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हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं
Jhansi
Updated Thu, 15 Sep 2016 12:26 AM IST
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हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं
- फोटो : Amar Ujala
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झांसी। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से चरमरा गई हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीणों को इलाज के लिए शहरों की ओर भागना पड़ रहा है। इसके अलावा झोलाछाप डाक्टर भी खूब चांदी काट रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की नियमित नियुक्तियों में संविदा कर्मियों को प्राथमिकता देने, अन्य विभागों की तरह रिजवी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने, आउट सोर्सिंग से तैनात बीपीएम व एमसीटीएस आपरेटरों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित करने, आशा बहुओं को निश्चित मानदेय व कर्मचारी का दर्जा देने तथा एनएचएम से निष्कासित कर्मियों की सेवा बहाली की मांग को लेकर जिले में स्वास्थ्य विभाग के लगभग दो हजार संविदा कर्मचारी छह सितंबर से हड़ताल पर हैं। वह प्राथमिक व सामुदायिक केंद्र जाने की जगह रोजाना मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। डाक्टर व अन्य स्टाफ के न होने की वजह से इलाज नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा टीकाकरण का काम प्रभावित है। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण का काम भी ठप पड़ा हुआ है। टीबी के मरीजों का परीक्षण व दवा वितरण का काम भी नहीं हो पा रहा है।
महिला मरीजों का बुरा हाल
मोंठ (झांसी)। मोंठ सीएचसी के अंतर्गत समथर, पूंछ, लोहागढ़, शाहजहांपुर आदि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 55 संविदा कर्मचारी तैनात है, जिसमें मोंठ अस्पताल में 22 कर्मचारी कार्यरत हैं। अस्पताल में तैनात महिला डाक्टर के हड़ताल पर जाने से महिला मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें उपचार नहीं मिल पा रहा है। यही हाल अस्पताल के प्रसव कक्ष का है, जहां पर दो एएनएम के अलावा चार संविदा स्टाफ नर्स तैनात हैं। स्टाफ नर्सों के हड़ताल पर होने से गर्भवती महिलाओं को भारी समस्या हो रही है। एएनएम को अतिरिक्त घंटों में ड्यूटी करनी पड़ रही है।
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मरीज परेशान , टीकाकरण प्रभाबित
चिरगांव (झांसी)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चिरगांव ब्लाक में 45 कर्मचारी हैं। कर्मचारियों की हड़ताल से यहां भी स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाई हुई हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. रवींद्र सिंह ने बताया कि पहले आयुष चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से वह स्वयं व अन्य दो चिकित्सकों के ओपीडी में मरीजों को देख रहे हैं । हड़ताल का असर कार्यालय के कार्यों पर भी है। कंप्यूटर आपरेटर न होने से शासन को समय से रिपोर्ट नहीं पहुंच पा रही हैं। इसके अलावा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हैं।
एडी के आवास पर दिया धरना
झांसी। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले बुधवार की सुबह हड़ताली कर्मचारी मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर इकट्ठा हुए। यहां कुछ समय रुकने के बाद वह नजदीक में बने अपर निदेशक स्वास्थ्य के आवास पर पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। शाम तक वह यहीं जमे रहे। हड़ताली कर्मियों का कहना है कि उन्हें सीएमओ ने परिसर से बाहर जाने को कहा था। जबकि, सीएमओ का कहना है कि वह खुद उठकर एडी हेल्थ के आवास पर पहुंच गए थे।
धरना प्रदर्शन के दौरान डा. चंदन सिंह, डा. संजय सिंह, डा. सपना श्रीवास्तव, डा. राबिंसन तिवारी, डा. सुनील पांडेय, डा. नीतू सोनी, डा. पूनम आर्या, डा. नेहा दुबे, डा. दुष्यंत सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता वासुदेव गोस्वामी ने की। संचालन डा. प्रमोद यादव ने किया।
प्रभावित हैं, पर ठप नहीं हुईं सेवाएं
संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित तो हुई हैं, परंतु ठप नहीं पड़ी हैं। स्थायी कर्मचारी मोर्चा संभाले हुए हैं। इसके अलावा तमाम हड़ताल कर्मचारी भी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिससे काम चल रहा है। हड़ताल का लंबा खिंचना ठीक नहीं है। यह बात समझते हुए कर्मचारियों को काम पर वापस लौट आना चाहिए। उनकी मांग शासन को भेज दी गई है।
- डा. विनोद यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी
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स्वास्थ्य विभाग की नियमित नियुक्तियों में संविदा कर्मियों को प्राथमिकता देने, अन्य विभागों की तरह रिजवी कमेटी की सिफारिशों को लागू करने, आउट सोर्सिंग से तैनात बीपीएम व एमसीटीएस आपरेटरों को जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित करने, आशा बहुओं को निश्चित मानदेय व कर्मचारी का दर्जा देने तथा एनएचएम से निष्कासित कर्मियों की सेवा बहाली की मांग को लेकर जिले में स्वास्थ्य विभाग के लगभग दो हजार संविदा कर्मचारी छह सितंबर से हड़ताल पर हैं। वह प्राथमिक व सामुदायिक केंद्र जाने की जगह रोजाना मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई हैं। डाक्टर व अन्य स्टाफ के न होने की वजह से इलाज नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा टीकाकरण का काम प्रभावित है। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण का काम भी ठप पड़ा हुआ है। टीबी के मरीजों का परीक्षण व दवा वितरण का काम भी नहीं हो पा रहा है।
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महिला मरीजों का बुरा हाल
मोंठ (झांसी)। मोंठ सीएचसी के अंतर्गत समथर, पूंछ, लोहागढ़, शाहजहांपुर आदि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 55 संविदा कर्मचारी तैनात है, जिसमें मोंठ अस्पताल में 22 कर्मचारी कार्यरत हैं। अस्पताल में तैनात महिला डाक्टर के हड़ताल पर जाने से महिला मरीजों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें उपचार नहीं मिल पा रहा है। यही हाल अस्पताल के प्रसव कक्ष का है, जहां पर दो एएनएम के अलावा चार संविदा स्टाफ नर्स तैनात हैं। स्टाफ नर्सों के हड़ताल पर होने से गर्भवती महिलाओं को भारी समस्या हो रही है। एएनएम को अतिरिक्त घंटों में ड्यूटी करनी पड़ रही है।
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मरीज परेशान , टीकाकरण प्रभाबित
चिरगांव (झांसी)। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चिरगांव ब्लाक में 45 कर्मचारी हैं। कर्मचारियों की हड़ताल से यहां भी स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाई हुई हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. रवींद्र सिंह ने बताया कि पहले आयुष चिकित्सकों के हड़ताल पर जाने से वह स्वयं व अन्य दो चिकित्सकों के ओपीडी में मरीजों को देख रहे हैं । हड़ताल का असर कार्यालय के कार्यों पर भी है। कंप्यूटर आपरेटर न होने से शासन को समय से रिपोर्ट नहीं पहुंच पा रही हैं। इसके अलावा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हैं।
एडी के आवास पर दिया धरना
झांसी। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले बुधवार की सुबह हड़ताली कर्मचारी मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय पर इकट्ठा हुए। यहां कुछ समय रुकने के बाद वह नजदीक में बने अपर निदेशक स्वास्थ्य के आवास पर पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। शाम तक वह यहीं जमे रहे। हड़ताली कर्मियों का कहना है कि उन्हें सीएमओ ने परिसर से बाहर जाने को कहा था। जबकि, सीएमओ का कहना है कि वह खुद उठकर एडी हेल्थ के आवास पर पहुंच गए थे।
धरना प्रदर्शन के दौरान डा. चंदन सिंह, डा. संजय सिंह, डा. सपना श्रीवास्तव, डा. राबिंसन तिवारी, डा. सुनील पांडेय, डा. नीतू सोनी, डा. पूनम आर्या, डा. नेहा दुबे, डा. दुष्यंत सिंह आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता वासुदेव गोस्वामी ने की। संचालन डा. प्रमोद यादव ने किया।
प्रभावित हैं, पर ठप नहीं हुईं सेवाएं
संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित तो हुई हैं, परंतु ठप नहीं पड़ी हैं। स्थायी कर्मचारी मोर्चा संभाले हुए हैं। इसके अलावा तमाम हड़ताल कर्मचारी भी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिससे काम चल रहा है। हड़ताल का लंबा खिंचना ठीक नहीं है। यह बात समझते हुए कर्मचारियों को काम पर वापस लौट आना चाहिए। उनकी मांग शासन को भेज दी गई है।
- डा. विनोद यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी