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सन सत्तावन में चमकी रानी की तलवार आखिर कब आएगी झांसी
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सन सत्तावन में चमकी रानी की तलवार आखिर कब आएगी झांसी
झांसी। चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के लिए काल बनकर दामिनी की तरह चमकने वाली इस पुरानी तलवार के बिना तो झांसी की रानी की शौर्यगाथा की कल्पना भी अधूरी है। पर, दुर्भाग्य कि गुलाम भारत में अंग्रेजों के द्वारा अपने मित्र ग्वालियर नरेश सिंधिंया को सौंपी गई बाईसा की यह तलवार आजादी के बाद भी ग्वालियर के संग्रहालय में कैद है। इसके दीदार के लिए बुंदेलखंड के लोग आज भी तरस रहे हैं। गुलाम भारत में न सही पर आजाद भारत में तो कम से कम झांसी के राजनेताओं में इतनी इच्छा शक्ति होना चाहिए थी कि वे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की दीपशिखा झांसी की रानी की वीरगाथा के साक्षी इन स्मृति चिह्नों को झांसी ले आते, पर अब तक छोटे आंदोलनों को छोड़ दें तो बड़े नेताओं की ओर से इस संबंध कोई पहल नहीं की गई।
बाईसा की शौर्य गाथा के साक्षी इन शस्त्रों को देखने के लिए बुंदेलखंडवासियों को ग्वालियर जाना होता है। पहले संग्रहालय का दो सौ रुपये का टिकट खरीदना होता है, अगर आप कैमरे से फोटो निकालकर लाना चाहते हैं तो आपको चार सौ रुपये का भुगतान करना होगा। संसद और विधानसभा में झांसी की रानी के नाम पर अपने को गौरवान्वित करने वाले सांसद और विधायकों की आत्मा ने अब तक उन्हें नहीं झकझोरा कि बुंदेलखंड की नई पीढ़ी जिस तलवार के गीत गाकर बड़ी होती है कम से कम उसका दीदार करके राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा ले सके। झांसी वासियों का कहना है कि रानी लक्ष्मी बाई की तलवार और अन्य शस्त्र जो ग्वालियर नगर निगम के संग्रहालय में रखे हुए हैं। इन्हें वापस झांसी लाया जाए। यह हमारी अमूल्य विरासत हैं। इनकी वापसी के लिए सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए। केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार भी इस मामले में दखल दें।
कहते हैं लोग
महारानी लक्ष्मीबाई की तलवार जो ग्वालियर में है। वह जल्द से जल्द झांसी आए। इसके लिए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को भी दखल देना चाहिए।
रमेश चक्रवर्ती सीपरी
रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ी हुई प्रत्येक वस्तु झांसी की धरोहर है। जो झांसी में ही होना चाहिए। इनकी वापसी के लिए सभी को मिलजुलकर प्रयास करना चाहिए।
शिवा नौराई व्यापारी
रानी की धरोहर जो बेहद अमूल्य है, को ग्वालियर में नहीं बल्कि झांसी में होना चाहिए। ताकि रानी की तलवार देश.विदेश से आने वाले पर्यटक देख सकें।
अभिषेक साहू व्यापारी
विश्व में झांसी को विख्यात करने वाली वीरांगना के शस्त्र झांसी में ही नहीं है। यह हम सभी के लिए खेद का विषय है। इन्हें वापस लाने के लिए सब मिलकर प्रयास करें।
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प्रवीण तिवारी
पर्यटक झांसी में वीरांगना से संबंधित वस्तुओं एवं स्थलों को देखने आते हैं। जब उन्हें यहां रानी की तलवार एवं अन्य शस्त्र नहीं दिखते हैंए तो वह निराश हो जाते हैं।
अंजनी श्रीवास्तव सीपरी
हम सभी झांसी वासी मिलकर मांग करेंए रानी की तलवार वापस झांसी आए। यह हमारे नगर की अमूल्य धरोहर और विरासत है।
कंवलजीत सिंह भामरा सीपरी
सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को मिलकर मिलकर आंदोलन करना चाहिए। रानी की तलवार वापसी के लिए इसमें जन सहभागिता व्यापक रूप से भी होना चाहिए।
राकेश श्रीवास्तव एडवोकेट
रानी की गौरव गाथा से जुड़े सभी चिन्ह और वस्तु एक जगह ही संग्रहित होना चाहिए। सरकार भी झांसी के पर्यटन विकास को देखते हुए इस ओर गंभीर हो।
