रहा है तो उनमें हर समय पानी भरने वालों की कतार लगी रहती है।
यहां रहने वाली संपत का कहना है कि हैंडपंप पर पानी भरने के लिए रात में जागना पड़ता है। इससे उनकी नींद तक पूरी नहीं हो पा रही है। अंजू का कहना था कि दिन भर में हैंडपंप से भी तीन- चार बाल्टी पानी मिल पाता है।
रामकुमारी ने बताया कि हैंडपंप से हर पंद्रह मिट में पांच मिनट के लिए पानी निकलता है, इस कारण बर्तन कतार में रखकर जाना पड़ता है। संजय सेवनिया ने कहा कि क्षेत्र में पाइप लाइन बिछी है, मगर नलों में पानी नहीं आ रहा है। यह समस्या पिछले दो साल से बनी हुई है। आशीष वर्मा ने कहा कि गली नंबर सात में लगे हैंडपंप से हम लोग पानी भरते है।
हैंडपंप से पानी निकलना बंद होने पर उन्हें गली नंबर आठ में लगे हैंडपंप पर पानी भरने जाना पड़ता है। लखन वर्मा का कहना था कि कभी कभार पानी का टैंकर आता है। मगर, जो व्यक्ति टैंकर चालक को पैसे दे देता है। चालक टैंकर को उसी के घर के बाहर खड़ा कर देता है।