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10 महीने से सुपर स्पेशियलिटी इलाज को तरस रहे झांसीवासी
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झांसी। कोरोना वायरस के चलते पिछले 10 महीने से सुपर स्पेशियलिटी इलाज के लिए झांसी के लोग तरस रहे हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को कोविड अस्पताल में तब्दील करने के बाद यहां पर सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं ठप हैं। हालांकि, कोरोना के घटते मामलों के चलते अब कोविड अस्पताल वार्ड नंबर नौ में शिफ्ट करने पर कॉलेज प्रशासन विचार कर रहा है। इसके लिए शासन से जल्द दिशा-निर्देश मांगा जाएगा।
मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत 150 करोड़ की लागत से सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग का निर्माण कराया गया है। आठ दिसंबर 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बिल्डिंग का शुभारंभ किया था। ब्लॉक में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी विभाग की अलग यूनिट बनी हैं। यहीं पर सभी छह विभाग की ओपीडी की सुविधा है। हर विभाग में मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्ड हैं, जिसमें 60-60 बेड हैं। साथ ही मॉड्यूलर और माइनर ओटी भी है। हर यूनिट में अत्याधुनिक मशीनें भी मंगवाई गई हैं, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की भागदौड़ न करनी पड़ी। बिल्डिंग में उपचार शुरू होने के तीन-चार महीने बाद ही कोरोना महामारी फैल गई। इस कारण बिल्डिंग को कोविड अस्पताल में तब्दील करना पड़ गया। हालांकि, अब कोरोना के मरीज काफी घट गए हैं। शासन ने भी मेडिकल कॉलेज को छोड़कर एल-1 और एल-2 इकाइयों को कोविड मुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सुपर स्पेशियलिटी इलाज फिर कब से शुरू होगा? अभी ह्रदय, गुर्दा, न्यूरो आदि से संबंधित उपचार के लिए मरीजों को निजी अस्पताल या फिर दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोविड अस्पताल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर ली है।
ताले में बंद कैथ लैब और आधुनिक मशीनें
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी के लिए कैथ लैब तैयार है। कोविड के मरीज भर्ती होने की वजह से यह लैब बंद पड़ी हुई है। मशीनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मशीनें खराब होने का डर भी सताने लगा है। इसके अलावा नेफ्रोलॉजी यूनिट में डायलिसिस के लिए भी आधुनिक मशीन मंगवाई गई है, जिसकी कीमत 22 लाख रुपये है। इस मशीन की खासियत ये है कि कम रक्तचाप के मरीजों की डायलिसिस भी आसानी से कर देती है। दो मशीनें हीमो डाइफिल्ट्रेशन के लिए भी रखी हुई हैं।
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सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में कोविड अस्पताल संचालित है। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते ऑर्थोपेडिक के वार्ड नंबर नौ को भी कोविड वार्ड के रूप में तैयार किया गया था। हालांकि, तब केस घटने लगे और इसका उपयोग नहीं हो पाया। चूंकि, अब कोरोना के बहुत कम मामले आ रहे हैं और वार्ड में सभी प्रकार की सुविधाएं हैं। ऐसे में शासन से कोविड अस्पताल को वार्ड नौ में शिफ्ट करने के लिए दिशा-निर्देश मांगा जाएगा। शासन से निर्देशों के अनुसार ही अग्रिम कार्रवाई होगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत 150 करोड़ की लागत से सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग का निर्माण कराया गया है। आठ दिसंबर 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बिल्डिंग का शुभारंभ किया था। ब्लॉक में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी विभाग की अलग यूनिट बनी हैं। यहीं पर सभी छह विभाग की ओपीडी की सुविधा है। हर विभाग में मरीजों को भर्ती करने के लिए वार्ड हैं, जिसमें 60-60 बेड हैं। साथ ही मॉड्यूलर और माइनर ओटी भी है। हर यूनिट में अत्याधुनिक मशीनें भी मंगवाई गई हैं, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की भागदौड़ न करनी पड़ी। बिल्डिंग में उपचार शुरू होने के तीन-चार महीने बाद ही कोरोना महामारी फैल गई। इस कारण बिल्डिंग को कोविड अस्पताल में तब्दील करना पड़ गया। हालांकि, अब कोरोना के मरीज काफी घट गए हैं। शासन ने भी मेडिकल कॉलेज को छोड़कर एल-1 और एल-2 इकाइयों को कोविड मुक्त करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सुपर स्पेशियलिटी इलाज फिर कब से शुरू होगा? अभी ह्रदय, गुर्दा, न्यूरो आदि से संबंधित उपचार के लिए मरीजों को निजी अस्पताल या फिर दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कोविड अस्पताल को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर ली है।
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ताले में बंद कैथ लैब और आधुनिक मशीनें
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी के लिए कैथ लैब तैयार है। कोविड के मरीज भर्ती होने की वजह से यह लैब बंद पड़ी हुई है। मशीनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मशीनें खराब होने का डर भी सताने लगा है। इसके अलावा नेफ्रोलॉजी यूनिट में डायलिसिस के लिए भी आधुनिक मशीन मंगवाई गई है, जिसकी कीमत 22 लाख रुपये है। इस मशीन की खासियत ये है कि कम रक्तचाप के मरीजों की डायलिसिस भी आसानी से कर देती है। दो मशीनें हीमो डाइफिल्ट्रेशन के लिए भी रखी हुई हैं।
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सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में कोविड अस्पताल संचालित है। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते ऑर्थोपेडिक के वार्ड नंबर नौ को भी कोविड वार्ड के रूप में तैयार किया गया था। हालांकि, तब केस घटने लगे और इसका उपयोग नहीं हो पाया। चूंकि, अब कोरोना के बहुत कम मामले आ रहे हैं और वार्ड में सभी प्रकार की सुविधाएं हैं। ऐसे में शासन से कोविड अस्पताल को वार्ड नौ में शिफ्ट करने के लिए दिशा-निर्देश मांगा जाएगा। शासन से निर्देशों के अनुसार ही अग्रिम कार्रवाई होगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।