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सूखे से जूझने वाले बुंदेलखंड के किसानों की आमदनी बढ़ाएगा आईएफएस

Mon, 15 Feb 2021 01:49 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 15 Feb 2021 01:49 AM IST
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sukhe se jhugne bale bundelkhand ke kishano ki aamdani bdayga aifs
भारतीय चरागाह और चारा अनुसंधान संस्थान में एकीकृत कृषि प्रणाली के तहत लगाई गई फसलें।
सूखे से जूझने वाले बुंदेलखंड के किसानों की आमदनी बढ़ाएगा आईएफएस
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झांसी। बुंदेलखंड में सूखे और जलवायु परिवर्तन की वजह से खेती में नुकसान झेल रहे किसानों की आय अब पशु आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) से बढ़ेगी। खेती के अलावा अन्य संसाधनों के जरिए किसानों को सक्षम बनाने के लिए भारतीय चरागाह और चारा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने नई तकनीक ईजाद की। इस तकनीक को लेकर हुए अध्ययन के बाद पाया गया कि किसानों की आय में करीब डेढ़ लाख रुपये तक का इजाफा हुआ।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक और वैज्ञानिक डॉ. डी आर पलसानिया ने बताया आईएफएस के तहत संस्थान के प्रक्षेत्र में सिंचित दशाओं में एक हेक्टेयर की तीन और असिंचित दशा में दो एकीकृत कृषि प्रणालियों का विकास और मूल्यांकन किया गया। प्रणाली से किसानों को 162593 रुपये की आय, 431 दिनों का रोजगार सर्जन के साथ 1.52 फीसदी लाभ हुआ। 0.2 हेक्टेयर में अमरूद, मूंगफ ली और गेहूं, 0.4 हेक्टेयर में ज्वार और गेहूं, 0.4 हेक्टेयर में बाजरा, लोबिया और बरसीम आधारित हरा चारे का उत्पादन किया गया। दो गाय और दो भैंस पाले गए जिससे किसानों की आय में इजाफा होने के साथ मिट्टी की सेहत में भी सुधार हुआ। बारिश के पानी के भंडारण के लिए तालाब बनाया गया जिससेे फ व्वारा विधि से फसलों की सिंचाई कर पैदावार प्राप्त की गई। संस्थान के डॉ. गौरेंद्र गुप्ता बताते हैं कि जिले के अंबावाय, करारी, दातार नगर, पाडरी, उन्नाव, केशवपुर, सिमरधा समेत कई गांवों के किसान इस प्रणाली को अपना रहे हैं।
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वर्जन
बुंदेलखंड में औसतन किसान अपनी आय का 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सा फ सल और पशुधन से प्राप्त करते हैं। सूखे और अन्य जलवायु परिवर्तन के चलते किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में किसान रोजगार के लिए शहरों की ओर आते हैं। संस्थान की नई तकनीक में पाया गया कि किसान खेती के साथ अन्य संसाधनों से भी आय प्राप्त कर सकते हैं। जिले के कई किसान इसको अपना भी रहे हैं। डॉ. विजय यादव, निदेशक, भारतीय चरागाह और चारा अनुसंधान संस्थान झांसी
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