धर्मेन्द्र चौधरी शिक्षक
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झांसी। चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के लिए काल बनकर दामिनी की तरह चमकने वाली इस पुरानी तलवार के बिना तो झांसी की रानी की शौर्यगाथा की कल्पना भी अधूरी है। पर, दुर्भाग्य कि गुलाम भारत में अंग्रेजों के द्वारा अपने मित्र ग्वालियर नरेश सिंधिंया को सौंपी गई बाईसा की यह तलवार आजादी के बाद भी ग्वालियर के संग्रहालय में कैद है। इसके दीदार के लिए बुंदेलखंड के लोग आज भी तरस रहे हैं। गुलाम भारत में न सही पर आजाद भारत में तो कम से कम झांसी के राजनेताओं में इतनी इच्छा शक्ति होना चाहिए थी कि वे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की दीपशिखा झांसी की रानी की वीरगाथा के साक्षी इन स्मृति चिह्नों को झांसी ले आते, पर अब तक छोटे आंदोलनों को छोड़ दें तो बड़े नेताओं की ओर से इस संबंध कोई पहल नहीं की गई।
बाईसा की शौर्य गाथा के साक्षी इन शस्त्रों को देखने के लिए बुंदेलखंडवासियों को ग्वालियर जाना होता है। पहले संग्रहालय का दो सौ रुपये का टिकट खरीदना होता है, अगर आप कैमरे से फोटो निकालकर लाना चाहते हैं तो आपको चार सौ रुपये का भुगतान करना होगा। संसद और विधानसभा में झांसी की रानी के नाम पर अपने को गौरवान्वित करने वाले सांसद और विधायकों की आत्मा ने अब तक उन्हें नहीं झकझोरा कि बुंदेलखंड की नई पीढ़ी जिस तलवार के गीत गाकर बड़ी होती है कम से कम उसका दीदार करके राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा ले सके। झांसी वासियों का कहना है कि रानी लक्ष्मी बाई की तलवार और अन्य शस्त्र जो ग्वालियर नगर निगम के संग्रहालय में रखे हुए हैं। इन्हें वापस झांसी लाया जाए। यह हमारी अमूल्य विरासत हैं। इनकी वापसी के लिए सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर प्रयास करना चाहिए। केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार भी इस मामले में दखल दें।
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कहते हैं लोग
महारानी लक्ष्मीबाई की तलवार जो ग्वालियर में है। वह जल्द से जल्द झांसी आए। इसके लिए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को भी दखल देना चाहिए।
रमेश चक्रवर्ती सीपरी
रानी लक्ष्मीबाई से जुड़ी हुई प्रत्येक वस्तु झांसी की धरोहर है। जो झांसी में ही होना चाहिए। इनकी वापसी के लिए सभी को मिलजुलकर प्रयास करना चाहिए।
शिवा नौराई व्यापारी
रानी की धरोहर जो बेहद अमूल्य है, को ग्वालियर में नहीं बल्कि झांसी में होना चाहिए। ताकि रानी की तलवार देश.विदेश से आने वाले पर्यटक देख सकें।
अभिषेक साहू व्यापारी
विश्व में झांसी को विख्यात करने वाली वीरांगना के शस्त्र झांसी में ही नहीं है। यह हम सभी के लिए खेद का विषय है। इन्हें वापस लाने के लिए सब मिलकर प्रयास करें।
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प्रवीण तिवारी
पर्यटक झांसी में वीरांगना से संबंधित वस्तुओं एवं स्थलों को देखने आते हैं। जब उन्हें यहां रानी की तलवार एवं अन्य शस्त्र नहीं दिखते हैंए तो वह निराश हो जाते हैं।
अंजनी श्रीवास्तव सीपरी
हम सभी झांसी वासी मिलकर मांग करेंए रानी की तलवार वापस झांसी आए। यह हमारे नगर की अमूल्य धरोहर और विरासत है।
कंवलजीत सिंह भामरा सीपरी
सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को मिलकर मिलकर आंदोलन करना चाहिए। रानी की तलवार वापसी के लिए इसमें जन सहभागिता व्यापक रूप से भी होना चाहिए।
राकेश श्रीवास्तव एडवोकेट
रानी की गौरव गाथा से जुड़े सभी चिन्ह और वस्तु एक जगह ही संग्रहित होना चाहिए। सरकार भी झांसी के पर्यटन विकास को देखते हुए इस ओर गंभीर हो।
धर्मेन्द्र चौधरी शिक्षक