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बर्खास्त शिक्षक प्रकरण में आयुक्त ने लिखा पत्र
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग में टीक्यूप-3 प्रोजेक्ट के अंतर्गत कार्यरत बर्खास्त शिक्षक के मामले में मंडलायुक्त ने कुलपति को पत्र लिखा है। पत्र में आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई है।
बीयू में टीक्यूप-3 प्रोजेक्ट के अंतर्गत कार्यरत रहे शिक्षक राजकुमार सिंह ने मंडलायुक्त को प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी में बिना किसी गलती के उसे बर्खास्त कर दिया गया है। हर जगह निदेशक द्वारा झूठी आख्या भेजी जा रही है। हाईकोर्ट से भी उसे राहत मिल चुकी है। फिर भी ज्वाइन नहीं कराया जा रहा है। साथ ही विभाग के शिक्षकों पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वो साथ न बैठाएं और न बात करें। समन्वयक पर भी यह दबाव बनाया जा रहा है कि वह यह लिखकर दे दें कि विभाग में मुझे रखने की कोई जरूरत नहीं है।
बर्खास्त शिक्षक ने कार्रवाई को भेदभावपूर्ण करार दिया है। हालांकि, बीयू अधिकारी भेदभाव पूर्ण वाली बात को नकारकर शिक्षक पर झूठे आरोप मड़ने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, शिक्षक के शिकायती पत्र के आधार पर कमिश्नर ने विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है। कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर शिक्षक को सितंबर तक का मानदेय का भुगतान के आदेश किए जा चुके हैं। मामले में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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भ्रष्टाचार के आरोपों की पहुंची डाक
शुक्रवार को बीयू के इंजीनियरिंग संस्थान विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों की डाक अधिकारियों से लेकर शिक्षकोें के पास पहुंची। इससे चर्चा का बाजार गर्म रहा। हर कोई एक-दूसरे से डाक के संबंध में बातचीत करता रहा। पत्र में खरीदारी में तमाम तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुलपति ने कहा कि पत्र में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है और न ही आरोप स्पष्ट हैं। सबूत मिलेगा तो कार्रवाई की जाएगी।
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बीयू में टीक्यूप-3 प्रोजेक्ट के अंतर्गत कार्यरत रहे शिक्षक राजकुमार सिंह ने मंडलायुक्त को प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी में बिना किसी गलती के उसे बर्खास्त कर दिया गया है। हर जगह निदेशक द्वारा झूठी आख्या भेजी जा रही है। हाईकोर्ट से भी उसे राहत मिल चुकी है। फिर भी ज्वाइन नहीं कराया जा रहा है। साथ ही विभाग के शिक्षकों पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वो साथ न बैठाएं और न बात करें। समन्वयक पर भी यह दबाव बनाया जा रहा है कि वह यह लिखकर दे दें कि विभाग में मुझे रखने की कोई जरूरत नहीं है।
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बर्खास्त शिक्षक ने कार्रवाई को भेदभावपूर्ण करार दिया है। हालांकि, बीयू अधिकारी भेदभाव पूर्ण वाली बात को नकारकर शिक्षक पर झूठे आरोप मड़ने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, शिक्षक के शिकायती पत्र के आधार पर कमिश्नर ने विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है। कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर शिक्षक को सितंबर तक का मानदेय का भुगतान के आदेश किए जा चुके हैं। मामले में नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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भ्रष्टाचार के आरोपों की पहुंची डाक
शुक्रवार को बीयू के इंजीनियरिंग संस्थान विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपों की डाक अधिकारियों से लेकर शिक्षकोें के पास पहुंची। इससे चर्चा का बाजार गर्म रहा। हर कोई एक-दूसरे से डाक के संबंध में बातचीत करता रहा। पत्र में खरीदारी में तमाम तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कुलपति ने कहा कि पत्र में कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है और न ही आरोप स्पष्ट हैं। सबूत मिलेगा तो कार्रवाई की जाएगी।